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ग्राम पंचायत और उसके अधिकार व इससे सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी

ग्राम पंचायत और उसके अधिकार व इससे सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी
Written by Vinod Pant

दोस्तों क्या आप लोग जानते है की ग्राम पंचायत क्या होती है और ग्राम पंचायत  में कौन -कौन से अधिकार होते हैं . अगर आप ग्राम पंचायत और उसके अधिकार के बारें में जानते है तो ये बहुत अच्छी बात है ,अगर ग्राम पंचायत और उसके अधिकार के बारें में नहीं जानते तो कोई  बात नहीं आज हम आपको ग्राम पंचायत और उसके अधिकार के सम्बन्ध में अनेक महत्वपूर्ण जानकारी  जैसे –ग्राम पंचायत क्या होती है और उसके अधिकार क्या होते हैं

आज के समय में हमारे देश भारत की लगभग 70% आबादी  गाँव घरों में रहती है , और  पूरे देश में दो लाख 39 हजार ग्राम पंचायतें हैं .  जब से देश में त्रीस्तरीय पंचायत व्यवस्थालागू हुयी है तब से इन पंचायतों को लाखों रुपए का फंड सालाना दिया जा रहा  है . ग्राम पंचायत में जितने भी कार्य होते है उन सब की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान या सरपंच की होती है , ग्राम प्रधान को चुनने के लिए हर पाँच साल में चुनाव होता है . लेकिन ग्रामीण जनता को अपने अधिकारों और ग्राम पंचायत के नियमों के बारे में पता नहीं होता.

क्या होती है ग्राम पंचायत –

किसी एक गाँव या पंचायत का चुनाव करने वाले गाँवों के समूह की मतदाता सूची में शामिल व्यक्तियों से मिलकर बनी संस्था ग्राम पंचायत  है . ग्राम पंचायत  पंचायतीराज की मूलभूत इकाई है. यह ग्राम पंचायत  प्रत्येक राजस्व ग्राम या वन ग्राम में उस गाँव के वयस्क मतदाताओं को मिलाकर तैयार की जाती है . किसी भी ग्राम पंचायत  में 200 या उससे ज्यादा सदस्य होना आवश्यक है . हर ग्राम पंचायत  में एक ग्रामप्रधान होता है जो , ग्राम पंचायत  के सभी विकाश कार्यों की देखरेख करता है , जिन ग्राम पंचायतों की आबादी  1000 से उप्पर होती है वहा 10 ग्रामपंचायत सदस्य ,जहां आबादी 2000 या उससे ऊपर होती है वहा 11 ग्रामपंचायत सदस्य ,जहा आबादी 3000 या उससे उप्पर होती है वहा 15 ग्रापंचायत सदस्य होना आवश्यक है .

ग्राम पंचायत  की बैठक-

प्रतियेक  ग्रामपंचायत में ग्राम प्रधान और वहा के सदस्यों के बीच साल में कम से कम दो बैठक का प्रवधान सरकार द्वारा बनाया गया है , इस बैठक की जानकारी ग्रामप्रधान द्वारा 15 दिन पहले सभी ग्रामपंचायत सदस्यों को देनी होती है . अगर किसी कारण से इस बैठक में ग्रामप्रधान नहीं आ पाता है तो इस बैठक की देख -रेख की पूरी जानकारी उप प्रधान की होती है .  दोनों की अनुपस्थिति में ग्राम पंचायत के किसी सदस्य को प्रधान द्वारा मनोनीत किया जा सकता .

ग्राम पंचायत के कार्य और उसकी समितियां-

1. नियोजन एवं विकास समिति

इस समिति के सदस्य –

इस समिति में मुख्य रूप से ग्रामप्रधान ,उप प्रधान , छह अन्य सदस्य ,  अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला एवं पिछड़े वर्ग का एक-एक सदस्य अनिवार्य है .

इस समिति के कार्य –

इस सिमित के मुख्य कार्य ग्राम पंचायत की योजना का निर्माण करना, कृषि, पशुपालन और ग़रीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का संचालन करना है .

2. निर्माण कार्य समिति-

इस समिति के सदस्य –

इस समिति में मुख्य रूप से ग्रामप्रधान, 6 अन्य सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला एवं पिछड़े वर्ग का एक-एक सदस्य अनिवार्य है

इस समिति के कार्य –

इस सिमिति के मुख्य कार्य  सभी निर्माण  कार्य करना तथा गुणवत्ता निश्चित करना होता है .

3. शिक्षा समिति

इस सिमिति के सदस्य –

इस समितिमें मुख्य रूप से ग्रामप्रधान ,उप प्रधान ,  छह अन्य सदस्य , अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला एवं पिछड़े वर्ग का एक-एक सदस्य , प्रधानाध्यापक , और अभिभावक होने जरुरी है .

इस सिमिति के कार्य –

इस समिति के मुख्य कार्य प्राथमिक शिक्षा, उच्च प्राथमिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा तथा साक्षरता आदि सम्बंधी कार्यों की पूरी तरह से देख – रेख करना है .

4. प्रशासनिक समिति

इस समिति के सदस्य –

इस समिति में मुख्य रूप से  ग्रामप्रधान , उप प्रधान , अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला एवं पिछड़े वर्ग का एक-एक सदस्य होना आवश्यक है .

इस समिति का कार्य –

इस समिति के मुख्य कार्य ग्रामपंचायत के विकाश कार्यों की  कमियों-खामियों को देखना है

5. स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति

इस समिति के मुख्य कार्य –

इस समिति में मुख्य रूप से ग्रामप्रधान , ग्राम पंचायत द्वारा नामित सदस्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला एवं पिछड़े वर्ग का एक-एक सदस्य होना आवश्यक है .

इस सिमिति के सदस्य-

इस सिमिति के मुख्य कार्य चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण सम्बंधी कार्य  की देख – रेख और समाज कल्याण योजनाओं का संचालन, अनुसूचित जाति-जनजाति तथा पिछड़े वर्ग की उन्नति एवं संरक्षण प्रदान करना है ,

6. जल प्रबंधन समिति

इस समिति  के मुख्य सदस्य –

इस समिति में मुख्य रूप से ग्राम प्रधान ,  ग्राम पंचायत द्वारा नामित  सदस्य , अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला एवं पिछड़े वर्ग का एक-एक सदस्य  , त्येक राजकीय नलकूप के कमांड एरिया में से एक उपभोक्ता का होना आवश्यक है .

इस समिति के मुख्य कार्य –

इस समिति के मुख्य कार्य राजकीय नलकूपों का संचालन पेयजल सम्बंधी कार्यों की देख – रेख करना है .

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ग्रामपंचायत के कार्य

ग्राम पंचायत के कार्य-

ग्राम पंचयत के मुख्य कार्य हम आपको नीचे बता रहे है

1- गाँव में पशुओं के पीने की पानी की व्यवस्था करना –

हर एक ग्रामसभा में पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना ग्रामपंचायत  के कार्यों में शामिल है . इसमें ग्रामप्रधान के द्वारा हर ग्रामसभा में पशुओं के लिए पानी के व्यवस्था की जाती है .

2- पशु पालन व्यवसाय को बढ़ावा देना, दूध बिक्री केंद्र और डेयरी की व्यवस्था करना-

आज के समय में देखा जाय तो सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आमदनी का एक मुख्य स्रोत है , लेकिन इस कार्य में पशुपालकों की मुख्य समस्या दूध की बिक्री की होती है . इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में , पंचायत स्तर पर दूध बिक्री केंद्र व डेयरी की व्यवस्था होनी चाहिए. इस व्यवस्था के अंतर्गत पशुपालन के लिए जानकारी, उनका टीका और उनका उपचार कराना भी  शामिल है ताकि पशुपालन ज्यादा फायदेमंद हो और इसे ज्यादा से ज्यादा बढावा मिल सके .

3- सिंचाई के साधन की व्यवस्था

इस व्यवस्था के अंतर्गत किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए सरकारी ट्यूबवेल की व्यवस्था, नहर से निकली नालियों की साफ-सफाई का काम आता है , और इसकी पूरी देख -रेख की व्यवस्था ग्रामपंचायत  की होती है .

4- गाँव में स्वच्छता बनाये रखना

इस व्यवस्था के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में नालियों की साफ-सफाई, गाँव में दवाइयों का छिड़काव,के साथ एएनएम, आशा बहु को टीका लगा रहीं हैं कि नहीं ये भी देखना होता है . इस सभी कार्यों के देखरेख का कार्य भी ग्राम पंचायत का होता है .

5- गाँव के सार्वजनिक स्थानों पर लाइट्स का इंतजाम करना

इस व्यवस्था के अंतर्गत ग्राम पंचायत के सार्वजनिक स्थान, जैसे मंदिर, मस्जिद आदि स्थानों पर लाइट की व्यवस्था  का कार्य आता है , जिससे इन स्थानों पर उजाले की पर्याप्त व्यवस्था की जा सके . ये सभी  कार्य नगरपंचायत के सदस्यों के देख -रेख में किये जाते है .

6- कृषि कार्यक्रमों में हिस्सा लेना

गाँवों में खेती व किसानो  को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर कृषि गोष्ठी करानी होती है, ताकि किसानों को नई जानकारियां मिलती रहें,

7- कृषि को बढ़ावा देने वाले प्रयोगों प्रोत्साहित करना

अगर कोई किसान कृषि क्षेत्र में नया प्रयोग करता है तो उसे  नगर पंचायत के सदस्यों द्वारा प्रोत्साहित करना होता है, जिससे दूसरे किसान भी उनसे जानकारी ले सकें.

8- खेल का मैदान व खेल को बढ़ावा देना

बच्चों के लिए खेल के मैदान का इंतजाम करना व खेल कूद से सम्बंधित सामान की व्यवस्था करना . विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता कराकर बच्चों में खेल और पढाई की भावना को प्रोत्साहित करना भी नगर पंचायत के मुख्य कार्यों के अंतर्गत शामिल है .

9- स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाना

इसमें मुख्य रूप से स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाना, गाँव में सार्वजनिक शौचालय बनाना व उनका रख रखाव करना , जिनके घर में शौचालय का निर्माण हो गया है, उन्हें शौचालय प्रयोग करने के लिए प्रेरित करना और लोगों को स्वच्छता अभियान का महत्व समझाना आदि कार्य शामिल है .

10- गाँव की सड़कों और सार्वजनिक स्थान पर पेड़ लगाना 

गाँव को हरा-भरा बनाने के लिए गाँव की सड़कों और सार्वजनिक स्थान पर पेड़ लगाना और दूसरों को प्रोत्साहित करना, साथ ही उनका  अच्छी तरह से रख रखाव करने की जिम्मेदारी भी नगरपंचायत की होती है .

11- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्कीम को आगे बढ़ाना

इसमें मुख्य रूप से बेटियों को बढ़ावा देने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्कीम को आगे बढ़ाना, (जिससे लोग अपनी बेटियों को स्कूल भेजें) शामिल है .

12- जन्म मृत्यु विवाह आदि का रिकॉर्ड रखना

ग्राम पंचायत में जन्म मृत्यु विवाह आदि का रिकॉर्ड रखना, जिससे जनगणना जैसे कामों में आसानी हो जाए और इसके बारे में प्रशासन को समय-समय पर सूचित करना भी नगर पंचायत के प्रमुख कार्यों में शामिल है .

13 –गाँव में भाई चारे का माहौल बनाना

गाँव में किसी धर्म या समुदाय में लड़ाई-झगड़े न हो ऐसा माहौल बनाना, झगड़ों को सुलझाना व दोस्ताना माहौल पैदा करना भी नगर पंचायत के सदस्यों के कार्यों के अंतरगत आता है .

14- आंगनबाड़ी केंद्र को सुचारू रूप से चलाने में मदद करना

ग्राम पंचायत स्तर पर बच्चों, किशोरियों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कर्मचारियों की होती है, वो काम कर रही हैं कि नहीं, सभी को पोषाहार मिल रहा है  या  नहीं ये सब देखने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है .

15-मछली पालन को बढ़ावा देना

मनरेगा योजना के तहत मछली पालन को प्रोत्साहित करने के लिए तालाबों की खुदाई ग्राम पंचायत के कार्यों में शामिल किया गया है . अगर किसी ग्रामीण क्षेत्र में नदियां हैं तो उनका संरक्षण व मछली पालन भी ग्राम पंचायत के कार्यों में शामिल किया गया हैं

प्रधान और उपप्रधान को अगर पद से हटाना हो

अगर ग्राम प्रधान या उप प्रधान गाँव की प्रगति के लिए ठीक से काम नहीं कर रहा है तो उसे पद से हटाया भी जा सकता है . समय से पहले  ग्रामप्रधान को पदमुक्त करने के लिए एक लिखित सूचना जिला पंचायत राज अधिकारी को दी जानी चाहिए, जिसमे ग्राम पंचायत के आधे सदस्यों के हस्ताक्षर होने ज़रूरी होते हैं . सूचना में पदमुक्त करने के सभी कारणों का उल्लेख होना आवश्यक है . हस्ताक्षर करने वाले ग्राम पंचायत सदस्यों में से तीन सदस्यों का जिला पंचायतीराज अधिकारी के सामने उपस्थित होना अनिवार्य होगा . सूचना प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर जिला पंचायत राज अधिकारी गाँव में एक बैठक बुलाएगा जिसकी सूचना कम से कम 15 दिन पहले दी जाएगी . बैठक में उपस्थित तथा वोट देने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से प्रधान एवं उप प्रधान को पदमुक्त किया जा सकता है.

अंतिम राय –

आज हमने आपको ग्राम पंचायत और उसके अधिकार के बारें में अनेक जानकारियां दी . जैसे – ग्राम पंचायत  क्या होती है और उसके अधिकार क्या होते हैं . हम आशा करते है की आज हमने आपको जो जानकारी दी वो जानकारी आपको पसंद आई होगी , आज आपने जो भी जानकारी हासिल की उस जानकारी को आप अपने तक ही सिमित नहीं रखे बल्कि उस जानकारी को दुसरे तक भी पहुचाएं .

आपको यह लेख कैसा लगा नीचे comment कर के जरुर बताइए अगर अभी भी कोई सवाल आप पूछना चाहते हो तो निचे Comment Box में जरुर लिखे | और कोई सुझाव देना चाहते हो तो भी जरुर दीजिये |  अगर अभी तक आपने हमारे Blog को  Subscribe नहीं किया  हैं तो जरुर Subscribe करें | जय हिंद, जय भारत, धन्यवाद |

 

 

 

 

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