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गोलकोंडा किले का इतिहास

गोलकोंडा किले का इतिहास
Written by Vinod Pant

गोल कोंडा किला

गोलकोंडा किले का इतिहास –  गोलकोंडा किले का दूसरा नाम गोल्ला कोंडा भी है. यह किला भारत के दक्षिण में बना है इस किले को एक गढ भी मान जाता है . अगर इस किले के baaत करे तो यह किला कुतुब शाही साम्राज्य  (C. 1518-1687)के मध्य कालीन सल्तनत  राजधानी था . ये किला हेदराबाद से दक्षिण में 11 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है.

भारत के तेलेंगना राज्य के हेदराबाद में बना ये ऐतिहासिक किला बहुत प्रसिद्ध है.ये किला इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योकि इस किले ने भारत को कोहिनूर हीरे जैसी कई बेसकीमती चीजे दी है. यह किला ग्रेनाईट की एक लम्बी पहाड़ी पर बना हुवा है. इस किले में कुल आठ दरवाजे तथा पत्थर की तीन मजबूत दीवारे है.

गोलकोंडा किले का इतिहास

गोलकोंडा किले के निर्माण  बात करे तो  इस किले का निर्माण मराठा साम्राज्य के समय में शुरू हुवा था . इस किले का निर्माण ग्रेनाइट हिल से 120 मीटर (480) ऊँचाई पर हुवा है.

यह किला लगभग 11 किलोमीटर के बड़े विशाल क्षेत्र में फैला है .गोल कांडा किले में जो मार्बल इस्तेमाल हुवा है उसकी मुख्य विशेता ये है की  आप इसके फतेह दरवाजे में ध्वनिक आभास का अनुभव कर सकते है.

गोल कांडा किले के परिसर क्षेत्र में हम प्राचीन भारतीय कला,शिल्पकला और वास्तुकला के अनेक सुंदर दृश्य दिख सकते है .इसके आलावा आप यहाँ यहाँ बहोत से प्राचीन रंगमंच, प्रवेश द्वार और विशाल दिखाई देंगे.गोल्कांडा किले में आपको आज भी 400 साल पुराना उद्यान दिखाई देगा.

गोल्कांडा किले के मुख्य प्रवेश द्वार की बात करे  तो बाला हिस्सार गेट इस किले का मुख्य प्रवेश  द्वार है  जो पूर्व दिशा में बना हुवा है.किले के सामने एक विशाल दीवार बनी हुयी है जो इस किले को सैनिको और हाथियों के आक्रमण से बचाती है.

इस किले के सुरक्षा की बात करे तो इस किले की  सुरक्षा की लिए इस किले के बाहर एक विशाल चार दिवारी का निर्माण किया गया है. इस किले की मरम्मत काकाटीया के प्रताप रूद्र ने की थी. लकिन बाद में इस किले पर  मुसुनुरी नायक ने अपना कब्ज़ा कर लिया था.उन्होने तुगलकी सेना को वरंगल में हराया था.

इसके बाद 1512 ई० में यह किला कुतुबशाही राजाओं के अधिकार में आ गया.और वर्तमान हैदराबाद के शिलन्यास तक उसकी राजधानी रहा.इसके बाद 1687 में यह किला ओरंगजेब के कब्जे में आ गया.

17 वी शताब्दी में इस किले को हीरे का एक प्रमुख बाजार मन जाता था. इसमें दुनिया के कोहिनूर जैसे सर्वोत्तम हीरे मिले.

कहा जाता है की इस किले के “दरबार हाल” और महल के बीच एक गुप्त मार्ग है . कहा ये भी जाता है की इस  किले के अन्दर शाही राजाओं के कब्र भी है . यह कब्र इस्लामिक परम्पराओं और कला कृतियों के आधार पर बनी हुयी है . गोल कांडा किले के बाहरी दीवार से 1 किलोमीटर की दुरी पर मनमोहक और सुन्दर बाग़ बगीचे बने हुए है. कहा जाता है की चार मीनार को जाने के लिए यही से एक गुप्त  रास्ता भी है .

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गोल कांडा किले के अन्दर की अन्य इमारते

इस किले के अन्दर बहुत सी अन्य इमारतें भी है , जैसे _ हब्शी कामंस, अश्लाह खाना, तारामती मस्जिद, रामदास बंदीखाना, कैमल स्टेबल, किल्वट, शमशान स्नान, नगीना बाग, रामास्सा कोठा, दरबार हॉल, अम्बर खाना आदि.

कहा जाता है की इस चमत्कारिक महल के अन्दर एक वाटर सप्लाई सिस्टम भी है .

किले के प्रवेश द्वार को लोहे की किलो के द्वारा सजाया गया है . ये किलें बहुत नुकीली है . और यही नुकीली किलें इस प्रवेश द्वार को हाथियो के नुक्सान से बचाती है .

गोल कांडा जिले की कुछ और रोचक बातें

गोल कांडा किले में 425 साल पुराना एक वृक्ष आज भी  भी है जिसे लोग एक अफ्रीकन बाओबाब वृक्ष जिसे स्थानिक लोग हतियाँ का झाड़ भी कहते है ,कहा

  • जता है के इस वृक्ष को अरबीय व्यापारियों ने सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह को उपहार स्वरूप  दिया था .
  • असल में गोल कांडा किले की बात करे तो पहले यह किला ईटों का बना था. 13 वी शताब्दी में पूर्ण रूप से इस किले का निर्माण किया गया. 13 वी शताब्दी में काकतिया के शाशको  इस किले का निर्माण किया गया था .
  • विश्व के जितने भी प्रसिद्ध हीरे थे जैसे_दर्या-ए-नूर, नूर-उल-ऐन हीरा, कोहिनूर, आशा का हीरा और रीजेंट डायमंड ये सभी भारत से बहार जाने से पहले गोल कांडा के सुलतान के पास थे.
  • कहा जता है की इस किले में एक रहस्यमय सुरंग है जो राज दरबार से होकर किले के निचले भाग से होकर बाहार की तरफ जाती है .
  • इस सुरंग को आपात कालीन समय में  शाही परिवार के लोग बहार जाने के लिए प्रयोग करते थी .  लकिन मौजूदा समय में इस सुरंग को किसी ने नहीं देखा है .
  • इस किले की मुख्य बात खुबसूरत आवाज और  लाइट शो है .और यही लाइट शो खुबसूरत आवाज ही दर्शको के आकर्षण का मुख्य बिंदु है . और इन्ही के जरिये यहाँ के राजाओ की खुबसूरत इतिहास और  प्यार की कहानियाँ बताई जाती है .
  • इस किले से कुछ ही दुरी पर एक नदी है ,जिसे मूसा नाम से जाना जाता है जो इस किले के दक्षिण में बहती है .
  • इस किले से कुछ ही दुरी पर  क़ुतुब शाही राजाओं के मकबरे भी बने हुए है . जो दर्शको के आकर्षण का केंद्र है.
  • इस किले के उप्पर  में माँ महाकाली का भव्य मंदिर भी बना हुवा है .

आज हमने आपको गोलकोंडा किले का इतिहास  के बारे में अनेक महत्वपूर्ण व् रोचक तथ्य बताये जैसे _ गोल कांडा किला कहाँ  है , ये किला कैसे बना . इस किले पर किन _किन राजाओं का अधिकार रहा ,इस किले में ऐसी कौन सी चीजे है जो इस किले के खूबसूरती पर चार चाँद लगाती है , इस किले से क्या बेसकीमती  चीजें मिली. आदि

हमें आशा है की आज आपने गोल कांडा किले के बारे  अनेक  महतवपूर्ण  एवं रोचक तथ्य के बारे में जाना होगा . हम आशा करते है की आपने आज गोल कांडा किले के के बारे में जो भी जानकरियां हासिल की आप उन जानकारियों को दूसरों तक भी पहुचाएं . जिस्से और लोग भी गोल कांडा किले के बारे में जान सके .

 

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