इतिहास

नील आर्मस्ट्रांग की जीवनी(Neil Armstrong Biography in Hindi)

नील आर्मस्ट्रांग की जीवनी
Written by Vinod Pant

नील आर्मस्ट्रांग  ऐसे पहले आदमी थे जिन्होंने चंद्रमा पर सबसे पहले कदम रखा था | नील आर्मस्ट्रांग  का जन्म 5 अगस्त सन 1930 ईo को संयुक्त राज्य अमेरिका के  वापाकोनेटा ( वाओहियो) में  हुआ था | जब आर्मस्ट्रांग   छोटे थे तभी से उनका रुझान चन्द्रमा ,तारो और अन्तरिक्ष की ओर आकर्षित रहा| यही कारण था की इस क्षेत्र को नील आर्मस्ट्रांग  ने अपने करियर के तौर पर अपनाया | अपनी पढाई  पूरी करने के बाद नील आर्मस्ट्रांग ने कुछ समय नौसेना में  काम किया | नौसेना में काम करने के कुछ समय बाद  नील आर्मस्ट्रांग ने सन 1955 में National Advisory Committee for Aeronautics में काम करना शुरू कर दिया | बाद में इसी कमेटी का नाम NACA(नासा) पड़ा |

नील आर्मस्ट्रांग

नासा में नील आर्मस्ट्रांग  ने  इंजिनियर ,टेस्ट पायलट ,अन्तरिक्ष यात्री और प्रशाशक के रूप में कार्य किया | नासा से नील आर्मस्ट्रांग   ने अनेक प्रकार के हवाई जहाज उडाये , जिनमे 4000 किमी प्रति घंटे की गति से उड़ने वाले एक्स-15 से लेकर जेट ,राकेट ,हेलीकाप्टर और ग्लाइडर भी शामिल थे | इसके बाद 16 मार्च सन 1966 ईo को  नील आर्मस्ट्रांग मिनी-8 अभियान के तहत  सबसे पहले अन्तरिक्ष में गये | इसके बाद नील आर्मस्ट्रांग  अपोलो-2 में बतौर कमांडर जुलाई 1969 को चन्द्रमा की सतह पर उतरे और  यहाँ पर पहुँच कर उन्होंने  इतिहास रच दिया |

चंद्रमा अभियान से लौटकर नील आर्मस्ट्रांग सन 1971 ईo तक नासा के एरोनॉटिक्स यूनिट में बतौर डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर  कार्य करते रहे |इसके बाद नील आर्मस्ट्रांग सिनसिनाती यूनिवर्सिटी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हो गए और आठ साल तक यही रहे | इसके बाद सन 1982 में नील आर्मस्ट्रांग कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी फॉर एविएशन इंससर्न में चेयरमैन बन गए  और सन 1992 तक इस पद पर रहते हुए  उड़ान से जुडी प्रोधोगिकी के विकास में सक्रिय योगदान करते रहे |

28 जनवरी  सन 1986 को एक चैलेंजर अन्तरिक्ष यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसके सभी यात्री मारे गये | इस विमान दुर्घटना की जांच के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक चयन आयोग का गठन किया जिसमें नील आर्मस्ट्रोंग को इस आयोग का वाईस चेयरमैन  बनाया गया | वाईस चेयरमैन बनना नील आर्मस्ट्रोंग के जिंदगी का एक पड़ाव था | इस अहम पड़ाव से गुजरने के बाद नील आर्मस्ट्रोंग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौपी थी | ऐसा माना जाता है नील आर्मस्ट्रोंग विज्ञान और गणित में काफी तेज थे | इसके आलावा खगोल विज्ञान और ब्रह्मांड विज्ञान में भी उनकी काफी दिलचस्पी थी | जब नील आर्मस्ट्रोंग मात्र 16 साल के थे उस समय ही इन्होने अपना  छात्र पायलट लाइसेंस हासिल कर लिय था |

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ऐसा माना  जाता है की एक बार सन 1951 ,में नील आर्म स्ट्रोंग युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया के उपर उड़ रहे थे | अपने F9F पेंथर जेट विमान में उड़ते हुए उन्होंने देखा की उत्तरकोरिया के जावन अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे | इस समय अगर नील आर्मस्ट्रोंग चाहते तो  वो सैनिको को अपनी गन से उड़ा सकते थे लेकिन उन्होने ऐसा नहीं किया और ट्रिगर से उंगली हटा ली और आगे निकल गये | नील आर्मस्ट्रोंग ने  ऐसे निहत्थे लोगो पर हमला नहीं किया  ,जो अपना बचाव भी नही कर सकते थे |

जब नील आर्मस्ट्रांग पहली बार चाँद की धरती पर उतरे तो उस समय उनके दिल की गति  धड़कन 150 धडकन प्रति मिनट मापी गयी | नील बोले “मुझे लगता है कि हर आदमी की हृदय की धडकनों की एक निश्चित संख्या होती है और मै एक भी धड़कन फ़ालतू खर्च नही करना चाहता था ” | चंद्रमा को  उन्होंने रहने की एक अच्छी जगह बताया |

नील आर्मस्ट्रांग का जीवन एक  संयमी  जीवन था | नील आर्मस्ट्रोंग ने अपने जीवन में एक ऐसा काम किया , जिसे कोई  बड़े  से बड़ा वैज्ञानिक ही कर पाये | नील आर्मस्ट्रांग ने अपने जिन्दगी में जितने भी काम किये , उन कामो का उन्होंने अपने मन में कभी भी अहंकार नहीं किया | उन्होंने नेवी फाइटर पायलट , टेस्ट पायलट और अन्तरिक्ष यात्री के रूप में गर्वपूर्वक देश की सेवा की | उन्होंने एक व्यवसायी ,शिक्षाविद और समुदाय नेता के रूप में इज्जत हासिल की | नील आर्मस्ट्रोंग को अनेक  पुरुस्कार और सम्मान मिले ,लेकिन अन्तरिक्ष जितनी ऊँची उपलब्धी के सामने सब छोटे  पड़ गये | 25 अगस्त 2012 को 82 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से इस महानतम अन्तरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग का निधन हो गया था |

अंतिम राय –

आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से चाँद पर पहला कदम रखने वाले व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग की जीवनी के बारें  में अनेक महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया |

हम आशा करते है की आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारियाँ दी वो जानकारियाँ आपको पसदं आई होगी | आज आपने इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारी हासिल की उसे आप अपने तक ही सिमित नहीं रखे बल्कि उसे दूसरों तक भी पहुचाएं , जिससे दुसरे लोग भी इसके बारें में जान सकें  |

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