इतिहास

अकबर का इतिहास और जीवन परिचय

अकबर का जीवन परिचय और इतिहास
Written by Vinod Pant

ये तो लगभग हम सभी लोग जानते है की अकबर मुग़ल काल का सबसे कुशल और धर्म निरपेक्ष बादशाह था |  मुग़ल काल का इतिहास काफी बड़ा और प्राचीन है | आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से अकबर का इतिहास और जीवन परिचय  के बारे में अनेक महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास करेंगे |

अकबर का प्रारम्भिक जीवन –

सन 1540 ई0 में मुगलों का सम्राट  हुमायु शेरशाह सुरी से कन्नोज और चौसा के युद्ध में हार गया था |  इसके बाद शेरशाह सुरी ने कन्नौज की तरफ कुच करते हुए हुमायु के छोटे भाई के अध्यापक जिनका नाम शैख़ अली अकबर जामी था की 14 वर्षीय बेटी हमीदा बानू  विवाह कर लिया था | हमीदा बानू ने 15 वर्ष की आयु में ही सिंध प्रान्त में  जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर को जन्म दिया था |

अकबर का प्रारम्भिक जीवन

अकबर का जन्म 15 अक्टूबर सन 1542 में हुआ था | जिस समय अकबर का जन्म हुआ उस समय अकबर के माता-पिता   सिंध प्रांत के हिन्दू राजा राणा प्रसाद की शरण में थे | हुमायु निर्वासन के दौरान अकबर को काबुल लाया गया था जहाँ अकबर की परवरिश उसके चाचा ने की थी | अकबर ने अपने बचपन का सारा समय शिकार और युद्ध कला में बिताया था | अकबर ने बचपन में पढना लिखना कभी नहीं सीखा था | सन 1551 ईo में अकबर ने अपने चाचा हिंडल मिर्जा की इकलौती बेटी जिसका नाम  रुकैया सुल्तान बेगम से विवाह कर लिया था  | बेटी की शादी  अकबर से करने के कुछ दिन बाद ही हिंडल मिर्जा की एक युद्ध के दौरान मृत्यु हो गयी थी |

सन 1555 ईo में  हुमायु ने शेरशाह सुरी के बेटे इस्लाम शाह को पराजित कर दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया | दिल्ली पर कब्ज़ा करने के कुछ दिन बाद ही हुमायु की मृत्यु हो गयी | हुमायु की मृत्यु होने  के बाद अकबर के अभिभावक बैरम खान ने अकबर को 13 वर्ष की उम्र में  ही 14 फरवरी सन 1556 को दिल्ली की राजगद्दी पर बैठा दिया था |बैरम खान ने  अकबर के वयस्क होने तक राज – पाठ  का कार्यभार अपने आप ही सभाला और अकबर को  शहंशाह का खिताब दे दिया |

अकबर  का सैन्य अभियान –

शेरशाह सुरी के सम्राज्य ने छोटे बालक का भय न करते हुए हुमायु के मौत के बाद दिल्ली और आगरा के साम्राजय पर कब्ज़ा कर लिया और बैरम खान के नेतृत्व में शेरशाह सुरी के खिलाफ मोर्चा निकाल दिया | जिस समय शेरशाह सुरी  के खिलाप मोर्चा निकाला गया था उस समय शेरशाह सुरी का सेनापति हेमू था |

बैरम खान के नेतृत्व में अकबर की सेना ने हेमू को सन 1556 ई0 में पानीपत के दुसरे युद्ध में पराजित कर लिया | इसके तुरंत बाद ही मुग़ल सेना ने दिल्ली और आगरा को भी अपने अधिकार में ले कर उस पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया | इसके बाद अकबर और बैरम खान पंजाब लौट गए थे ,  जहाँ पर सिकंदर शाह पहले से ही सक्रीय था |

अकबर और बैरम खान के पंजाब लौटने के 6 महिने बाद मुगलों की सेना ने शेरशाह सुरी के खिलाफ दूसरा बड़ी लड़ाई जीत ली थी | इस लड़ाई को हारने  बाद शेरशाह सुरी बंगाल भाग गया | इसके बाद अकबर की सेना ने वर्तमान पाकिस्तान के लाहोर और पंजाब इलाके पर कब्ज़ा कर लिया |

इसके साथ ही अकबर की सेना ने भी राजपुताना शाशकों को हराकर अजमेर पर भी कब्जा कर लिया और इसके बाद ग्वालियर किले पर भी शेरशाह सुरी की सेना को हराकर कब्ज़ा कर लिया | अकबर के शासन काल के दौरान ही मुग़ल परिवार की  बेगमों को  काबुल से  भारत लाया गया था | मुग़ल परिवार की बेगमों  को भारत लाकर अकबर ने एक ऐसा कारनामा कर दिया था जो इससे पहले अकबर के दादाजी बाबर और पिता हुमायु भी नहीं कर पाए थे |

इसके बाद 1559 में मुगलों ने राजपुताना और मालवा की तरफ कुच कर दियी | जब मुग़ल सेना मालवा की तरफ कुच कर रही थी उस समय अकबर का अपने संरक्षक बैरम खान के साथ कुछ विवाद हो गया था , इसी कारण से अकबर ने बैरम खान को साम्राज्य विस्तार से रोक दिया था | जब अकबर 18 वर्ष का  हो गया उसके बाद अकबर ने राज्य के कार्यों में रूचि दिखाना शुरू कर दिया था | इसके बाद अकबर ने अपन कुछ रिश्तेदारों के कहने पर बैरम खान को सन 1560 ईo में राज्य से  निकाल दिया और मक्का से हज जाने का आदेश दे दिया |

बैरम खान हज के लिए रवाना हो गया लेकिन रास्ते में अकबर के शत्रुओं  के बहकावे में आकर  क्रांतिकारी बन गया | क्रांतिकारी बनने के बाद बैरम खान ने पंजाब में मुग़ल सेना पर हमला बोल दिया , लेकिन यहाँ मुग़ल सेना ने  बैरम खान को हरा दिया हारने के बाद  बैरम खान को समर्पण करना पड़ा और अकबर ने बैरम खान को माफ़ कर दिया | इसके बाद अकबर ने फिर से बैरम खान को मक्का जाने का आदेश दे दिया | जब बैरम खान मक्का जा रहा तो कुछ व्यक्तिगत प्रतिरोध के चलते एक अफगान ने  बैरम खान की हत्या कर दी ||

अकबर का राजपुताना आक्रमण –

उत्तरी भारत के अधिकतर राज्य पर अकबर ने अपना कब्ज़ा कर लिया था | इन राज्यों पर कब्ज़ा करने के बाद अब अकबर राजपूतो पर आक्रमण करना चाहता था | मुगलों के सेना ने उत्तरी हिस्से अजमेर और नागोर पर तो कब्ज़ा कर लिया था , लेकिन अकबर मेवाड़ की धरती पर कदम रखकर उसे भी अपने अधिकार क्षेत्र में लेना चाहता था | सन 1561 ईo में मुगलों ने कुछ राजपूतों से संपर्क कर उन्हें अपने सेना में शामिल कर लिया था | कई राजपूत राज्यों ने तो अकबर का आधिपत्य भी स्वीकार कर लिया था | केवल मेवाड़ के शाशक उदय सिंह अकबर की कूटनीति से दूर थे |

मेवाड़ के शाशक उदय सिंह के पिता  राणा सांगा में सन 1527 ई0 में  बाबर  के खिलाप खानवा के एक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए थे | जिस समय राजपूत राज्यों ने अकबर का आधिपत्य स्वीकार किया उस समय राजा उदयसिंह  सिसोदिया वंश के शासक थे और राजा उदय सिंह  ने अकबर की सेना के सामने घुटने टेकने से मना  कर दिया था | इसके बाद सन 1567 ईo में अकबर की सेना ने मेवाड़ के चित्तोड़गढ़ किले पर हमला बोल दिया और 4 महीनों तक घेराबंदी करने के बाद सन 1568 में किले पर कब्ज़ा कर लिया | किले पर अकबर का अधिकार होने के बाद उदयसिंह दो राजपूत योद्धाओ जयमल और पत्ता को छोडकर मेवाड़ की पहाडियों में चले गये थे | किले को जीतने के बाद अकबर 4 दिन तक किले में रहा और फिर से वापस आगरा चला गया |

चित्तौड़ के किले को जीतने के  बाद सन 1568 ईo में अकबर ने रणथम्बोर के किले को जीतने का मन बनाया | इस समय रणथम्बोर पर हाडा राजपूतों का राज था और ये उस समय का सबसे मजबूत किला माना जाता था | कुछ महीने संघर्ष करने के बाद अकबर ने रणथम्बोर किले को भी अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया |

भारत की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान का इतिहास एवं जीवन परिचय

भारत के महान वैज्ञानिक , जिन्होंने विश्व में हिन्दुस्तान का परचम फहराया | Great Indian Scientists Biographies in Hindi

अब्राहम लिंकन की जीवनी( Abraham Lincoln Biography in Hindi)

छत्रपति संभाजी महराजा का इतिहास ( CHATRAPATI SAMBHJI MAHARAJ HISTORY IN HINDI )

अकबर के द्वारा किये गए निर्माण कार्य –

मुग़ल स्थापत्य कल हिन्दू और मुस्लिम स्थापत्य का मिश्रण था | अकबर ने इन दोनों स्थापत्य कला का मिश्रण करके कई ईमारतें बनवाई | इमारतों का निर्माण अकबर ने अपने  ही तरीको से करवाया था | अपने तरीकों का इस्तेमाल करके अकबर ने भवन ,इमारते ,महल , मस्जिद , कब्रे और किले बनवाए |  अकबर ने सबसे पहले आगरा के किले का निर्माण करवाया | अकबर ने इस किले के अन्दर दो गेट दिल्ली गेट और अमर सिंह गेट बनवाये | अकबर ने लगभग 500 से ज्यादा इमारतों का निर्माण लाल पत्थरों से करवाया  था , जिसमें से कुछ अभी भी है और कुछ लुप्त हो चुकी है |

इन इमारतों का निर्माण करने के बाद अकबर ने लाहौर के किले  और अलाहबाद के  किले  का निर्माण करवाया | अकबर की स्थापत्य कला का सबसे सुंदर नमूना फतेहपुर सीकरी था जिसे उसने अपनी राजधानी बनाया था | इस वीरान जगह का पूरी तरह से निर्माण करने में अकबर को पुरे 11 साल लग गए थे | अकबर ने इस शहर के तीन तरफ दीवारे और एक तरफ कृतिम झील बनवाई थी | इस दीवार के 9 दरवाजे है और इसका मुख्य द्वार आगरा गेट है | अकबर ने  बुलंद दरवाज़ा का भी निर्माण करवाया जो मार्बल और बलुआ पत्थरों से निर्मित है  | इस शहर  में एक  ख़ास ईमारत भी है जिसका नाम  दीवाने खास है | इसके अलावा अकबर ने अपने शासन काल के दौरान  विद्यालयों और इबादत करने की जगहों का निर्माण भी करवाया |

अकबर की मृत्यु –

अकबर का अगला सैन्य अभियान बंगाल और गुजरात था | सन 1572 ई0 में अकबर ने  गुजरात की राजधानी अहमदाबाद पर अपना कब्जा कर लिया था | गुजरात पर अपना कब्जा करने के बाद फतेहपुर सीकरी लौटकर अकबर ने  अपनी जीत के उपलक्ष्य में बुलंद दरवाज़ा बनाया |1593 ईo  में अकबर ने डेक्कन के सुल्तानों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया | अकबर ने बुह्रानपुर के असीरगढ़ किले पर  भी कब्ज़ा कर लिया | 1605 ई0 में अपनी  मौत से पहले अकबर ने  बंगाल की खाड़ी तक अपना साम्राज्य फैला दिया था | पेचिश की वजह से तीन सप्ताह तक बीमार रहने के बाद अकबर की मौत हो गयी | अकबर की कब्र आगरा में बनाई गयी थी |

अंतिम राय –

आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से अकबर का इतिहास और जीवन परिचय के बारें में अनेक जानकारी दी जैसे – अकबर का प्रारम्भिक जीवन, अकबर  का सैन्य अभियान , अकबर का राजपुताना आक्रमण , अकबर के द्वारा किये गए निर्माण कार्य , अकबर की मृत्यु आदि |

हम आशा करते है की आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारियाँ दी वो जानकारियाँ आपको पसदं आई होगी | आज आपने इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारी हासिल की उसे आप अपने तक ही सिमित नहीं रखे बल्कि उसे दूसरों तक भी पहुचाएं , जिससे दुसरे लोग भी इसके बारें में जान सकें |

आपको यह लेख कैसा लगा नीचे comment कर के जरुर बताइए अगर अभी भी कोई सवाल आप पूछना चाहते हो तो नीचे Comment Box में जरुर लिखे | और कोई सुझाव देना चाहते हो तो भी जरुर दीजिये | अगर अभी तक आपने हमारे Blog को Subscribe नहीं किया हैं तो जरुर Subscribe करें | जय हिंद, जय भारत, धन्यवाद |

 

 

 

About the author

Vinod Pant

Leave a Comment

%d bloggers like this: