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भारत की सबसे पवित्र नदी गंगा नदी का इतिहास

गंगा नदी का इतिहास
Written by Vinod Pant

दोस्तों क्या आप लोग जानतें है की  भारत की सबसे पवित्र नदी गंगा नदी का  इतिहास क्या है . क्या आप जानते है की गंगा नदी को भारत की सबसे पवित्र नदी क्यों कहा जाता है . क्या आप लोग जानते है की गंगा नदी का जन्म कैसे हुवा था . दोस्तों अगर आप इन सब के बारे में जानतें है  तो ये अच्छी बात है अगर आप इसके बारें में नहीं जानतें है तो कोइ बात नहीं . आज हम आपको भारत की सबसे पवित्र नदी गंगा नदी का इतिहास क्या है के बारें में बताएँगे .

गंगा नदी

गंगा नदी

गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र नदी है .  गंगा नदी को लोग गंगा माता”, “गंगा मैया” आदि नामों से पुकारते हैं. हमारे भारत वर्ष में गंगा नदी के प्रति लोगों  के मन न एक अटूट विश्वाश है  श्रद्धा है . गंगा नदी को लोग भगवान की तरह पूजते है . गंगा नदी के पवित्र जल को लोग अपने घर में रखते है . हर शुभ कार्य में इस पवित्र गंगा नदी के जल का प्रयोग किया जता है .

गंगा नदी  को लोग स्वर्ग की नदी मानतें है . और इस पवित्र नदी में नहाकर लोग अपने पापो को धोते है . ऐसा माना भी जाता है को गंगा नदी में स्नान करने से सारे पाप धुल जातें हैं .गंगा नदी को भारत की सबसे बड़ी नदियों में से एक माना जाता है .

दोस्तों गंगा नदी का इतिहास बहुत पुराना है और इससे कुछ पौराणिक कथाएँ भी जुडी है . तो आईये दोस्तों  अब हम आपको गंगा नदी के इतिहास के बारें में विस्तार से बतातें है

भारत की सबसे पवित्र नदी “गंगा”  का इतिहास –

गंगा नदी का इतिहास

 

हिन्दू शास्त्र में गंगा को सबसे पवित्र नदी का दर्जा दिया गया है। साथ ही बहुत से भारतीय लोग इस नदी को जीवन रेखा भी मानते है, जो उनकी दैनिक जरूरतों को दूर करती है. गंगा नदी के जन्म से  से जुडी अनेक पौराणिक कहानियां कथाएँ भी है जिसमें एक हम आपको बता रहें है .

कैसे हुआ गंगा का जन्म {राजा बलि की कहानी}-

दोस्तों इस कथा के अनुसार भारत वर्ष में एक राजा हुए थे जिनका नाम था बलि . राजा बलि बहुत शक्तिशाली होने के  साथ साथ भगवान् विष्णु के परम भक्त थे . एक बार राजा बलि ने देवताओं के राजा इंद्र युद्ध के लिए ललकारा था . परन्तु राजा बलि की विशाल सेना को देखकर राजा इंद्र भयभीत हो गए थे . देवराज इंद्र के मन में ये भय था की कई राजा बलि उनसे उनका सारा साज पाठ न छीन ले. और  सबी सोच कर देवराज इंद्र भगवान् विष्णु के पास मदद के  लिए गए थे . और इसी कारण से भगवान विष्णु एक वामन ब्राह्मण का वेश बनाकर राजा बलि के पास गए थे  और राजा बलि से दान माँगा था . यद्यपि राजा बलि जानते थे की  ब्राह्मण के वेश में उनके सामने स्वयं भगवान् विष्णु थे . लकिन राजा बलि किसी भी ब्राह्मण को अपने द्वार  से  खाली साथ नहीं जाने देता था  और वह भगवान विष्णु का परम भक्त भी था . जब राजा बलि ने भगवान विष्णु से दान मांगने को कहा तो भगवान् विष्णु ने राजा बलि से सिर्फ तीन कदम जमीन मांगी थी .  जब भगवान ने राजा बलि से तीन कदम जमीं मांगने को कहा तो . भगवन ने अपने एक पैर से स्वर्ग लोक और एक पैर से पाताल लोक को नाव लिया था . इसके बाद भगवान ने रजा बलि से कहा की मैने दो कदम जमीं नाप ली है अब में अपना तीसरा कदम कहा रखे तब राजा बलि ने कहा था की आप तीसरा पाँव मेरे सर पर रख दें . जैसे ही भगवान ने अपना पैर राजा बलि के सर पर रखा . वैसे ही भगवान का पाँव पाताल लोक में चला गया था  जहाँ असुरों का शाशन था . जब भगवान ने आकाश को मापने के लिए अपने पाँव आकाश के लिए बडाये थे उस समय आकाश में ब्रह्मा जी ने  भगवान के पैर धुलाये थे और सारा जल कमंडल में एकत्रित कर   लिया था और उस जल को गंगा का नाम दिया था . इसलिए गंगा को ब्रह्मा की पुत्री भी कहा जाता है .

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गंगा नदी कैसे आईं धरती पर

रघु कुल में बहुत ही प्रतापी राजाओं ने जन्म लिया था . और इम्ही राजाओं में से एक राजा थे सागर . राजा सागर ने अपना राज्य बढाने के लिए अश्व मेघ यज्ञ किया था . अश्व मेघ यज्ञ में एक घोडा छोड़ा जाता था और ये घोडा जिस राज्य से होकर गुजरता था वो राज्य अश्व मेघ यज्ञ करने वाले राजा का हो जाता था . और इस घोड़े को बीच में जिस ने पकड़ लिया उसे राजा से युद्ध करना पड़ता था .

इसी प्रकार जब एक बार राजा सागर ने अश्व मेघ यज्ञ  किया था .और यज्ञ का  घोडा जंगल में छोड़ दिया था . लेकिन जब इस बात का पता राजा इंद्र को चला तो  रजा इंद्र को डर हो गया की कही ये घोड़ा स्वर्ग में आ गया तो स्वर्ग का सारा राज -पाठ उनसे छीन जाएगा . इसी भय के कारण राजा इंद्र ने घोड़े को पकड़ लिया और कपिल मुनि के आश्रम में बाध दिया था .  जब रजा को पता चला के युद्ध का घोडा किसी ने रोक लिया है तो रजा ने गुस्सा में आकर अपने साठ हजार पुत्रों को  भेज दिया की घोडा किसने रोका है .

जब बहुत खोजने के बाद राजा के पुत्रो ने घोड़े को कपिल मुनि के आश्रम में देख लिया . तो वो घोड़े को लेने के लिए मुनि के आश्रम में घुस गए और मुनि पर झूठा आरोप लगा दिया  की आपने घोड़े को आश्रम में बाधां है . झूठा आरोप लगने पर मुनि को गुस्सा आ गया और उन्होंने राजा के साठ हजार पुत्रो को जला कर भस्म कर दिया. अब राजा के साठ हजार पुत्र योनियों में भटकने लगे . और उनकी आत्मा को शांति नहीं मिली .

इसके बाद कई वर्षो में रघुकुल में एक राजा जिनका नाम भगीरथ था का जन्म हुवा.  और राजा भगीरथ ने ये प्रतिज्ञा कर ली की वो अपने पूर्वजों की आत्मा को शांति दिलाएंगे . लेकिन इसके लिए ये जरुरी था की पूर्वजों की अस्थियों को गंगा के पवित्र जल से सुद्ध किया जाए . राजा भगीरथ ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने की लिए कई वर्षो तक भगवान् विष्णु की घोर तपश्या की और जब भगवन विष्णु ने भगीरथ को दर्शन दिए तो तब भगीरथ ने भगवान् विष्णु से गंगा को धरती पर लाने की  प्राथना की थी . लेकिन इसमें एक समस्या थी की अगर   गंगा अपने वेग से स्वर्ग से धरती पर उतर आए तो धरती पाताल में समा जाती और चारों तरफ तूफान आ जाता.

तब भगवान विष्णु ने शिव जी से प्रार्थना की कि वह गंगा को अपनी जटा में बांधकर उसे अपने वश में करें अन्यथा धरती का विनाश हो जाएगा| फिर जब गंगा अपने प्रचण्ड वेग से धरती पर उतरीं तो भयंकर गर्जना हुआ, मेघ फट गए चारों तरफ तूफान जैसा छा गया| तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटा में बांधा और अपनी जटा से एक पतली धार के रूप में गंगा को धरती पर जाने दिया| इस तरह गंगा धरती पर अवतरित हुईं और उन्हें भागीरथी भी कहा जाता है|

गंगा नदी एक पवित्र नदी

हिन्दू शास्त्र में गंगा नदी को एक पवित्र नदी मन गया है . आपको बता दें की भारत में गंगा की पूजा देवी रूप में की जाती है साथ ही ऐतिहासिक रूप में में भी इस नदी का काफी महत्व है . क्योकि बहुत से राज्यों की राजधानी इसके तट पर बनी हुई है, जैसे की करा, कन्नौज, अलाहाबाद, कपिल्या, काशी, प्रयाग, हाजीपुर, पाटलिपुत्र, पटना, मुर्शिदाबाद, मुंगेर, बहरामपुर, भागलपुर, सप्तग्राम, नाबद्विप, ढाका और कोलकाता इत्यादि.

गंगा नदी का उद्गम स्थल 

गंगा नदी का उद्गम स्थल

गंगा नदी हिमालय में गौ मुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद(GURUKUL) से निकलती हैं. गंगा नदी के इस उद्गम स्थल की ऊँचाई 3140 मीटर है .इस स्थान पर गंगा नदी को समर्पित एक मंदिर भी है . जिस हिमनद से गंगा नदी निकलती है उस हिमनद का मुख 3812 मीटर की ऊँचाई पर है . ये हिमनद 25 किलो मीटर लम्बा और 4 किलो मीटर चौड़ा व 40 मीटर लम्बा है . इसी ग्लेशियर के  एक छोटे से मुख भागीरथी नदी भी  निकलती है .इसका जल स्रोत 5000 मीटर ऊँचाई  पर स्थित एक घाटी है . आपको बता दें की गौमुख  के रास्तें में एक ग्राम है जिसका नाम है चिरबासा  और इस ग्राम के उचाई करीब 3600 मीटर है . इसी स्थान से विशाल गौमुख हिमनद के दर्शन होते हैं. इस हिमनद में नन्दा देवी, कामत पर्वत एवं त्रिशूल पर्वत का हिम पिघल कर आता है.

गंगा का मैदान

गंगा नदी का मैदान

गंगा नदी हरिद्वार से लगभग 800 किलोमीटर की मैदानी यात्रा करते  हुए गढ़मुक्तेश्वर, सोरों,  फर्रुखाबाद,  कन्नौज,  बिठूर, कानपुर होते हुए गंगा इलाहाबाद (प्रयाग) पहुँचती है. प्रयाग में गंगा नदी का संगम यमुना नदी से होता है . गंगा और यमुना नदी का ये पवित्र संगम स्थल हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है .  और इसे तीर्थ राज प्रयाग कहा जाता है . इसके बाद गंगा नदी मोक्षदायिनी नगरी काशी (वाराणसी) में एक वक्र लेती है . इसी कारण गंगा नदी को यहाँ उत्तरवाहिनी कहा जाता है . और यहाँ से गंगा  नदी मिर्जापुर , पटना ,भागलपुर होते हुए अंत में बंगाल की खाड़ी में गिरती है .

सुंदरवन डेल्टा

सुन्दर वन डेल्टा

सुदर वन डेल्टा गंगा नदी और उसके सहायक नदियों द्वारा लायी गयी नवीनतम  जालोढ़ से 1000 वर्षो से निर्मित एक समतल तथा निम्न मैदान है . यही पर बंगाल की खाड़ी और गंगा नदी के संगम पर एक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ स्थल है . जिसे गंगा सागर – संगम कहा जाता है . विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा(सुन्दरवन) बहुत-सी प्रसिद्ध वनस्पतियों और प्रसिद्ध बंगाल टाईगर का निवास स्थान है.

गंगा नदी की सहायक नदियाँ

गंगा नदी की सहायक नदिया

गंगा में उत्तर की ओर से आकर मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियाँ यमुना, रामगंगा, करनाली (घाघरा), ताप्ती, गंडक, कोसी और काक्षी हैं तथा दक्षिण के पठार से आकर इसमें मिलने वाली प्रमुख नदियाँ चम्बल, सोन, बेतवा, केन, दक्षिणी टोस आदि हैं. इन नदियों में गंगा नदी की जो सबसे सहायक नदी है वो यमुना नदी है . और ये जो हिमालय की बन्दरपूँछ चोटी के आधार पर यमुनोत्री हिमखण्ड से निकली है. हिमालय के ऊपरी भाग में इसमें टोंस तथा बाद में लघु हिमालय में आने पर इसमें गिरि और आसन नदियाँ मिलती हैं। चम्बल, बेतवा, शारदा और केन यमुना की सहायक नदियाँ हैं। चम्बल इटावा के पास तथा बेतवा हमीरपुर के पास यमुना में मिलती हैं. यमुना नदी इलाबाद के निकट  बायीं ओर से आकर गंगा नदी में मिलती है .और इस प्रकार ये नदिया बहती हुयी अंत में बंगाल के खाड़ी में गिरती है .

गंगा नदी पर निर्भर जीव -जन्तु

हमें ऐतिहासिक साक्षों से ज्ञात हो जाता है की 16 वी तथा 17 वी शताब्दी तक गंगा – यमुना प्रदेश घने वनों से ढका हुवा था .   था और इन वनों में जंगली हाथी, भैंस, गेंडा, शेर, बाघतथा गवल का शिकार होता था. आपको बता  दें की गंगा का तटवर्ती क्षेत्र अपने शांत व अनुकूल वातावरण के कारण रंग – बिरंगे पक्षियों का संसार अपने आचल में संजोए  हुवा है . इनमें प्रमुख रूप से  मछलियों की 140 प्रजातियाँ,35रीसृप तथा इसके तट पर 42 स्तनधारी प्रजातियाँ पायी जाती हैं. आपको बता दें की यहाँ की उत्कृष्ट पारिस्थितिकी संरचना में कई प्रजाति के वन्य जीवों जैसे-  नीलगाय, साम्भर, खरगोश, नेवला, चिंकारा के साथ सरीसृप वर्ग के जीव-जन्तुओं को भी आश्रय मिला हुआ है. इसके अलावा इस क्षेत्र में कई ऐसे जीव – जंतु की प्रजातीयाँ भी है जो दुर्लभ होने के कारण संरक्षित घोषित की जा चुकी है . गंगा के पर्वतीय किनारों पर लंगूर, लाल बंदर, भूरे भालू, लोमड़ी, चीते, बर्फीले चीते, हिरण, भौंकने वाले हिरण, साम्भर, कस्तूरी मृग, सेरो, बरड़ मृग, साही, तहर आदि काफ़ी संख्या में मिलते हैं. विभिन्न रंगों की तितलियाँ तथा कीट भी यहाँ पाये जाते हैं.

गंगा नदी आर्थिक महत्त्व

गंगा नदी का आर्थिक महत्त्व

गंगा नदी अपनी घाटियों में  भारत और बांग्लादेश के कृषि आधारित अर्थ में भारी सहयोग तो करती ही है, साथ ही गंगा नदी अपनी सहायक नदियों सहित एक बहुत बड़े क्षेत्र के लिए सिचाई का बारहमास स्रोत भी है . आपको बता दें की  इन क्षेत्रो में जो फसल प्रमुख रूप से उगाई जाती है वो फसल धान, आलू, गन्ना, दाल, तिलहन, एवम्   गेहूँ हैं  जो आज की भारत की कृषि का महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं. गंगा के तटीय क्षेत्रों में दलदल तथा झीलों के कारण यहाँ लेग्यूम, मिर्च, सरसो, तिल, गन्ना और जूट की बहुतायत फसल होती है। नदी में मत्स्य उद्योग भी बहुत जोरों पर चलता है। गंगा नदी प्रणाली भारत की सबसे बड़ी नदी प्रणाली है; इसमें लगभग ३७५ मत्स्य प्रजातियाँ उपलब्ध हैं.

गंगा नदी का धार्मिक महत्त्व

गंगा नदी का आर्थिक महत्त्व

भारत में गंगा नदी को अनेक अवधारणाओ के कारण देवी के रूप में भी पूजा जाता है . बहुत से तीर्थ स्थल गंगा नदी के तट पर बसे हैं . इनमें प्रमुख रूप से वाराणसी और हरिद्वार है . भारत की सभी नदियों में गंगा नदी को सबसे पवित्र मान जाता है . ऐसा माना जाता है की गंगा नदी में स्नान करने से सारे पाप धुल जातें है . मरने के बाद मनुष्य की अस्थियो को लोग गंगा नदी में विसर्जित करते है  मोक्ष प्राप्ति के लिए .यहाँ तक कि कुछ लोग गंगा के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा भी रखते हैं. इसके घाटों पर लोग पूजा अर्चना करते हैं और ध्यान लगाते हैं। गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में गंगा जल  होना आवश्यक है .पंचामृत में भी गंगाजल को एक अमृत माना गया है.

गंगा नदी पर निर्मित बांध एवम् नदी परियोजनाएँ

गंगा नदी में बाध परियोजना

गंगा नदी पर निर्मित बांध अनेक भारतीय जन – जीवन तथा अर्थवयवस्था का महत्वपूर्ण अंग है . इन बांधो में प्रमुख रूप से फ़रक्का बांध, टिहरी बांध, तथा भीमगोडा बांध है . फ़रक्का बांध (बैराज) भारत के पश्चिम बंगाल प्रान्त में स्थित गंगा नदी पर बनाया गया है. इस बांध का निर्माण कोलकाता बंदरगाह को गाद (सिल्ट) से मुक्त कराने के लिए किया गया था जो कि1950 से 1960 तक इस बंदरगाह की प्रमुख समस्या थी.

कुम्भ मेला

कुम्भ मेला

Kumbh Mela – the world’s largest religious gathering

कुम्भ मेला एक विशाल हिन्दू तीर्थ यात्रा है . ये कुम्भ मेला गंगा नदी के तट पर लगता है . इस मेले में सभी हिन्दू गंगा नदी के तट पर एकत्रित होते है . आपको बता दें की कुम्भ मेला हर 3 वर्ष में एक बार लगता है . अर्ध कुम्भ मेला हर छः साल में एक बार प्रयाग और हरिद्वार में मनाया जाता है और पूर्ण कुम्भ मेला हर 12 साल में एक बार चार जगहों (उज्जैन, नाशिक, और प्रयाग (अलाहाबाद), हरिद्वार,) पर मनाया जाता है। महा कुम्भ मेला जो 12 या 144 साल में एक बार आता है, उसे अलाहाबाद में आयोजित किया जाता है।गंगा नदी के तट पर अनेक बहुत से उत्सव और त्योहारों का आयोजन किया जाता है . जिसमें मुख्य रूप से धार्मिक गीतों के गायन से लेकर बहुत से औषधि कैम्प तक शामिल है . इस सभी तीर्थ यात्राओ में कुम्भ मेले को यात्रा सबसे महत्त्व पूर्ण मानी जाती है . और और इसमें देश के हर कोने से करोड़ो लोग आते है .इस मेले में देश के कोने-कोने से सभी साधू भगवे वस्त्र धारण कर आते है और साथ ही नागा सन्यासी भी इस मेले में आते है। कहा जाता है की नागा साधू अपने शरीर पर किसी प्रकार का कोई भी वस्त्र धारण नही करते.

गंगा नदी एक प्रदूषित नदी

जहाँ गंगा नदी एक पवित्र नदी है वही  इस नदी को एक प्रदूषित नदी का नाम भी दिया गया है . सन 2007 में गंगा नदी को प्रदूषित नदियों के श्रेणी में पाँचवा स्थान दिया गया है . आपको बता दें की प्रदुषण की वजह से केवल मनुष्यों ही नहीं बल्कि 140 मछलियों की प्रजातियों और 90 उभयचरो की प्रजातियों को क्षति पहुचती है.

आपको बता दें की मनुष्यों द्वारा फेके गए कचरे से गंगा नदी  में उत्पन फेकल कॉलिफोर्म की मात्रा भारत सरकार की अधिकारिक उच्चतम मात्रा से 100 गुना ज्यादा है. गंगा के महत्त्व को देखते हुए दी गंगा एक्शन प्लान का निर्माण भी किया गया, जिससे इस नदी को साफ रखा जा सके और इसकी सफाई की जा सके। लेकिन भ्रष्टाचारी और कामचोर लोगो की वजह से यह योजना भी असफल रही और दिन-दिन नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ता चला जा रहा है.

एक वैज्ञानिक सर्वे के अनुसार गंगा नदी का बायोलॉजिकल ऑक्सीजन स्तर3 डिग्री (सामान्य) से बढकर 6 डिग्री हो चुका है आपको बता दें की गंगा नदी में प्रतिदिन 2 करोड़ 10 लाख लीटर कचरा प्रतिदिन गिर रहा है . विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार उत्तरप्रदेश की 12% बीमारियों की वजह गंगा जल है आज के समय में ये एक चिंता  का विषय बना हुवा है की गंगा नदी का जल  न स्नान के योग्य रहा, न पीने के योग्य रहा और न ही सिंचाई के योग्य. गंगा नदी  में इस बड़ते प्रदूषण को रोकने के लिए घड़ियालो की मदद ली जा रही है . शहरों में कचड़े को साफ करने के लिए सयंत्रो को लगाया जा रहा है .उद्योगों के कचरे को इसमें गिरने से रोकने के लिए कानून बनायें गए है . इस पुरे क्रम में गंगा नदी को एक राष्ट्री धरोहर के रूप में भी घोषित कर दिया गया है . इसके साथ ही गंगा एक्शन प्लान व राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना लागू की गयी हैं लकिन इसके बावजूद भी गंगा नदी की   सफलता पर प्रश्नचिह्न भी लगाये जाते रहे हैं. और आने वाले समय में भी गंगा नदी के अस्तित्व पर संकट के बादल छाये हुए है .

नमामि गंगे-

गंगा नदी की सफाई के लिए पहले भी कई बार पहल की गयी है लेकिन कोइ भी अभी तक संतोष जनक स्तिथि तक नहीं पहुँच पाया है . भारत के प्रधानमंत्री बन्ने के बाद नरेंद्र मोदी ने गंगा नदी में हो रहे प्रदूषण को रोकने और गंगा नदी की सफाई के लिए अभियान चलाया . नरेंद्र मोदी ने 2014 में भारत के आम बजट में नमामि गंगा नामक एक परियोजना शुरू की . इस परियोजना के हिस्से के रूप में भारत सरकार ने गंगा के किनारे 48 औद्योगिक इकाइयों को बन्द करने के आदेश दिए है .

आज हमने आपको भारत के सबसे पवित्र नदी गंगा नदी का क्या है के बारें में अनेक महत्वपूर्ण बातें बताई . जैसे गंगा नदी का इतिहास, गंगा नदी एक पवित्र नदी , गंगा नदी भारत पर कैसे आई , गंगा नदी का उद्गम स्थल , आदि

हम आशा करते है की आज  हमने आपको जो भी जानकारी दी वो जानकारी आपको पसदं आई होगी , आज आपने जो भी जानकारियाँ हासिल की उसे आप अपने तक ही सिमित नहीं रखे बल्कि उसे दूसरों तक भी पहुचाएं . जिससे दुसरें लोग भी भारत की पवित्र नदी गंगा नदी का इतिहास क्या है के बारें में जान सके .

 

 

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Vinod Pant

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