जीवन परिचय

कुख्यात वीरप्पन की सच्ची कहानी

कुख्यात वीरप्पन की सच्ची कहानी
Written by Vinod Pant

कुख्यात वीरप्पन की सच्ची कहानी

दोस्तों आज हम आपको कुख्यात वीरप्पन की सच्ची कहानी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास करेगें

वीरप्पन का पूरा नाम कूज मुन्स्वामिनी वीरप्पन था . यह एक बहुत बड़ा  कुख्यात डाकू था . यह 30 साल तक कर्नाटक,केरला और तमिलनाडु के जंगलो में रहा था

वीरप्पन का जीवन परिचय

वीरप्पन का जन्म 18 जनवरी 1952  में गोपी नाथम नामक स्थान में एक चरवाहा परिवार में हुवा था . बचपन में उसको मोलकाई उक्म से भी जाना जाता था . जब उसकी उम्र मात्र 18 साल की थी तब वह अवैध रूप से शिकार करने वाले गिरोह का सदस्य बन गया था . अगले कुछ सालो में उसने अपने एक प्रतिद्वंदी गिरोह का खात्मा कर दिया. और सम्पूर्ण जंगल का कारोबार अपने हाथो में ले ले लिया .

वीरप्पन का विवाह मुथुलक्ष्मी से हुवा था . कहा जाता है की वीरप्पन ने अपने एक संतान को पैदा होते ही जमीन के नीचे दबा दिया था . क्योकि वो उसकी लगातार होने वाली तीसरी बेटी थी . ये भी कहा जाता है की वीरप्पन की पत्नी को उसकी मुछे और कुख्याति बहुत पसंद है इसी कारण उसने वीरप्पन से शादी  की थी . सन 2004 में उसने अपनी दोनों बेटियों को तमिलनाडु में पडाना शुरू कर दिया था.

कुख्यात वीरप्पन की सच्ची कहानी

वीरप्पन के कुख्यातो का जीवन क्रम

वीरप्पन ने अपने अपराधो की शुरुवात सन 1970 से शुरू कर दी थी .उसने अपने अपराध की शुरुवात  अपने रिश्तेदार सेवी गौंदर का अस्सिटेंट बनकर की थी . जो  चन्दन की लकड़ी के कुख्यात तस्कर थे . सन 1972 में वीरप्पन को पहली बार गिरप्तार किया गया .

इसके बाद जब वीरप्पन जेल से छुटा तो उसने उसके बाद चन्दन की लकड़ी और हाथी दातो की तस्करी शुरू कर दी थी . और जो भी लोग उसके कामो के बीच में आते या उसे ,ऐसा काम करने से रोकते थे वे उन्हें सीधे मौत के घाट उतार देता था . वीरप्पन जिन लोगो को भी मौत के घाट उतारता था उनमे से या तो कोइ पुलिस ऑफिसर, फारेस्ट ऑफिसर या की खुफियाँ  जानकर ही होता था.

1987 में वीरप्पन ने एक  फौरेस्ट आफिसर चिंदम्बरम, तमिलनाडु को  किडनैप करके उनकी हत्या कर दी . उसके इस हरकत पर भारत सरकार की नजर पड़ गयी . वीरप्पन के द्वारा मारे गए लोगो में वरिष्ट आईएफएस अधिकारी पन्दील्लापल्ली श्रीनिवासन भी शामिल थे, जिनको वीरप्पन ने सन 1991  में मारा था .

वीरप्पन अपने गाँव के लोगों को भी नहीं छोड़ता था. अगर वीरप्पन के गाँव का कोइ आदमी उसे समझाता था. तो वो उसे भी मार देता था.

सन 1992 में उसने अपने साथियों के साथ रामपुर के एक पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया और पाँच लोगो को मौत के घाट उतार दिया , और दो लोगों को  घायल कर दिया व् उनके हथियार  भी चुरा दिए. जवाब में पुलिश की टीम ने भी वीरप्पन के दो साथियो को भी मार गिराया था.

इसके बाद 24 मई 1993  को उसने 6 पुलिस वालों  के.एम्. उथप्पा, प्रभाकर, पूवाईः, मचाईः, स्वामी और नारासप्प। इसमें पुलिस कमांडर एम्.एम्. हिल्स भी शामिल थे, उनकी हत्या कर दी थी. ये सभी तमिलनाडु सरकार के बॉर्डर सिक्यूरिटी फ़ोर्स के अधिकारी थे .

इस घटना के बाद  BSF और STF ने  वीरप्पन को पकड़ने के लिए एक सर्च  ऑपरेशन चलाया . इस  ऑपरेशन के दौरान वीरप्पन के समूह के 9 लोग पकडे गए , इन पकडे गए 9 लोगो में 6 लोग मारे गए. और इस घटना के दौरान 3 पुलिस वाले भी मारे गए थे .  इस समय वीरप्पन ने माफी भी मांगी थी.

1994 को चिदंबरनाथं को अगवा कर लिया, जो कोयम्बटूर के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ पुलिस थे . इसके बाद नवंबर 1995 को  वीरप्पन के आदमियों ने तमिलनाडु के तिन फ़ोरेस्ट अधिकारियो को किडनेप कर लिया . 1996 में एक पुलिस  जासूस की हत्या तथा 19 पुलिश वालो की हत्या कर दी.

सन 1997 में वीरप्पन के आदमियों ने 9 कर्नाटक फारेस्ट अधिकारियोँ को किडनेप कर उनको फांसी दे दी. इसके बाद .सन  2002 – कर्नाटक के मिनिस्टर एच्. नागप्पा को किडनैप कर उनकी हत्या कर दी . नागप्पा को जो गोली लगी थी वो तमिलनाडु   स्पेशल टास्क फ़ोर्स के रायफल की ही थी.( शायद जिस राइफल से नागप्पा को गोली  चलायी वो रायफल वीरप्पन के आदमियों ने  कर्नाटक के टास्क फ़ोर्स से ही चुरायी हो)

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virappan ने राजकुमार को क्यों किडनैप किया था

वीरप्पन ने भारत की पुलिस को इतना दौड़ाया था की इससे पहले किसी ने भारत की पुलिस को इतना किसी नी नहीं दौड़ाया था . वीरप्पन का राज्य( 3 राज्यों) कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के 6 हजार स्क्वायर किलोमीटर के क्षेत्र में फैला था .अगर वीरप्पन के इस क्षेत्र में जाना चाहता था तो उसे यहाँ आने से पहले वीरप्पन से परमिशन लेनी पड़ती थी .अगर कोइ वीरप्पन की अनुमति की बिना इस क्षेत्र में आता था तो उसे वीरप्पन के आदमी पड़कर ले जाते थे . बड़े से बड़ा आदमी भी इस क्षेत्र में आने से डरता था

एक बार सन 1997 इस क्षेत्र में एक बड़ा आदमी वीरप्पन की अनुमति के बिना आया था . इस आदमी का नाम राजकुमार था .ये आदमी कोइ और नहीं बल्कि कन्नड़ फिल्मों का बहुत बड़ा हीरो था . जब वीरप्पन की आदमियों को इस आदमी के बारें पता चला तो वीरप्पन के आदमियों ने इस आदमी को किडनेप कर लिया . आपको बता दें की राजकुमार 5 स्टार होटल में रहने वाला आदमी था लकिन उसे वीरप्पन के अधिकार क्षेत्र में बिना अनुमति के घुसने की सजा मिली राजकुमार को सजा के रूप में 109 दिन जंगलों में रहना पड़ा . और तभी से पुरे भारत को ये पता चला की  ये क्षेत्र किसके अधिकार में है .

वीरप्पन की  मृत्यु

तमिनाडु और कर्नाटक की सरकार वीरप्पन के कार्यो से तंग आ चुकी थी . सरकार किसी भी तरह वीरप्पन को पकड़ना चाहती थी.और लोग लगातार सरकार से वीरप्पन को पकड़ने की मांग कर रहे थी . आखिरकार तमिलनाडु की सरकार ने वीरप्पन को पकड़ने के लिए एक  तमिलनाडु स्पेशल टास्क फाॅर्स के मदद से एक ऑपरेशन  चलाया. और इस ऑपरेशन  को कोकून का नाम दिया .  यह c  तमिलनाडु स्पेशल टास्क फाॅर्स  के एक सदस्य विजय कुमार के नेतृत्त्व में चलाया गया .

तमिलनाडु स्पेशल टास्क फाॅर्स की टीम  कही महीनों ने  वीरप्पन के  कार्यो  पर नजर रखी हुयी थी . आखिरकार 18 अक्टूबर 2004 को   इस सर्च ऑपरेशन  के दौरान वीरप्पन और उसके दो साथी मारे गए. वीरप्पन को तमिलनाडु के धरमपुरी जिले के पप्परपत्ति ग्राम के पास मारा गया और मारने के बाद उसे अम्बुलेंस से मेडिकल जांच के लिए भी लाया गया .

वीरप्पन के मौत की खबर सुनते ही  सभी लोग उसे दिखने के लिए वहा पँहुच गए .ग्रामीण लोगो ने उनकी मौत को  “राक्षस / शैतान की मौत” बताया। उनके मौत की खबर सुनते ही गोपीनाथम के ग्रामवासियों ने बड़ा उत्सव मनाया और सभी बड़े खुश हुए।

वीरप्पन को तमिलनाडु के मूलाकादू ग्राम में दफनाया गया था. इस समय वीरप्पन के परिवार के कुछ सदस्य भी वहा मौजूद थी .  पुलिस वीरप्पन का दाह संस्कार करना चाहती थी . लकिन उनके परिवार के सदस्यों ने ऐसा करने से मना कर दिया . वीरप्पन के मरने के बाद भी हजारो लोग उसे देखने आ रहे थे. ओर  कई लोगो को तो पुलिस ने सुरक्षा के चलते अन्दर नहीं जाने दिया.

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको कुख्यात वीरप्पन की सच्ची कहानी ,वीरप्पन के कुख्यातो का जीवन क्रम और  वीरप्पन की  मृत्यु के बारे में अनेक जानकारीयाँ  हैं की यह जानकारी आपको पसन्द आई होगी.

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जय हिंद, जय भारत,

धन्यवाद

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