जीवन परिचय

एम. विश्वेश्वरैया भारत के सबसे पहले इंजिनियर 

एम. विश्वेश्वरैया भारत के सबसे पहले इंजिनियर 
Written by Jagdish Pant

दोस्तों आज हम आपको भारत के सबसे पहले इंजिनियर के बारे में बताने वाले है विश्‍वेश्‍वरैया ने देश की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित किया है यह भारत के पहले इंजिनियर थे आज हम आपको एम. विश्वेश्वरैया के बारे में अधिक से अधिक जानकरी देने प्रयास करेंगे

एम. विश्वेश्वरैया का जन्म

एम. विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1860 को  चिक्काबल्लापुर, कोलार, कर्नाटक में हुआ था उनका पूरा नाम सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या था उनके पिता का नाम श्रीनिवास शास्त्री और माता का नाम वेंकाचम्मा था उनके पिता संस्कृत के महान विद्वान थे  एम. विश्वेश्वरैया  ने भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था इसलिए उन्हें सन  1955 को भारत का सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न से समानित किया गया भारत में उनका जन्म अभियन्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है  ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘नाइट कमांडर ऑफ़ द ब्रिटिश इंडियन एम्पायर’ (KCIE) से सम्मानित किया था वह हैदराबाद शहर के मुख्य डिज़ाइनर थे

एम. विश्वेश्वरैया प्रारंभिक जीवन

उनकी प्रारम्भिक शिक्षा उनके जन्मस्थान पर स्थित प्राइमरी स्कूल से की थी इसके बाद उन्होंने बैंगलोर के सेंट्रल कॉलेज में प्रवेश लिया रूपये के अभाव से उन्होंने ट्यूशन पढ़ना शुरू कर दिया था इसके बाद सन 1881 में उन्होंने बी.ए पास किया इसके बाद मैसूर सरकार की मदद से उन्हें इंजीनियरिंग की पढाई के लिए पूना के साइंस कॉलेज में दाखिला लिया सन 1883 में उन्होंने एलसीई व एफसीई को प्रथम अंको से पास किया इसके बाद महराष्ट्र सरकार ने उन्हें नासिक में सहायक पद पर नियुक्त कर दिया था तो आपको भारत के प्रथम इंजिनियर एम. विश्वेश्वरैया के प्रारम्भिक जीवन के बारे में थोडा बहुत पता चला होगा

एम. विश्वेश्वरैया भारत के सबसे पहले इंजिनियर 

एम. विश्वेश्वरैया का कैरियर

जैसे ही उन्होंने इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की तो इसके बाद उन्हें मुंबई के एक PWD में नैकरी मिल गई  बाद में उन्होंने डेक्कन में एक जटिल सिंचाई व्यवस्था को ठीक करने का काम मिला उन्होंने कई परियोजनाओं को सफल बनाया था जबकि उच्च तकनीक और संसाधनों का अभाव था इसमें से प्रमुख परियोजना जैसे की  कृष्णराजसागर बांध, भद्रावती आयरन एंड स्टील व‌र्क्स, मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फैक्टरी, मैसूर विश्वविद्यालय ये थे

32 साल की उम्र में उन्होंने सुक्कुर (सिंध) नगरपालिका के लिए कार्य करते हुए  सिंधु नदी से सुक्कुर कस्बे  के लिए जल परियोजना शुरू की थी और सभी इंजीनियर खुश हो गए थे

अँगरेज़ सरकार के समय उन्होंने सिचाई विभाग को ठीक करने के लिए अनेक योजनाए बनाई थी और वह इस समिति के सदस्य थे उन्होंने नये ब्लाक प्रणाली का अविष्कार की था उन्होंने स्टील के दरवाजे बनाए थे जो बांध के प्रवाह को रोकने का काम करते थे और इस प्रणाली की बहुत ही तारीफ हुई थी बाद में इस प्रणाली सभी देशअपनाने लगे

इसके बाद उन्होंने दो नदियों मूसा व इसा के पानी को बांधने के लिए योजना बनाई थी और यह योजना सफल भी हुई थी इसके बाद उन्हें सन 1909 में मैसूर का मुख्य अभियन्ता के रूप में चुना गया था

उन्होंने मैसूर के आधारभूत समस्याओं जैसे की  अशिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी, बीमारी को दूर करने का प्रयास किया इस समस्या को दूर करने के लिए एक गठन का निर्माण किया गया  बाद में उन्होंने मैसूर में कृष्ण राजसागर बांध का निर्माण किया था लेकिन उस समय देश में सीमेंट नहीं था लेकिन उन्होंने  ऐसा मोर्टार तैयार किया  जो की सीमेंट से भी मजबूत था

मैसूर के दीवान

मैसूर में उन्होंने अनेक कार्य किए थे इसके इस योगदान से मैसूर के राजा ने उन्हें सन 1912 में दीवान बना दिया था जैसे ही वह दीवान बने उन्होंने मैसूर की जनता के लिए बहुत से कार्य किए जैसे की शैक्षिक और औद्योगिक के लिए अनेक कठोर कदम उठाये उन्होंने प्रत्येक राज्य में नये नये उद्योग खोले जैसे की चन्दन तेल फैक्टरी, साबुन फैक्टरी, धातु फैक्टरी, क्रोम टेनिंग फैक्टरी | इसके बाद 1918 में वह सेवा नियुक्त हो गए थे

सेवा नियुक्त होने के बाद भी  उन्होंने जनता के लिए अनेक कार्य किए इसलिए सन 1955 में भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से समानित किया गया इसके बाद जब एम विश्वेश्वरैया 100 साल के हो गए थे तो भारत सरकार ने उनके सम्माने में एक डाक टिकट जारी किया तो दोस्तों आपको भारत पहले एम. विश्वेश्वरैया के बारे में पता चला होगा

एम. विश्वेश्वरैया की मृत्यु

एम. विश्वेश्वरैया  की  मृत्यु 101 साल की उम्र में 14 अप्रैल 1962 में हुआ था आज उनक जन्म  अभियन्ता दिवस या इंजीनियर्स डे  के रूप में मनाया जाता है

एम. विश्वेश्वरैया सम्मान और पुरस्कार

  • सन 1904 –  वह लन्दन इंस्टिट्यूट ऑफ़ सिविल इंजीनियर्स में वह लगातार 50 साल तक सदस्य थे
  • सन 1906 – में उन्हें “केसर-ए-हिंद ‘ की उपाधि दी गई थी
  • सन 1911- में वह कम्पैनियन ऑफ़ द इंडियन के एम्पायर बने थे
  • सन 1955- में उन्हें भारत रत्न से समानित किया गया था
  • सन 1898- भारत और जापान की यात्रा की थी
  • सन 1913 – में मैसूर के मुख्यमंत्री बने थे
  • सन 1931 –  बॉम्बे विश्वविद्यालय द्वारा  LLD पास किया था

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अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको एम. विश्वेश्वरैया भारत के सबसे पहलेएम. विश्वेश्वरैया का जन्म , एम. विश्वेश्वरैया प्रारंभिक जीवन , एम. विश्वेश्वरैया का कैरियर , एम. विश्वेश्वरैया की मृत्यु के बारे में अधिक से अधिक जानकारी मिली होगी

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