इतिहास

दिल्ली के लाल किले का इतिहास क्या है ?

Written by Vinod Pant

आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से दिल्ली के लाल किले का इतिहास के बारे मे अनेक महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास कारेंगे |

दिल्ली के लाल किले का इतिहास

लाल किले(Red Fort) को लाल पत्थरों से बनाया गया है और यह 33 मीटर ऊँचा है | यह लाल किला पुरानी दिल्ली के वैभव और मुगलों के शौर्य को दर्शाता है | सन 1638 ई० मे इसकी मजबूत दीवारों का निर्माण आक्रमणकारियों से बचने के लिए किया गया था | इस लाल किले का मुख्य द्वार वर्तमान भारत का एक गतिवान और प्रतीकात्मक केंद्र बिंदु है जहा पर हर वर्ष स्वंतंत्रता दिवस पर बहुत भारी भीड़ एकत्रित होती है | दिल्ली में बने इस लाल किले (Red Fort) में हर शाम को एक साउंड एंड लाइट शो आयोजित किया जाता है , जो भारत से जुड़े इस किले के बारें मे बताता है |

दिल्ली में कहा पर स्थित है लाल किला –

लाल किला (Red Fort) दिल्ली के नेताजी सुभाष मार्ग पर स्तिथ है और यहां के लिए सबसे करीबी मेट्रो स्टेशन दिल्ली का चांदनी चौक है | दिल्ली का ये लाल किला सोमवार को बंद रहता है | यात्रियों के लिए लाल किला सुबह से शाम तक खुला रहता है | इस किले मे भारतीयों के लिए प्रवेश शुल्क 10 रूपये और विदेशियों के लिए प्रवेश शु ल्क 250 रूपये है | अगर आप यहां फोटोग्राफी करना चाहते है तो आपको यहां कोइ शुल्क नही देना होता है | अगर आप यहाँ वीडियो ग्राफी करना चाहते तो आपको यहाँ वीडियो ग्राफी करने के 25 रुपये देने पड़ते है | हर शाम को 6 बजे लाल किले पर एक लाइट एंड साउंड शो आयोजित होता है जिसमे वयस्कों के लिए 80 रूपये और बच्चो के लिए 30 रूपये शुल्क है |

लाइट एंड साउंड शो

किसने करवाया था लाल किले का निर्माण-

सन 1638 ई0 मे लाल किले का निर्माण बादशाह शाहजहाँ ने करवाया था | बादशाह शाहजहा ने लाल किले का निर्माण उस समय करवाया था जिस समय उन्होंने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली परवर्तित की | ऐसा माना जाता है की लाल और सफेद रंग बादशाह के पसंदीदा रंग थे | लाल किले के डिजाइन का पूरा श्रेय वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी को जाता है जिसने ताज महल की डिजाईन भी बनायी थी | दिल्ली में स्थित यह लाल किला यमुना नदी के समानांतर बना हुआ है | इस किले का निर्माण बादशाह शाहजहाँ ने मुहर्रम के पवित्र महीने में करवाया था | इस किले का निर्माण कार्य ख़त्म भी सन 1648 ईo में शाहजहा के देख – रेख मे ही हुआ था |

पहले लाल किले की जगह मध्ययुगीन भारत मे शाहजाह्बाद थी जो वर्तमान में पुरानी दिल्ली है | इस किले की योजना और सौंदर्यशास्त्र शाहजहाँ के शाषनकाल में मुगल रचनात्मकता के चरम सीमा के दौरान बना | जब मुगल साम्राज्य मे औरंगजेब के बाद प्रशासनिक और वित्तीय संरचना कमजोर हो गयी तब 18वी सदी मे इस किले का पुनरोदय हुआ और उसके बाद दिल्ली का ये किला 30 वर्षों तक बिना बादशाह के रहा | इसके बाद जहांदार शाह ने 1712 में इस किले का पदभार संभाल लिया | उसके एक वर्ष के शासनकाल पदभार संभाल लिया | उसके एक वर्ष के शासनकाल के बाद उसकी हत्या हो गयी और फारूखसियार ने जहांदार शाह ने 1712 मे इस किले का पदभार संभाल लिया |

लाल किले का निर्माण

फरुखसियार के बाद सन 1719 ईo मुहम्मद शाह ने कला मे रूचि दिखाते हुए इस किले की बागडोर अपने हाथों में ले ली | इसके बाद सन 1739 में फारसी बादशाह नादिर शाह ने मुगल सेना को आसानी से पराजित कर दिया और लाल किले (Red For) सहित मयूर सिंहासन को भी अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया | इस किले को जीतने के 3 महीने बाद बाद नादिर शाह कमजोर मुगल सेनापती को छोड़कर फारस चला गया | इसके बाद मुगुलों ने अपने आप को कमजोर समझते हुए मराठों के साथ में सन 1752 ईo मे संधि कर ली और मराठों को दिल्ली के सिंहासन का रक्षक बना दिया | इसके बाद सन 1758 ईo में मराठों का युद्ध पेशावर पर विजय प्राप्त करने के मकसद से अहमद शाह दुर्रानी के साथ हो गया | इसके बाद सन 1760 मे मराठों ने दुर्रानी के खिलाफ युद्ध करने की नीति बनायी और दीवाने खास की छत को पिघलाकर काफी सारा धन जूटा लिया |

सन 1803 ईo तक यह किला मराठों की देखरेख में रहा | इसके बाद दुसरे अंग्रेज मराठा युद्ध मे ईस्ट इंडिया कंपनी ने मराठो को हरा दिया और दिल्ली के लाल किले पर अपना अधिकार कर लिया | इसके बाद धीरे – धीरे अंग्रेजों ने मुगलों से उनके सारे प्रदेश छीन लिये और लाल किले को अपना निवास स्थान बना लिया | लाल किले पर अंतिम बार राज करने वाला शासक बहादुर शाह द्वितीय था , जिसने सन 1857 ई0 मे अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध किया था , लेकिन वो युद्ध मे हार गए और लाल किले को अंग्रेजों से नहीं बचा पाए | युद्ध में हारने के बाद बहादुर शाह को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया और उसे बंदी बनाकर लाल किले में लाये | सन 1858 ईo अंग्रेजों ने शासक बहादुर शाह द्वितीय को रंगून भेज दिया |

गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic day History in Hindi (गणतंत्र दिवस का इतिहास )

इस किले में मुगल शासन का का अंत करने के बाद अंग्रेजों ने इस किले से मूल्यवान वस्तुए लुट ली , इसके साथ ही अंग्रेजों ने सारे फर्नीचर को हटाकर तबाह कर दिया और हरम का कमरा , नौकरों के कमरे और बगीचे को तबाह कर दिया और पत्थरों की बैरक बनवा दी | इस किले के उत्तर मे बनी संगमरमर की शाही ईमारत को छोड़कर अंग्रेजों ने सब तबाह कर दिया | अंग्रेजों ने इस किले के लगभग दो तिहाई हिस्से को नष्ट कर दिया | इसके बाद सन 1899 से 1905 के बीच लार्ड कर्जन ने फिर से इस किले का निर्माण करवाया और इसके साथ ही लार्ड कर्जन ने लाल किले के बाग को भी फिर से तैयार करवाया |

जब नादिर शाह ने लाल किले पर आक्रमण किया था उस समय इस किले के कई जवाहरातो और कलाकृतियों को लुट लिया गया था | इसके बाद 1857 की क्रांति में हार जाने के बाद इस किले की कई वस्तुओं जैसे कोहिनूर हीरा , शाहजहा का शराब का प्याला और बहादुर शाह का ताज को ब्रिटिश म्यूजियम भेज दिया | ये चीजें अभी भी लन्दन में है | भारत सरकार ने कई बार इन चीजों को भारत को लौटाने को कहा लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इन चीजों को भारत को लौटाने से साफ – साफ मना कर दिया | सन 1911 में ब्रिटिश राजा और रानी दिल्ली के दरबार को देखने आए थे और इसी दौरान लाल किले की कुछ इमारतों को भी सुधारा गया था | भारतीय सेना के कुछ अफसरों को भी लाल किले में कोर्ट मार्शल किया गया |

15 अगस्त सन 1947 भारत के आजाद होने के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने लाल किले के नेहरु गेट से तिरंगा फहराया | इसके बाद से हर स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से तिरंगा फहराते है और देश की जनता को संबोधित करते है | भारत के स्वतंत्र होने के बाद लाल किले में बहुत सारे बदलाव हुए | लाल किले को सैनिक छावनी बना दिया गया | इसके बाद 2003 तक लाल किले के कई हिस्से भारतीय सेना के अधीन रहे और इसके बाद लाल किले की मरम्मत करने के लिए इसको भारतीय पुरातत्व विभाग के हवाले कर दिया गया |

अंतिम राय –

आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से लाल किले के इतिहास के बारे मे अनेक जानकारी दी |

हम आशा करते है की आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारियाँ दी वो जानकारियाँ आपको पसदं आई होगी | आज आपने इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारी हासिल की उसे आप अपने तक ही सिमित नहीं रखे बल्कि उसे दूसरों तक भी पहुचाएं , जिससे दुसरे लोग भी इसके बारें में जान सकें |

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