इतिहास

देश का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नेशनल पार्क जिम कॉर्बेट

देश का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नेशनल पार्क जिम कॉर्बेट
Written by Vinod Pant

आज के समय में दुनिया तेजी से बदल रही है और इससे भी तेजी से इस दुनिया में रहने वाले लोग बदल रहे है , आज के समय में विज्ञान ने भी काफी प्रगति कर ली है जिस कारण से काफी लोगों का विकास हो चूका है , आज के समय में विज्ञान और प्राद्योगिकी में कई ऐसे आविकार हो चुक है जिनसे मनुष्य का विकाश तो हो रहा है लेकिन इससे हमारे पर्यावरण को काफी क्षति भी पहुच रही है . लेकिन एक अच्छी बात ये है की समय रहते लोगों को अपनी गलती का अहसाह  भी हो रहा है . और इसी कारण से लोगों ने राष्ट्रीय उद्यान यानि नेशनल पार्क की निर्मित करना शुरू कर दिया है .

इसी तरह का एक नेशनल पार्क भारत के उत्तराखंड राज्य के नैनीताल राज्य में स्थित है , ये नेशनल पार्क देश का सबसे पुराना और बड़ा नेशनल पार्क है आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको इस नेशनल पार्क के बारें में अनेक महत्वपूर्ण जानकारियाँ देंगे जैसे – जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का इतिहास ,जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का क्षेत्र , जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क मुख्य आकर्षण का केंद्र , जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क को देखने का सही समय क्या है आदि .

कॉर्बेट नेशनल पार्क वन्य जीव प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है जो प्रकृति माँ की शांत गोद में आराम करना चाहते हैं। पहले यह पार्क (उद्यान) रामगंगा राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता था परंतु वर्ष 1957 में इसका नाम कॉर्बेट नेशनल पार्क (कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान) रखा गया। इस पार्क का नाम प्रसिद्द ब्रिटिश शिकारी, प्रकृतिवादी और फोटोग्राफर जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया

देश का सबसे बड़ा और पुराना नेशनल पार्क जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क-

जिम कार्बेट नेशनल पार्क एक उद्यान होने के साथ कार्बेट टायगर रिजर्व का एक हिस्सा है , ये उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है  इस पार्क का दृश्य दर्शकों के मन को मोह लेता है , ख़ास तौर पर ये पार्क बाघों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है . जिन कार्बेट नेशनल पार्क को नैनीताल जिले में स्थित रामनगर शहर के निकट एक विशाल क्षेत्र को घेर कर बनाया गया है . ये कार्बेट नेशनल पार्क लगभग 1316 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, इसका मुख्य कार्यालय में है . इसी कार्यालय से परमिशन लेकर लोग इस पार्क में जाते है .

जिम कार्बेट नेशनल पार्क का इतिहास –

जिम कार्बेट नेशनल पार्क भारत का सबसे बड़ा और दुनिया भर में जाना वाला राष्ट्री उद्यान है , इस पार्क का निर्माण सन 1976 में किया गया था . इस उद्यान में पहली बार सन 1973 में बाघों को बचाने की मुहीम चलायी गयी थी , जिस कारण से ये आज दुनिया भर में प्रसिद्ध है .

जिम कार्बेट नेशनल पार्क का क्षेत्र –

जिम कार्बेट नेशनल पार्क का क्षेत्र

जिम कार्बेट नेशनल पार्क 1316 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुवा है . इस पार्क में अनेक चीजें जैसे – ची उची पहाड़िया, नदी का लम्बा प्रदेश, हरे मैदान और बड़ी बड़ी झीले यहाँ आने वाले लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है . इस पार्क को नजदीक से देखने के लिए लोग जीप का सहारा लेते है ,कुछ लोग हाती के पीठ पर बैठकर भी इस क्षेत्र को करीब से देखते है . जीप और अन्य वाहनों की आवाज से यहाँ जीव – जंतुओं के जीवन में शोरगुल उत्पन होता है , जिस कारण से इस पार्क का ज्यादतर भ्रमण हाथी के पीठ पर बैठकर ही किया जाता है .

इस नेशनल पार्क में एक बड़ी संख्य में बाघों की तादाद है , इस क्षेत्र में आपको भारत में लगभग दुर्लभ हो चुकी उदबिलाव की प्रजाति देखने को भी मिलती है | इस कार्बेट नेशनल पार्क में एक क्षेत्र पाटिल डून की वादी की ढिकाला है , जहां पर भारी मात्र में जंगली जानवर देखने को मिलते है , इसी कारण से इस क्षेत्र में ज्यादातर लोग जंगली जानवरों को देखने को आते है .

ढिकाला में पक्षी भी काफी बड़ी क्संख्या में पाए जाते है , इसलिए पक्षियों को देखने के लिए ये जगह काफी अच्छी है , इस क्षेत्र में अलग अलग प्रजाति का काफी पशु -पक्षी है , इस क्षेत्र में आपको 50 से अधिक शिकारी पक्षियों की प्रजातियां भी देखने को मिलती है , इस क्षेत्र में अलग अलग प्रकार की पक्षियों की आवाजें सुनाई देती है जो इस क्षेत्र में आये सैलानियों के दिल को मोह लेती है , यहाँ आपको हर प्रकार के जंगली जानवर और पक्षियों की प्रजातियाँ देखने को मिल जाती है , इनमें मुख्य रूप से  बंगाल के रॉयल टाइगर, हाथी, हिरन की चार पाच प्रजातिया , गुलदार, जंगली बिल्ली, फिशिंग कैट्स, हिमालयन कैट्स, हिमालयन काला भालू, सुअर, तेंदुवे, गुलदार, सियार, जंगली बोर, पैंगोलिन, भेड़िए, मार्टेंस, ढोल, सिवेट, नेवला, ऊदबिलाव, खरगोश, चीतल, सांभर, हिरन, लंगूर, नीलगाय, स्लोथ बीयर, सांभर, काकड़, चिंकारा, पाड़ा, होग हिरन, गुंटजाक (बार्किग डियर) सहित कई प्रकार के हिरण, तेंदुआ बिल्ली, जंगली बिल्ली, मछली मार बिल्ली, भालू, बंदर, जंगली, कुत्ते, गीदड़, पहाड़ी बकरे (घोड़ाल) तथा हजारों की संख्या में लंगूर और बंदरों की प्रजातियां और अनेक प्रकार की पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती है .

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के जंगल में किंग कोबरा, वाइपर, कोबरा, किंग कोबरा, करैत, रूसलस, नागर और विशालकाय अजगर जैसे 25 प्रजाति के सरीसृप व सर्प प्रजातियां भी पायी जाती हैं, जो बताती हैं कि यह क्षेत्र सरीसृपों और स्तनपायी जानवरों की जैव विविधता के दृष्टिकोण से कितना समृद्ध है

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जिम कार्बेट नेशनल पार्क का वातावरण –

जिम कार्बेट नेशनल पार्क में शितकालीन रात्री में ठण्ड होती है . लेकिन इस क्षेत्र में दिन में धुप रहती है जिस कारण से इस क्षेत्र  में आने वाले लोग गर्मी का अनुभव कर सकते है . इस क्षेत्र में जुलाई और सितम्बर  में बारिश होती है .

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के मुख्य आकर्षण

जिम कार्बेट नेशनल पार्क पार्क में बहुत सी चीजें आकर्षण का केंद्र है जिनमें से कुछ के बारें में हम आपको नीचे बता रहे है .

  • बिजरानी सफारी जोन – Bijrani zone
  • झिरना सफारी जोन – Jhirna zone
  • धेला सफारी जोन – Dhela zone
  • ढिकाला सफारी जोन – Dhikala Safari Zone
  • ढिकाला जोन – Dhikala zone
  • दुगा देवी जोन – Durga Devi zone
  • सिताबानी सफारी जोन – Sitabani Safari Zone

बिजरानी सफारी जोन –

बिजरानी सफारी जोन कृतिक सौंदर्य और खुले घास के मैदानों से परिपूर्ण है  ईस क्षेत्र में  मात्रा में घास की उपलब्धि के कारण यह क्षेत्र लोकप्रिय पर्यटन केंद्र है बिजरानी जोन का प्रवेश द्वार रामनगर शहर से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

झिरना सफारी जोन –

झिरना जिम कार्बेट नेशनल पार्क,पर्यटन वर्ष दौर के लिए खुला रहने वाला एक महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्र है झिरना रामनगर शहर से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

ढिकाला सफारी जोन –

ढिकला पातिलदून रामगंगा की घाटी की सीमा पर स्थित है यह स्थान वन्य जीवन की दृष्टि से जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में सबसे लोकप्रिय क्षेत्र  है  . ढिकला जोन जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में सबसे बड़ा और सबसे विविध क्षेत्र है, यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है इस स्थान से विदेशी जीव की दृष्टि की पेशकश उत्तम है .  ढिकला जोन का प्रवेश द्वार रामनगर शहर से 18 किलोमीटर दूर है .

दुर्गा देवी जोन –

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में दुर्गा देवी जौन उत्तर पूर्वी सीमा पर स्थित है .  दुर्गा देवी जॉन उन लोगों के लिए पृथ्वी पर स्वर्ण है जो पक्षी देखने का शोक रखते है दुर्गा देवी जॉन का प्रवेश द्वार रामनगर सर से 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है .

सीताबानी –

सीताबानी जॉन कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता है लेकिन प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण यह स्थान बिल्कुल शांत है जो कि आपको जीवन में एक सुकून देता है जो व्यक्ति शांत माहौल पसंद करते हैं, वह सिताबानी क्षेत्र का  आनंद उठा सकते हैं इन जोनो का भ्रमण जीप की सफारी द्वारा किया जा सकता है इसके अतिरिक्त यहां पर हाथी के द्वारा जिम कार्बेट अभ्यारण का भ्रमण अधिक किया जाता है.

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क देखने का सही समय –

अगर जिम कार्बेट नेशनल पार्क को देखने के समय की बात करें तो यहाँ घुमने का सही समय नवम्बर से फरबरी तक का रहता है . जिम कार्बेट नेशनल पार्क देश का सबसे पुराना और दुनिया में प्रसिद्ध नेशनल पार्क है . यहाँ पर आपको अनेक वृक्षों और अनेक ऐसे पौधों की प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी जो आपको दुनिया भर में कही देखने को नहीं मिलेगी .

पर्यटकों के लिए रहने का स्थान –

आप रामनगर में बहुत जगहों में रह सकते हैं जैसे दिखाला, जंगल में स्थित रेस्ट हाउसेस तथा लकड़ी से बने घर ,  सरापड्यूली, बिजरानी तथा घैईरल जैसी जगहों में फॉरेस्ट रेस्ट हाउसिंग की सुविधा उपलब्ध है , पार्क के आसपास बहुत सारे रिसोर्ट पर्यटकों के लिए उपलब्ध हैं,  सरकारी गेस्ट हाउस में भी आप अपने लिए कमरे आरक्षित कर सकते हैं।

पार्क के खुलने का समय –

पार्क सुबह 6 बजे से लेकर 11 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। दोपहर में 2.30 से लेकर 5.30 बजे तक यह खुला रहता है . इसके बाद मौसम के अनुसार समय परिवर्तित होता रहता है .

जिम कार्बेट नेशनल पार्क में दर्शकों के लिए आवश्यक सुबिधायें –

जिम कार्बेट नेशनल पार्क में पर्यटन विभाग द्वारा दर्शकों के लिए ठहरने और उद्यान की वयवस्था की गयी है . उद्यान के अन्दर ही लॉज, कैन्टीन व लाइब्रेरी हैं .  उद्यान कर्मचारियों के आवास भी यहीं हैं . लाइब्रेरी में वन्य जीवों से संबंधित अनेक पुस्तकें रखी हैं . लोग पशु – पक्षियों से प्रेम करते है अर्थात पशु प्रेमी है , वो लोग इन कितबों का घंटों बैठकर अध्यन करते  है . यहाँ के लॉजों के सामने लकड़ी के मचान बने हैं, जिनमें लकड़ियों की सीढियों द्वारा चढ़ा जाता है और बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था है .  शाम के समय सैलानी यहाँ बैठकर दूरबीन से दूर-दूर तक फैले प्राकृतिक सौन्दर्य तथा अभयारण्य में स्वच्छंद विचरण करते वन्य जीवों को देख सकते हैं . सैलानी यहाँ आकर प्राकृतिक सौन्दर्य का जी भर कर आनन्द उठा सकते हैं .  यहाँ के वनरक्षक आपको सतर्क कर जाते हैं कि देर रात तक बाहर न रहें और न ही रात के समय कमरों से बाहर निकलें . ऐसी ही हिदायतें यहाँ जगह-जगह पर लिखी हुई भी हैं . क्योकि कभी-कभी रात के समय अक्सर जंगली हाथियों के झुंड या कोई खूंखार जंगली जानवर यहाँ तक आ जाते हैं .

कैसे पहुचे जिम कार्बेट नेशनल पार्क –

यहाँ पहुँचने के लिए दो रेलवे स्टेशन हैं- रामनगर और हल्द्वानी . रामनगर से ‘धिकाला के लिए 47 कि.मी. की पक्की सड़क है . उद्यान दिल्ली से मात्र 240 किलोमीटर दूर है . सड़क मार्ग से 290 किलोमीटर है . बसों, टैक्सियों और कार द्वारा यहाँ 5-6 घंटे में पहुँचा जा सकता है .

अंतिम राय –

आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से भारत के सबसे पुराने और बड़े पार्क जिम कार्बेट नेशनल पार्क के बारें में अनेक रोचक बातें बताई जैसे – जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का इतिहास ,जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का क्षेत्र , जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क मुख्य आकर्षण का केंद्र , जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क को देखने का सही समय क्या है आदि

हम आशा  करते है की , आज आपने इस आर्टिकल के माध्यम से  जो भी जानकारी हासिल की है  वो आपको पसंद आई होगी  . आज आपने इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारी हासिल की उसे आप अपने तक ही सिमित नहीं रखे बल्कि उसे दूसरों तक भी पहुचाये , जिससे दुसरे लोग भी इसके बारे में जान सके .

 

 

 

 

 

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