इतिहास

गौतम बुद्ध की जीवनी और उपदेश( Gautam Buddha Story in Hindi )

गौतम बुद्ध की जीवनी और उपदेश
Written by Vinod Pant

गौतम बुद्ध एक संत थे जिन्होंने बौद्ध धर्म  की स्थापना की  | गौतम बुद्ध ने ईस्वी पूर्व से छटी और चौथी सदी के बीच भारतीय  उपमहादीप में बौध धर्म का पाठ पढाया | अगर हम सरल शब्दों में बुद्ध शब्द का अर्थ समझने की कोशिश करें तो बुद्ध का अर्थ “इन्सान के अंतरात्मा को जगाना” है | बौद्ध  धर्म के निर्वाण के बाद बौद्ध धर्म के अनुयायियों  ने बौद्ध धर्म को ना केवल भारत बल्कि पुरे विश्व में फैलाया  | वैष्णव हिंदू धर्म में गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का नवा अवतार बताया है लेकिन बुद्ध धर्म वेदों पर विश्वास नही करता है | हम आपको गौतम बुद्ध के जीवन परिचय के बारे में नीचे बता रहे है |

सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) का प्रारम्भिक जीवन (Early Life of Gautam Buddha)

सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध )का जन्म 563 ईस्वी पूर्व नेपाल के लुम्बिनी नामक प्रदेश में एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था | उनके पिता कपिलवस्तु के राजा सुधोधन और माता रानी मायादेवी थी | ऐसा कहा जाता है की जब मायावती ने गर्भ धारण किया उस समय उनके सपने में एक 6  दातो वाला सफेद हाथी उनके दाई और प्रवेश कर गया | इसके 10 महीने बाद ही मायावती ने सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध ) को जन्म दिया था | जब सिद्धार्थ मात्र सात वर्ष के थे उस समय उनकी माता मायावती की मृत्यु हो गयी थी | उसके बाद सिद्धार्थ (गौतमबुद्ध) का पालन – पोषण उनकी सौतली माता गौतमी ने किया था |

सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) का प्रारम्भिक जीवन

जब सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध ) का जन्म हुवा उस समय ज्योतिषों ने भविष्यवाणी कर दी थी कि राजकुमार सिद्धार्थ राजशाही सुखो को त्याग कर भौतिकवादी दुनिया में अपना मार्ग ढूंढेगा | जब सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध ) के पिता को इस बात का पता चला तो वो पहले से ही सतर्क हो गए थे | उन्होंने ज्योतिषों की इस भविष्यवाणी को गलत साबित करने के लिए बहुत प्रयास करें साथ ही उन्होंने सिद्धार्थ को घर से भी बहार निकाल दिया | सिद्धार्थ के पिता चाहते थे की सिद्धार्थ बड़े होकर उनके राज सिंहासन को सभाले |

गौतम बुद्ध के जीवन में नया मोड़ -(The Turning Point of Gautam Buddha)

जब सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) बड़े हो गए उसके बाद एक दिन वो महल से बहार की दुनिया देखने के लिये चले गए |  ऐसा माना जाता है की यही से सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध ) के जीवन में एक नया मोड़  आया | जब सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध )  महल से बहार निकलकर बहार की दुनिया देख रहे थे तो उन्होंने एक वृद्ध पुरुष को लाठी के सहारे चलता देखा जो बड़ी मुश्किल से चल पा रहा था | इसके बाद उसने एक बीमार व्यक्ति को देखा जो दर्द से कराह रहा था | गौतम बुद्ध ने पहले ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा था | आगे चलकर एक व्यक्ति से सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध ) की मुलाकात हुयी , जिसने सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध )को दर्द  और मौत के बारे में में बताया जो की अटल है |

इस पुरे वृत्तांत ने सिद्धार्थ के जीवन को बदल दिया और उनके ह्रदय से एक आवाज आई जिस आवाज ने सिद्धार्थ से जीवन की खोज करने को कहा | इस पूरी घटना के बाद सिद्धार्थ के व्यहार में काफी बदलाव आ गया | सिद्धार्थ के इस व्यहार को देखकर उसके पिता काफी व्याकुल हो गए और उन्होंने सिद्धार्थ का विवाह एक सुन्दर राजकुमारी यशोधरा  से कर दिया | सिद्धार्थ शादी करने के बाद एक बार फिर से सांसारिक सुखों में लिप्त हो गए , लेकिन उनके दिमाग में पहले के वो दृश्य अभी भी बसे हुए थे और सिद्धार्थ उन्हें भुला नहीं पा रहे थे |  शादी करने के बाद सिद्धार्थ की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया | सिद्धार्थ के इस पुत्र का नाम राहुल पड़ा था | पुत्र को जन्म देने के बाद एक रात को सिद्धार्थ  अपनी पत्नी और पुत्र को गहरी नींद में छोडकर महल से चले गये |

गौतम बुद्ध द्वारा प्रकाश और सच्चाई की खोज –

जब गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) ने घर छोड़ा उस समय सिद्धार्थ मात्र 29 वर्ष के थे | घर को छोड़ने के बाद सबसे पहले गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) ने वर्तमान बिहार के राजगीर स्थान पर जाकर मार्गो पर भिक्षा मांगकर अपना तपस्वी जीवन शुरू किया | यहाँ के राजा ने गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) को पहचान लिया और उनके उपदेश सुनकर उनको सिंहासन पर बैठने का प्रस्ताव दिया लेकिन गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) ने मना कर दिया | गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) पुरे देश में घुमे और यहाँ अनेक साधू – संतो से मिले | साधू – संतो से मिलने के बाद गौतम बुद्ध ने भी साधू – संतो की तरह ही अपना जीवन व्यतीत करना शुरू कर दिया | इसके बाद गौतम बुद्ध ने जीवन और मृत्यु को समझने के लिए तपस्या शुरू कर दी | एक समय ऐसा आया जब गौतम बुद्ध को ज्ञात हो गया की शरीर को कष्ट देकर सत्य को खोज नहीं हो सकती | यहाँ गौतम बुद्ध ने अपने तपस्या करने और व्रत करने के तरीकों की निंदा की |

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एक दिन जब चलते चलते गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) गया पहुँच गए तो यहाँ गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) अपनी थकान को मिटाने के लिए एक पीपल के पेड़ के नीचे आँख बंद कर बैठ गए | यहाँ पर सिद्धार्थ ने ये प्रण कर लिया की जब तक उन्हें सत्य का ज्ञान नहीं हो जाता , तब तक वो यहाँ से नहीं उठंगे | यहाँ पर 49 दिन का ध्यान करने के बाद गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) को एक दिव्य  ज्योत अपने ओर आती हुयी दिखाई दी जिसके बाद गौतम (सिद्धार्थ ) को ज्ञात हो गया की सत्य हर मनुष्य के साथ है और इसे बहार  ढूंढना  निराधार है | इसी के बाद से सिद्धार्थ का नाम गौतम बुद्ध पड़ा | जब गौतमबुद्ध (सिद्धार्थ ) को सत्य का ज्ञात हो गया तब पुरे भारत वर्ष में  गौतम बुद्ध के हजार से ज्यादा अनुयायी हो गए और इन्ही अनुयायियों के द्वारा एक संघ का गठन हुवा | इसी संघ ने  बौद्ध धर्म के उपदेशो को पुरे विश्व में फैलाया |

सही मार्ग और अमरता –

अपने जीवन में 45 वर्षों तक गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ ) ने अपने आध्यात्मिक जीवन के सन्देश ना केवल अपने अनुयायीयो को दिए बल्कि आम इंसानों को भी इसके बारें में बताया | उन्होंने आत्मा ,दिमाग और  दिल  की शुद्धि के लिए अष्टमार्ग का अनुसरण करने को कहा जिसमे से चार शाश्वत सत्य और पांच धारणाये थी | इस रास्ते में  सही भाषण, समझ, दृढ़ संकल्प, कर्म, प्रयास, जागरूकता, सोच और जीवन शामिल थे। बुद्ध धर्म के अनुसार अगर मनुष्य अगर इन मार्गो पर चलेगा तो उन इच्छाओ से दूर हो सकता है जिसके कारण दुःख मिलते है |

अपने संदेशों को पुरे विशव में सफलता पूर्वक फैलाने के बाद 483 ईस्वी पूर्व में 80 वर्ष की उम्र में गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ ) महापरिनिर्वाण कर गये | उनके अंतिम संस्कार के अवशेष को 8 शाही परिवारों और उनके अनुयायीयो में बाँट दिया गया जिसको सदियों बाद महान सम्राट अशोक ने 84000 स्तूप बनवाकर उसमे स्थापित किया |

अंतिम राय –

आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ ) के जीवन परिचय और उपदेश के बारें में अनेक महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की  | जैसे – गौतम बुद्ध का प्रारंभिक जीवन , गौतम बुद्ध के जीवन में नया मोड़ , गौतम बुद्ध द्वारा प्रकाश और सच्चाई की खोज , सही मार्ग और अमरता  गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ ) आदि |

हम आशा करते है की आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारियाँ दी वो जानकारियाँ आपको पसदं आई होगी | आज आपने इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारी हासिल की उसे आप अपने तक ही सिमित नहीं रखे बल्कि उसे दूसरों तक भी पहुचाएं , जिससे दुसरे लोग भी इसके बारें में जान सकें |

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