जीवन परिचय

गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय (Biography of Tulsidas in Hindi)

गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय (Biography of Tulsidas in Hindi)
Written by Jagdish Pant

दोस्तों आज हम आपको  गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय (Biography of Tulsidas in Hindi) के बारे  में कुछ महत्वपूर्ण बाते बताने वाले हैं| तुलसी दास आपने दोहों और कविताओ के लिये जाने जाते है| आज हम आपको तुलसीदास के जन्म और रचनाओं के बारे में आपको कुछ रोचक बातें बतानें वाले हैं

गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय (Biography of Tulsidas in Hindi)

तुलसीदास का पूरा नाम गोस्वामी तुलसीदास है | आज भी तुलसीदास के जन्म के बारे में विद्वानों में मत भेद हैं  कुछ विद्वान् मानते है की तुलसीदास का जन्म 1511 ई में राजापुर में हुआ था तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी देवी था

तुलसीदास के जन्म से ही मुहँ में दांत थे| इस कारण से तुसलीदास के माता पिता ने उन्हें अशुभ मानकर उनका त्याग कर दिया| जिस कारण से तुलसीदास का लालन पोषण नरहरिदास ने काशी में किया|  नरहरिदास की निगरानी में तुलसीदास ने भक्ति और ज्ञान अर्जित किया उसके बाद तुलसीदास अपने गाँव आ गये |

गॉव आने के बाद तुलसीदास ने एक पंडित और सुन्दर कन्या रत्नावली से विवाह किया तुलसीदास अपनी पत्नी रत्नावली से बहुत प्रेम करते थे जिस कारण ने एक दिन रत्नावली ने तुलसीदास को कहा की जितना ध्यान आप मुझमे देते हो अगर उतना  ध्यान आप प्रभु भक्ति में देते तो आपका जीवन सफल हो जाता|  रत्नावली की बाते सुन कर तुलसीदास ने प्रभु की भक्ति में लग गये |

तुलसीदास  ने आपना  ज्यादातर समय वाराणसी में बिताया | इस कारण से गंगा नदी के किनारे पर बसे घाट को तुलसी घाट का नाम दे दिया उन्होंने वाराणसी में संकटमोचन मंदिर की स्थापना की थी| कुछ लोगो का मानना हैं की तुलसीदास को भगवान हनुमान के दर्शन यही पर हुए थे

तुसली की प्रशंसा करते हुए कुछ लोग उन्हें वाल्मीकि का पुनर्जन्म मानते थे तुलसीदास ने संस्कृत भाषा में रामायण की रचना की थी|  तुसलीदास ने हनुमान चालीसा की भी रचना की थी  तुलसीदास को हिंदी और भारतीय साहित्य का एक महान कवी कहा जाता है।  भारतीय समाज में आज भी तुलसीदास के कार्य और संस्कृति दिखाई देती हैं

गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय (Biography of Tulsidas in Hindi)

साहित्यिक परिचय –

तलसी दास हिंदी साहित्य के महान कवि माने जाते हैं तुलसीदास की प्रसिद्ध रचनाओ में से एक है  “रामचरितमानस” इस रचना में  भक्ति भावना का समावेश मिलता है इस कारण से तुलसीदास को रामभक्ति शाखा का कवि कहा जाता हैं

गीतावली – 

तुलसीदास ने गीतावली की रचना ब्रज भाषा में की थी

रामचरितमान –

तुलसीदास की सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक थी  “रामचरितमानस” तुलसीदास ने रामचरितमानस” में दोहा-चौपाई के माध्यम से राम के जीवन का वर्णन किया हैं

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अन्य ग्रन्थ

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  • वैराग्य-संदीपनी
  • बरवै रामायण
  • पार्वती-मंगल
  • जानकी-मंगल
  • रामाज्ञाप्रश्न
  • दोहावली
  • श्रीकृष्ण-गीतावली
  • विनय-पत्रिका
  • सतसई
  • छंदावली रामायण
  • कुंडलिया रामायण
  • राम शलाका
  • संकट मोचन
  • करखा रामायण
  • रोला रामायण
  • झूलना
  • छप्पय रामायण
  • कवित्त रामायण
  • कलिधर्माधर्म निरूपण
  • हनुमान चालीसा
  • रामचरितमानस
  • कवितावली
  • गीतावली

तुलसी-स्तवन 

तुलसीदास जी की हस्तलिपि अत्यधिक सुन्दर थी लगता है की उस युग में उन्होंने कैलोग्राफी की कला आती थी  आज भी रामचरितमानस उनके जन्म स्थान पर आज भी सुरक्षित रखी गई हैं  तुसलीदास ने हस्तलिपि के आघार पर अपने जीवन को रेखांकित करते हुए निम्नलिखित दो छन्द लिखे हैं

तुलसी ने मानस लिखा था जब जाति-पाँति-सम्प्रदाय-ताप से धरम-धरा झुलसी।झुलसी धरा के तृण-संकुल पे मानस की पावसी-फुहार से हरीतिमा-सी हुलसी।हुलसी हिये में हरि-नाम की कथा अनन्त सन्त के समागम से फूली-फली कुल-सी।कुल-सी लसी जो प्रीति राम के चरित्र में तो राम-रस जग को चखाय गये तुलसी।आत्मा थी राम की पिता में सो प्रताप-पुन्ज आप रूप गर्भ में समाय गये तुलसी।जन्मते ही राम-नाम मुख से उचारि निज नाम रामबोला रखवाय गये तुलसी।रत्नावली-सी अर्द्धांगिनी सों सीख पाय राम सों प्रगाढ प्रीति पाय गये तुलसी।मानस में राम के चरित्र की कथा सुनाय राम-रस जग को चखाय गये तुलसी।

तुलसीदास के दोहे

दोहा: ” दया घर्म का मूल है पाप मूल अभिमान,

           तुलसी दया ना छोडिये जब तक घट में प्राण.

अर्थ:- तुलसी दास जी कहना चाहते है कि  दया घर्म से उत्पन्न होती है  अभिमान तो केवल पाप को उत्पन्न करती है और जब तक  मनुष्य जिन्दा है तब तक मनुष्य को दया भावना नहीं छोडनी चाहिए|

दोहा :- “सरनागत कहूँ जे तजहिं निज अनहित अनुमानि,

              ते नर पावॅर पापमय तिन्हहि बिलोकति हानि.” 

अर्थ:- तुलसी दास जी कहना चाहते है की जो व्यक्ति अनहोनी का अनुमान लगाकर  शरण मे आये हुए व्यक्ति का त्याग कर देता  हैं वह पाप और क्षुद्र होता है  उन्हेंने देखना भी अनुचित होता है|

दोहा :- “तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुँ और,

             बसीकरण इक मंत्र हैं परिहरु बचन कठोर.”

अर्थ:- तुलसी दास जी कहना चाहते है की आच्छे बोल सब और सुख का विस्तर करता है इसलिए किसी को अपने वंश में करने का एक  मन्त्र है इसलिए मनुष्य को कठोर बोल छोड़ कर अच्छे बोल बोलने का प्रयास करना चहिए

तुलसीदास की मृत्यु

तुलसीदास की मृत्यु 1680 में श्रावण कृष्ण तृतीया शनिवार को तुलसीदास जी ने “राम-राम” कहते हुए अपना शरीर परित्याग किया

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय (Biography of Tulsidas in Hindi) , अन्य ग्रन्थ , तुलसीदास के दोहे, तुलसीदास की मृत्यु  के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी  देने का प्रयास किया है तो आपको यह लेख कैसा लगा  निचे comment कर के जरुर  बताइए अगर अभी भी  कोई सवाल आप पूछना चाहते हो तो निचे Comment Box में जरुर लिखे| और कोई सुझाव देना चाहते हो तो भी जरुर दीजिये| हमारे Blog को अभी तक अगर आप Subscribe नहीं किये हैं तो जरुर Subscribe करें| जय हिंद, जय भारत, धन्यवाद|

 

 

 

 

 

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