जीवन परिचय

कालिदास का जीवन परिचय(kalidas ka jeevan parichay in hindi)

कालिदास का जीवन परिचय
Written by Jagdish Pant

दोस्तों आज हम आपको कालिदास का जीवन परिचय(kalidas ka jeevan parichay in hindi) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास करेंगे | कालीदास अपने समय के महान कविओं में से एक थे आज हम आपको कालीदास के जन्म , रचनाओं और उनके विवाह  के बारे में अघिक से अघिक जानकारी देने का प्रयास करेगें|

कालिदास का जीवन परिचय(kalidas ka jeevan parichay in hindi)

कालीदास अपने समय के  महान कवि और नाटककारों में से एक थे | कालीदास ने भारत  के  पौराणिक कथाओं और दर्शन के आधार पर अनेक कविताओं की रचना की

कालिदास का जन्म स्थान

वैसे तो आज भी कालीदास के जन्म स्थान के बारे में विवाद हैं| कुछ लोग कालीदास को  उज्जैन का निवासी मानते थे क्योकि कालीदास को  उज्जैन से  बहुत ही लगाव था | कुछ साहित्यकारों ने यह सिद्ध किया हैं की कालीदास का जन्म उत्तखंड के  रूद्रप्रयाग जिले के कविल्ठा गांव में हुआ था

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रुद्रप्रयाग में ही कालीदास ने अपनी प्राम्भिक शिक्षा प्राप्त की थी| और  यही पर उन्होंने मेघदूत, कुमारसंभव औऱ रघुवंश जैसे महान कविताएँ लिखी थी कुछ साहित्यकारों का मानना यह भी है की कालीदास  का  जन्म बंगाल और उड़ीसा  में हुआ था । और कालीदास की हत्या  श्रीलंका में हुई थी लेकिन कुछ विद्वान इसे भी कपोल-कल्पित मानते हैं तो दोस्तों आपको कालिदास का जीवन परिचय(kalidas ka jeevan parichay in hindi) के बारे में कुछ जानकारी मिली होगी

कालिदास का जीवन परिचय

 

रचनाएँ –

  • श्यामा दंडकम्|
  • ज्योतिर्विद्याभरणम्|
  • श्रृंगार रसाशतम्|
  • सेतुकाव्यम्|
  • श्रुतबोधम्|
  • श्रृंगार तिलकम्|
  • कर्पूरमंजरी|
  • पुष्पबाण विलासम्|

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काव्य ग्रन्थ –

  1. रघुवंश|
  2. कुमारसंभव|
  3. मेघदूत|
  4. ऋतुसंघार|

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नाटक –

  • मालविकाग्निमित्रम्- यह नाटक कालिदास का पहला नाटक था | इस नाटक में  राजा अग्निमित्र की कहानी है यह काहानी अग्निमित्र एक निर्वासित  नौकर की बेटी मालविका से प्रेम करने लगता है लेकिन जब अग्निमित्र की पति को इसके बारे में पता चलता है तो वह मालविका को काराग्रह डाल देती है
  • विक्रमोर्वशीयम्–  एक रहस्यों भरा नाटक है। इस नाटक में पुरूरवा इंद्रलोक की अप्सरा उर्वशी से प्रेम करने लगते हैं।पुरूरवा के प्रेम को देखकर अप्सरा उर्वशी भी उससे प्रेम करने लगती है जब उर्वशी  इंद्र की सभा में नृत्य करने लगती है तो  पुरूरवा से प्रेम के कारण वह वहां अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है इससे  इंद्र  गुस्सा होकर उसे धरती में भेज देता है

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अन्य रचनाएँ –

  • श्रुतबोधम्
  • शृंगार तिलकम्
  • शृंगार रसाशतम्
  • सेतुकाव्यम्
  • पुष्पबाण विलासम्
  • श्यामा दंडकम्
  • ज्योतिर्विद्याभरणम्

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काव्य सौन्दर्य

कालीदास अपने समय के महान काव्य सौन्दर्य के लेखक थे इस काव्य सौन्दर्य के लिए कालिदास को कनिष्ठिकाधिष्ठित और कविताकामिनीविलास जैसी प्रशंशात्मक उपाधियाँ दी गई थी कालीदास के काव्य सौन्दर्य की प्रमुख विशिष्टताओं का वर्णन निम्नलिखित हैं और यही करण हैं की कालिदास द्वारा की गयी छोटी-बड़ी कुल लगभग चालीस रचनाएँ हैं

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भाषागत विशिष्टताएँ

कलिदास वैदर्भी रीति के महान कविओं में से एक थे| कालीदास आपने भाषागत विशिष्ट के लिए प्रसाद गुण से पूर्ण ललित शब्दयोजना  का प्रयोग बहुत ज्याद करते थे प्रसाद गुण का अर्थ होता हैं की जो गुण मन में वैसे ही व्याप्त हो जाये  जैसे सूखी ईंधन की लकड़ी में अग्नि सहसा प्रज्वलित हो उठती है

अलंकार योजना

कलिदास अपने काव्य में अंलकार का बहुत ज्यादा प्रयोग करते थे| कालीदास अपने काव्य में  उपमा अलंकार का भी प्रयोग करते थे

उदाहरण के लिए

              संचारिणी दीपशिखेव रात्रौ यं यं व्यतीयाय पतिंवरा सा।

              नरेन्द्रमार्गाट्ट इव प्रपेदे विवर्णभावं स स भूमिपालः

अभिव्यंजना

कालिदास की कविता की प्रमुख विशेषता है की वह चित्रों के निर्माण में सबकुछ न कहकर भी अभिव्यंजना द्वारा पूरा चित्र खींच देते हैं जैसे की

                       एवं वादिनि देवर्शौ पार्श्वे पितुरधोमुखी।

                       लीला कमल पत्राणि गणयामास पार्वती।।

कालिदास और विघोत्तमा

कालिदास का विवाह विघोत्तमा नामक राजकुमारी के साथ हुआ था  विघोत्तमा ने प्रतिझा की थी जो उनके शास्त्रार्थ को हरा देगा वह उसके साथ ही विवाह करेगी| लेकिन विघोत्तमा ने सभी विद्वानों को हरा दिया था | और अपमान से दुखी कुछ विद्वानों ने कालिदास ने उनका शास्त्रार्थ करवाया

लेकिन कालिदास ने सभी प्रश्नों के जवाब दे दिए| इसी कारण से कलिदास का विवाह विघोत्तमा से हो गया

कालिदास का विवाह

इस तरह कालिदास का विवाह  विघोत्तमा नामक राजकुमारी से हो गया| लेकिन उस समय विघोत्तमा को कालिदास की सच्चाई के बारे में पता नहीं था| लेकिन जैसे ही  विघोत्तमा को सच्चाई पता चली तो उन्होंने कलिदास को घर से निकाल दिया| और कालिदास से कहा की आप सच्चे पंडित बनकर ही घर आना

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको कालिदास का जीवन परिचय, जन्म स्थान, काव्य सौन्दर्य, कालिदास और विघोत्तमा, कालिदास का विवाह, भाषागत विशिष्टताएँ,

के बारे में आपको अघिक से अघिक जानकरी मिली होगी  आपको यह लेख कैसा लगा  निचे comment कर के जरुर  बताइए अगर अभी भी  कोई सवाल आप पूछना चाहते हो तो निचे Comment Box में जरुर लिखे| और कोई सुझाव देना चाहते हो तो भी जरुर दीजिये| हमारे Blog को अभी तक अगर आप Subscribe नहीं किये हैं तो जरुर Subscribe करें| जय हिंद, जय भारत, धन्यवाद|

 

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