इतिहास

भारत के महान वैज्ञानिक , जिन्होंने विश्व में हिन्दुस्तान का परचम फहराया | Great Indian Scientists Biographies in Hindi

Written by Jagdish Pant

जगदीश चन्द्र बसु (Jagdish Chandra Basu)

जगदीश चन्द्र बासु का जन्म 30 नवम्बर 1858 को मयरागंज में हुआ था वर्तमान में मयरागंज बांग्लादेश में है सन 1984 में कोलकता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में व्याख्याता के रूप में चयन हुआ परन्तु उनका वेतन यूरोपीयन व्याख्याताओ की तुलना में आधी थी जगदीश चन्द्र बसु ने पद तो स्वीकार कर लिया था लेकिन वेतन स्वीकार नही किया जगदीश चन्द्र बोस ने तीन वर्षो तक अपनी प्रखर बुद्धि का लोहा मनाया इसके बाद उन्हें पूरा वेतन दिया गया| 10 मई 1901 को रॉयल सोसाइटी के वैज्ञानिकों के सामने सिद्ध किया की पौधों में भी जीवन होता है
जगदीश चन्द्र बसु (Jagdish Chandra Basu)

बेतार का अर्थ-

(बेतार का अर्थ बिना किसी तार के सूचना सन्केतों के स्थानान्तरण से है। सूचना प्रौद्योगिकी के आने से पहले बेतार का अर्थ रेडियो था आज के समय बेतार का प्रयोग बहुत से स्थानों में किया जाता है)
सबसे पहले बेतार के तार का आविष्कार जगदीश चन्द्र बसु ने किया लेकिन एक साल बाद इसका श्रेय मार्कोनी को मिल गया सबसे पहले माइक्रो\वेव का आविष्कार भी जगदीश चन्द्र बसु ने किया जगदीश चन्द्र बोस द्वारा बनाये गए उपकरणों का आविष्कार आज भी किया जाता है उनका सर्वोत्तम अविष्कार “केस्कोग्राफ” नामक यंत्र है यह यंत्र पेड़ पौधों की बढ़त को नापता है 23 जनवरी 1937 को जगदीश चन्द्र बसु का देहांत हो गया था
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प्रफुल्ल चंद राय-

प्रफुल्ल चंद राय का जन्म 2 अगस्त 1861 को राउली काटीपुरा में हुआ था जो वर्तमान में बंग्लादेश में है प्रफुल्ल चंद राय को संस्कृत, लेटिन, फ्रेंच तथा अंग्रेजी भाषा का बहुत ज्ञान था और साथ साथ वह राजनीती शास्त्र के महान विद्वान थे जब उन्होंने बेंजामिन फ्रेंकलिन की जीवनी पढ़ी तो उनका रुझान विज्ञान की और हो गया| 1888 में एडिनवरा से D.sc की परीक्षा पास करने के बाद वह कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्रवक्ता के रूप में काम करने लगे
प्रफुल्ल चंद राय
प्रफुल्ल चंद राय ने बंगाल केमिकल एंड फार्मास्यूटिकल वर्क्स (Bengal Chemical and Pharmaceutical Works) की स्थापना की प्रफुल्ल चंद राय को भारतीय रसायन उद्योग का जनक कहा जाता है प्रफुल्ल चंद राय की सबसे पहली खोज सोडा फास्पेट थी सोडा फास्पेट का प्रयोग दवाईयों बनाने के लिए किया जाता है मर्क्युर्स नाइट्रेट का अविष्कार भी प्रफुल्ल चंद ने की | प्रफुल्ल चंद ने सदा साधू का जीवन व्यतीत किया उन्होंने एक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी जिसका नाम “The History of Hindu Chemistry” था प्रफुल्ल चंद राय की मृत्यु 1944 में हुई थी

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितम्बर 1861 को मैसूर में हुआ था विश्वेश्वरैया ने सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की विश्वेश्वरैया ने खडक वासला बाँध में पानी को रोकने के लिए उन्होंने स्वचालित दरवाजो का निर्माण किया यह दरवाजे अधिक पानी होने पर स्वय खुल और बंद हो जाते थे विश्वेश्वरैया ने कृष्णार्जुन सागर बाँध के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया
बाद में वह मैसूर के चीफ इंजिनियर तथा बाद में दीवान के पद पर थे इसके बाद उन्होंने भारत सरकार के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए इसके बाद उन्हें भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न दिया गया 14 अप्रैल 1962 को 101 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया था
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डी.एन वाडिया

वाडिया का जन्म 25 अक्टूबर 1883 को गुजरात के सुरत शहर में हुआ था उन्होंने बडौदा कॉलेज से M.sc पास किया बाद में Prince of Wales College में नौकरी करने लगे इसके बाद उन्हें हिमालय के शिलाखंडो में रूचि पैदा हो गई
डी.एन वाडिया

श्रीनिवास रामानुजन

रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 को तमिलनाडु में हुआ था उन्होंने 13 साल की उम्र में लोनी की त्रिकोणमिति पुस्तक मिली शीघ्र ही उन्होंने इस पुस्तक के कठिन से कठिन प्रश्नों को हर कर डाला इसके बाद उन्होंने स्नातक की परीक्षा में प्रथम अंक प्राप्त किए
श्रीनिवास रामानुजन

चंद्रशेखर वेंकटरमन (C.V. Raman)

चन्द्रशेखर का जन्म 07 नवम्बर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था चन्द्रशेखर की प्रारम्भिक शिक्षा विशाखापत्तनम में हुई थी “रमन प्रभाव” नामक शोध के लिए इन्हें 1930 में नोबेल पुरुस्कार दिया गया था उन्होंने 1945 में बंगलौर में Raman Research Institute की स्थापना की | 21 नवम्बर 1970 को उनकी मृत्यु हो गई थी
चंद्रशेखर वेंकटरमन (C.V. Raman)

बीरबल साहनी

बीरबल साहनी का जन्म 14 नवम्बर 1891 को पंजाब में हुआ था उन्होंने 1919 में लन्दन विश्वविद्यालय से D.sc की डिग्री प्राप्त की बाद में उन्होंने 1929 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से D.sc की उपाधि पाने वाले प्रथम भारतीय बने| बाद में उन्होंने बिहार में अनेक पौधों की खोज की 1936 में उन्होंने रोहतक में पुराने सिक्को की खोज की
बीरबल साहनी

मेघनाद साहा

मेघनाद साहा का जन्म 6 अक्टूबर 1893 को ढाका में हुआ था मेघनाद साहा बचपन से ही देशभक्ति का जज्बा था जिसके कारण उन्होंने ब्रिटिश स्कूलों का बहिष्कार किया हाईस्कूल पास करने के बाद उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता में दाखिला लिया जहाँ उन्हें जगदीश चन्द्र बोस तथा प्रफूल्ल चंद राय जैसे अध्यापक मिले
मेघनाद साहा
उन्होंने 1948 में कोलकाता में Saha Institute of Nuclear Physics की स्थापना की इसके अतरिक्त उन्होंने दामोदर घाटी , भाखड़ा नांगल तथा हीराकुंड परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई| 1962 में वह लोकसभा सदस्य चुने गए 16 फरवरी 1966 को उनका देहांत हो गया था

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको भारत के महान वैज्ञानिक , जिन्होंने विश्व में हिन्दुस्तान का परचम फहराया | Great Indian Scientists Biographies in Hindi तो आपको भारत के महान वैज्ञानिको के बारे में अधिक से अधिक जानकरी मिली होगी

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