जीवन परिचय

धीरू भाई अम्बानी जीवनी ( dhirubhai Ambani biography in Hindi )

धीरू भाई अम्बानी जीवनी ( dhirubhai Ambani biography in Hindi )
Written by Jagdish Pant

Dhirubhai Ambani- धीरू अम्बानी को पूरी दुनीया  धीरजलाल हीरालाल अंबानी की नाम से भी जानती है| वह एक सफल भारतीय व्यापारी थे| उन्होंने सन 1996 में रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना की थी | तो दोस्तों आज हम आपको धीरू भाई अम्बानी जीवनी ( dhirubhai Ambani biography in Hindi ) के बारे में आधिक से अधिक देने का प्रयास करेंगे

धीरू भाई अम्बानी जीवनी ( dhirubhai Ambani biography in Hindi )

 धीरू भाई अम्बानी की प्रारंभिक जीवनी

धीरू भाई अम्बानी का पूरा नाम-धीरू भाई हीरालाल अम्बानी था |  उनका जन्म 28 दिसंबर 1932 गुजरात के जूनागढ़ प्रान्त में एक सामान्य परिवार  में  हुआ था|

घीरू भाई के पिता का नाम  हीरालाल अंबानी और उनकी माता का नाम जमनाबेन अम्बानी था|

धीरू’ भाई  अम्बानी की उम्र जब 16 वर्ष की थी तब वह यमन (aden) चले गए थे| वहां उन्होंने 300 रुपे वेतन में  (A. Besse & Co.के साथ काम किया| 2 साल के बाद धीरू भाई   (A. Besse & Co.) के distributer बन गये|

और एडन (Aden) के बंदरगाह पर कम्पनी के एक फिल्लिंग स्टेशन के प्रबंधन के लिए धीरुभाई को पदोन्नति दी गई।

धीरू भाई अम्बानी का विवाह कोकिलाबेन के साथ हुआ | उनके दो बेटे  मुकेश अम्बानी और अनिल अम्बानी और दो बेटियां  नीना कोठारी (Nina Kothari) और दीप्ति सल्गाओकर(Deepti Salgaocar). थी|

अम्बानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज  कंपनी में 2012 तक 85000 कर्मचारी काम करते थे | 2012 में संपत्ति के हिसाब रिलाइंस परिवार  विश्व के 500 सबसे अमीर कारोबारी थे और उन्हे सन्डे टाइम्स ने एशिया के टॉप 50 व्यापारियों के सूची में शामिल कर दिया| अम्बानी  ने सन 1977 में रेलायस की स्थापना की थी और  सन 2007 में उनकी संपत्ति 60 बिलियन थी|

धीरू भाई अम्बानी जीवनी ( dhirubhai Ambani biography in Hindi ) एक नजर में जानकारी – Information of Dhirubhai Ambani life story in Hindi 

 

सन 1958 को भारत वापस आ गये  उसके बाद  Dhirubhai Ambani ने मुम्बई मे 15000.00 की पूंजी के साथ रिलायंस वाणिज्यिक निगम (Relianc Commercial Corporation) की स्थापना थी  reliance commercial corporation का प्राथमिक व्यवसाय polister का आयात और मसलों का निर्यात करना था |

 

1972 मे ‘रिलायन्स’ एक छोटी कम्पनी थी उस समय भारत में २४ कपड़ा मील की जाच करने विश्व बैंक की  एक टिम भारत आई थी|और उनका  ऐसा कहना था की और देशो की तुलना में  ‘रिलायन्स’ सबसे अच्छी कम्पनी है

1977  को ‘रिलायन्स’ ने खुद के लिये पहली बार बाजार में शेअर बेच कर पैसा खड़ा किया|

ऐसा नहीं था की धीरू भाई अम्बानी एक अमीर परिवार से थे , बल्कि वे आपके और हमारे तरह ही  एक साधारण परिवार से थे  लकिन उनमे कुछ नया और अलग करने की तथा आगे बड़ने की चाह थी . उन्होंने अपनी इसी सोच को काम में परिवर्तित कर अपने को एक सफल उद्योजक बनाया था . और अपनी इसी सोच के कारन धीरू भाई अम्बानी आज  के समय में दुनिया के लिए एक आदर्श बन चुके है .

रिल्यांस टेक्सटाइल्स

धीरू भाई अम्बानी को टेक्सटाइल्स business ki अच्छी  opportunities का बोध होने के कारण उन्होंने  नैरोड़ा (Naroda) (अहमदाबाद) मै कपड़ा मिल की सुरवात की|

Dhirubhai Ambani 1982 के बाद वह सामान्य भारतीय निवेशको  के हीरो बन गये|  इसके बाद  भारत में ‘रिलायन्स’ सबसे ज्यादा निवेश करने वाली कम्पनी बनी

Dhirubhai Ambani  ने 1996 में  अहमदाबाद के पास नरोडा मै पहली कपडे  की मील की स्थापना की.   और पहले साल में ही ९ करोड़ का कारोबार करके १३ लाख का मुनाफा कमाया|

धीरूभाई अम्बानी ने अपने बड़े भाई के बेटे के नाम पर विमल ब्रांड की शुरुआत की थी  1975 में विश्व बैंक के एक तकनिकी मंडली ने ‘रिलायंस टेक्सटाइल्स’ निर्माण इकाई का दौरा किया। इकाई की दुर्लभ खासियत यह थी की इसे उस समय में “विकसित देशों के मानकों से भी उत्कृष्ट” माना गया।

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धीरू भाई अम्बानी जीवनी/ dhirubhai Ambani biography in Hindi

  धीरुभाई अम्बानी  का नसली वाडिया के साथ संघर्ष-

धारुभई अम्बानी और रिलायंस उद्योग एक समय में बॉम्बे डाइंग (Dombay Deying) नसली वाडिया  के सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी थे।  धीरुभाई अम्बानी और नसली वाडिया दोनों अपने राजनैतिक क्षेत्र में अपनी पहुच के लिए जाने जाते थे और उनमें योग्यता थी

धीरुभाई अम्बानी  का कारोबार का विस्तार –

आपने जीवन काल मे ही धीरुभाई अम्बानी ने रिलायंस का कारोबार का विस्तार कई  क्षेत्रों मे किया| इनमे से मुख्य रूप पेट्रोरसायन,  ,सूचना प्रोद्योगिकी, उर्जा, बिजली, फुटकर  मे  धीरुभाई अम्बानी ने कारोबार का विस्तार किया

  धीरुभाई अम्बानी के आलोचक 

धीरुभाई अम्बानी ने कुछ समय मे ही अपने  कारोबार को आसमान की  बुलंदियों तक पहुचा दिया था.  लेकिन उन पर लचीले मूल्यों और अनैतिक प्रवृति अपनाने के आरोप भी लगे। और उन पर यह  भी आरोप लगा की उन्होंने सरकारी नीतियों अपनी आवश्यकताओ के अनुकूल बदली|

धीरुभाई अम्बानी के विचार-

  • “बड़ा सोचो, जल्दी सोचो, आगो सोचो, इन पर किसी का एक एकाधिकार नहीं है
  • “कठिनाइयों में भी अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश करें और कठिनाइयों का सामना करे
  • समय सीमा पर  ही काम ख़त्म कर लेना काफी नहीं है आपको समय से पहले काम ख़त्म करना चाहिए
  • जो सपने देखने की हिम्मत करता है| वाही पूरी दुनीया जीत सकता है |

Dhirubhai Ambani Death – मृत्यु :

धीरुभाई अम्बानी को २४ जून २००२ को मुम्बई के ब्रेच कैंडी अस्पताल में२४ जून २००२  को भर्ती किया गया। और उनको यह दूसरा सदमा आया  था उन्हें पहला सदमा 1986  में आया था , और इसी कारण उनका दाया हाथ काम नहीं करता था . जब उन्हें पहला सदमा आया था तो उस समय वे एक हप्ते तक कोमा में रहे थे . उन्होंने६ जुलाई(6 july) 2002  रात के11:50 के आसपास अपनी अन्तिम सांसें लीं।

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको धीरू भाई अम्बानी जीवनी ( dhirubhai Ambani biography in Hindi ) के बारे में अधिक से अधिक जानकारी देने का प्रयास किया हैं  आपको यह लेख कैसा लगा  निचे comment कर के जरुर  बताइए अगर अभी भी  कोई सवाल आप पूछना चाहते हो तो निचे Comment Box में जरुर लिखे| और कोई सुझाव देना चाहते हो तो भी जरुर दीजिये| हमारे Blog को अभी तक अगर आप Subscribe नहीं किये हैं तो जरुर Subscribe करें| जय हिंद, जय भारत, धन्यवाद|

 

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