जीवन परिचय

बसरा मंदिर का इतिहास

बसरा मंदिर
Written by Vinod Pant

दोस्तों क्या आप जानते है की बसरा मंदिर का इतिहास क्या है . ? क्या आप जानते है की ये मंदिर कहा स्थित है . अगर आप बसरा मंदिर के बारें में जानते है तो ये अच्छी बात है . अगर आपको बसरा मंदिर के बारें में जानकारी नहीं है तो आज हम आपको बसरा मंदिर के बारे में और इस मंदिर के रोचक इतिहास के बारें में अनेक जानकारियाँ देंगे .

बसरा मंदिर – Basara Temple

बसरा मंदिर का इतिहास

दोस्तों बसरा में स्थित ज्ञान की देवी सरस्वती के भव्य मंदिर को ही बसरा मंदिर के नाम से जानते हैं . बसरा में स्थित माता सरस्वती के ये मंदिर देश  के दुसरे सभी मंदिरों से अलग हैं . ये मंदिर गोदावरी नदी के तट पर स्थित है . इस मंदिर को विद्या के देवताओं का मंदिर कहा जाता है .

दोस्तों आपको बता दें की जब प्राचीन काल में  बच्चो को शिक्षा के लिए भेजा जाता था . तो उस समय बच्चो को शिक्षा ग्रहण करने से पहले इस मंदिर में लाया जाता था . देवताओं के दर्शन कराने के बाद तथा अक्षर पूजा काराने के बाद उनको शिक्षा के लिए भेजा जाता था . ई बता दें की पुरे दक्षिण भारत में ऐसा मंदिर केवल बसरा में ही स्थित है . और दूर – दूर से लोग अपने बच्चो को लेकर इस मंदिर में आते है .

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बसरा मंदिर का इतिहास

ये मंदिर दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य ,में गोदावरी नदी  के तट पर स्थित है . बसरा मंदिर ज्ञान के देवी सरस्वती का मंदिर है . इस मंदिर की ऊँचाई 579 मीo (1900 फीट) है

दोस्तों महाभारत काव्य के निर्माता महर्षि व्यास के अनुसार कुरु क्षेत्र का युद्ध समाप्त होने पर खुद महर्षि व्यास और उनके शिष्य ऋषि विश्वामित्र के साथ इसी परिसर में रहने आये थे . वे सभी  दंडकारण्य जंगल में ध्यान करने आये थे . जब  उन्होंने गोदावरी नदी के तट पर ध्यान  किया तो उन्हें ज्ञात हुवा की इस जंगल में बहुत शांति है.

बसरा में आने के बाद ज्ञान की देवी सरस्वती ने महर्षि व्यास को दर्शन दिए और कहा की आप यहाँ तीन देवियों  महा सरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली के मंदिर बनायें . इसके बाद महर्षि व्यास ने वहां  से थोडी सी रेत ली और वहीँ  पर तीनो देवियों की मूर्ति बना दी .
यहाँ पर तीन देवियों का मंदिर बनाने के बाद महर्षि व्यास अपना ज्यादातर समय इन्ही तीन देवियों के पूजा – पाठ में लगा देते थे . इसी कारण इस मंदिर को वासर के नाम से जाना जाने लगा .
इस प्रदेश में ज्यादातर लोग मराठी भाषा बोलते हैं . इसी कारण ये नाम वासर से बसरा हो गया .
बसरा में जो ज्ञान के देवी सरस्वती का  मंदिर हैं . इस मंदिर में ‘अक्षराभ्यासम की शुरुवात करने के लिए साल के चार दिन बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते है . यहाँ पर बसंत पंचमी जिसे श्री पंचमी भी कहते हैं . और माघ महीने के आमवस्या के बाद पांचवे दिन आती है . इस अवसर पर इस मंदिर में देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और पूजा के बाद बच्चों की शिक्षा शुरू की  जाती है .
इस मंदिर में बच्चों की शिक्षा के लिए विजया दशमी का दिन भी बहुत शुभ मना जाता है . इस मंदिर में बच्चो के शिक्षा ग्रहण करने के लिए तीसरा जो सबसे महत्वपूर्ण दिन है वो है व्यास पौर्णिमा (गुरु पौर्णिमा)  आपको बता दें की इसी दिन महर्षि व्यास का जन्म भी हुवा था . और  ये आषाढ़ महीने में आती है . इस मंदिर में बच्चो के शिक्षा ग्रहण करने के लिए जो चौथा  और अंतिम दिन है वो है श्रावण पौर्णिमा (राखी पौर्णिमा) साल के यही  चार दिन बच्चों की शिक्षा के लिए शुभ माने जाते हैं .
इस मंदिर के साथ ही देवी सरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली के मंदीर भी है. साल के चार दिन इस  मंदिर में बच्चों के शिक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इन्ही दिनों में बसरा के इस मंदिर में काफी भीड़ देखने को मिलती है .

वसंत पंचमी, विजयादशमी, व्यास पौर्णिमा और श्रावण पौर्णिमा यही साल के चार दिन है जिस दिन बच्चो को इस मंदिर में लाया जाता है और पूरी विधि होने के बाद ही बच्चो की शिक्षा शुरू की जाती है।

आज हमने आपको बसरा देवी के मंदिर के बारें में बताया . जैसे ये बसरा देवी के मंदिर कहा स्थित है , इस मंदिर का इतिहास क्या  है , ये मंदिर क्यों प्रसिद्ध है.

हम आशा करते है आज हमने आपको जो भी जानकारी दी वो जानकारी आपको पसंद आई होगी . आज आपने जो भी जानकारी हासिल की उन जानकारियों को अपने तक ही सिमित नहीं रखे बल्कि उन जानकारियों जो दुसरों तक भी पहुचाएं .

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