इतिहास

छत्रपति संभाजी महराजा का इतिहास ( CHATRAPATI SAMBHJI MAHARAJ HISTORY IN HINDI )

Written by Jagdish Pant

छत्रपति संभाजी महराजा का जन्म 14 मई 1657 को पुरन्दर के किले में हुआ था उनके पिता का नाम छत्रपति शिवाजी और माता का नाम साईबाई है छत्रपति संभाजी के दादा का नाम शाहजी भोसले और दादी का नाम जीजाबाई था उनके बाई का नाम राजाराम और बहनों का नाम शकुबाई, अम्बिकबाई, रणुबाई , जाधव , दीपा बाई ,कमलाबाई पलकर, राज्कुंवार्बई, शिरके था   और उनकी पत्नी का नाम येसूबाई था छत्रपति संभाजी महराजा का सबसे बड़ा शत्रु ओरंगजेब था
छत्रपति संभाजी महराजा का इतिहास ( CHATRAPATI SAMBHJI MAHARAJ HISTORY IN HINDI )

संभाजी: जन्म और शिक्षा( Sambhji: brith and education )

जैसे की हमने आपको ऊपर बताया की छत्रपति संभाजी महराजा का जन्म 14 मई 1657 को पुरन्दर के किले में हुआ था लेकिन जब छत्रपति संभाजी दो साल के थे तो उनकी माता येसूबाई का देहांत हो गया था इसी वजह से संभाजी का लालन पोषण उनकी दादी जीजाबाई ने किया था उनके पिता उन्हें छ्वा कहकर पुकारते थे छवा का हिंदी  में अर्थ होता है शेर का बच्चा  संभाजी को 8 भषाओं का ज्ञान था

संभाजी का  परिवार ( Sambhaji family )

संभाजी राजा छत्रपति शिवाजी के पुत्र थे संभाजी की माता का नाम साईबाई था जो की छत्रपति शिवजी की दूसरी पत्नी थी राजा शिवाजी की तीन पत्निया थी जिनका नाम साईबाई, सोयरा बाई, पुतलाबाई, है अगर आप शिवजी के बारे में जानना चाहते है तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

पिता से कडवे सम्बन्ध

संभाजी का बचपन बहुत कठिनाईयों और विषम परिस्थितियों से गुजरा था संभाजी की सैतेली माता सोयराबाई अपने पुत्र को उत्तराधिकारी बनाना चाहती थी इसी कारण संभाजी और उनके पिता के संबंध खराब होने लगे संभाजी के कई मौको में अपनी बहदुरी का नमूना भी दिखाया लेकिन उनके परिवार को संभाजी पर विश्वास नही था एक बार शिवाजी ने संभाजी को सजा दे दी लेकिन संभाजी भाग निकले और मुगलों से जाकर मिल गए संभाजी से जब मुगलों को हिन्दुओं के प्रति  नृशंसता देखी तो इसलिए उन्होंने मुगलों का साथ छोड़ दिया और उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और वह घर लौट आई

संभाजी की कवि कलश से मित्रता ( Smabhaji and kavi kalash )

बचपन में संभाजी मुगल शासक औरंगजेब की कैद से बचकर भाग गए थे अज्ञातवास के दौरान शिवाजी अपने दूर के रिश्तेदारो के वहा कुछ समय तक रुके थे कुछ  समय के लिए संभाजी एक ब्राह्मण बालक बन गए थे संभाजी संस्कृत सिखने के लिए मथुरा चले गए थे

एक शासक के रूप में संभाजी ( Sambhaji as a ruler )

30 जुलाई  1665 को संभाजी और उनके अन्य सहयोगियों को सत्ता सैपी गयी. संभाजी को अपने पिता के सलाहकार पर भरोसा नही था इसलिए संभाजी ने कवि कलश को अपना सलाहकार बना दिया कवि कलश हिंदी और संस्कृत के महान विद्वान थे संभाजी को मराठों ने अपना उत्तराधिकारी नही माना

संभाजी महाराज की उपलब्धियां ( Achievements of Sambhaji )

संभाजी ने अपने छोटे से जीवन काल में हिन्दू के लिए बहुत काम किए इसलिए हिन्दू उनसे बहुत खुश थे संभाजी ने औरंगजेब की 8 लाख सेना का सामना किया और कई  युद्धों में मुघलों को पराजित किया| जब औरंगजेब महाराष्ट्र के युद्धों में व्यक्त थे तब संभाजी ने उत्तर भारत में  हिन्दू  शासको को अपना राज्य पुन: प्राप्त करने और शांति व्यवस्था बनाने के लिए समय मी गया
संभाजी ने कई वर्षो तक मुगलों को महराष्ट्र में उलझाए रखा. देश के पश्चिम घाट पर मराठा सैनिक और मुगल सैनिक कोई भी पीछे हटने को तैयार नही था संभाजी वास्तव में सिर्फ बाहरी आक्रमणों से नही बल्कि राज्य के भीतरी दुश्मनों से ज्यादा गिरे थे  बहुत समय तक पहाड़ और धरती वीर मराठों और मुगलों के खून से सनी रहती थी और एक समय ऐसा भी आया जब सारे मराठा पहाड़ के निचे आ गए और इस तरह से मुगलों और मराठो के सेनापति आमने सामने आ गए लेकिन यह आमने और सामने की स्थिति नही थी मराठो का स्थान पहाड़ के निचे का स्थान था और पहाडो के पास का मैदान मुगलों का था और सात साल तक मुगल और मराठा के भी युद्ध चलता रहा

मुग़ल बादशाह ने संभाजी के सामने तीन शर्तें रखी थीं?

  1. संभाजी मुसलमान बन जाए.
  2. संभाजी सारे मुग़ल गद्दारों के नाम बताए
  3. संभाजी अपनी सारी सेना, सारे किलों और मराठाओं के ख़ज़ाने को मुग़लों के हवाले कर दे

संभाजी ने औरंगज़ेब की किसी भी शर्त को मानने से इनकार कर दिया संभाजी ने अपनी बेइज़्जती का बदला गजब तरीके से लिया संभाजी ने औरंगज़ेब की बेटी से विवाह कर सारी बेइज्जती का बदला ले लिए

संभाजी मृत्यु

संभाजी की मृत्यु 11 मार्च 1689 को हुई थी

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको छत्रपति संभाजी महराजा का इतिहास ( CHATRAPATI SAMBHJI MAHARAJ HISTORY IN HINDI ) ,संभाजी: जन्म और शिक्षा, संभाजी का  परिवार , मुग़ल बादशाह ने संभाजी के सामने तीन शर्तें रखी थीं संभाजी महाराज की उपलब्धियां के बारे में अधिक से अधिक जानकरी देने का प्रयास किया है और आपको यह लेख पसंद आया होगा
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