इतिहास

महावीर स्वामी और जैन धर्म का इतिहास

महावीर स्वामी और जैन धर्म का इतिहास
Written by Vinod Pant

महावीर स्वामी जिन्हें , वर्धमान के नाम से भी जाना जाता है , वो जैन धर्म के 24 वे और अंतिम तीर्थकर थे | जैन धर्म में तीर्थकर को एक सर्वज्ञानी गुरु माना जाता है जो धर्म का पाठ पढाता है तथा  पुनर्जन्म और स्थानांतर, गमन के बीच पुल का निर्माण करता है |

महावीर स्वामी का जन्म एक शाही परिवार में हुआ था , लेकिन बाद में महावीर स्वामी ने आध्यात्म की तलाश  में घर छोड़ दिया और साधू बन गए |

साधू बन जाने  के बाद महावीर स्वामी ने कई वर्षों की कठोर तपस्या की और इसी कठोर तपस्या के बाद महावीर स्वामी सर्वज्ञानी बने | महावीर स्वामी ने पूरे भारत में जैन धर्मों के सिद्धांतो को फैलाया था |

महावीर स्वामी का जन्म और प्रारंभिक जीवन -(Birth and Early Life of Mahavira Swami)

महावीर स्वामी का जन्म और प्रारंभिक जीवन

महावीर स्वामी का जन्म एक राजसी क्षत्रिय परिवार में हुआ था | इनकी माता का नाम त्रिशला और  पिता का नाम सिद्धार्थ  था | ऐसा माना जाता है की महावीर स्वामी का जन्म  वीर निर्वाण संवत  पंचांग के अनुसार चढ़ते चन्द्रमा के 13वे दिन हुआ था और ग्रेगोरियन पंचाग के अनुसार यह दिनांक मार्च या अप्रैल में पड़ती है , इस दिन को महावीर जयंती की रूप में मनाया जाता है | महावीर स्वामी का गोत्र कश्यप था | वैशाली के पुराने शहर कुंडलपुरा को उनका जन्म स्थान बताया जाता है |

एक राजा के पुत्र होते हुए महावीर स्वामी ने सारे सुख और वैभव का आनंद लिया | इनके माता -पिता पार्श्वनाथ के  सख्त अनुयायी थे | जैन परम्परा महावीर स्वामी के  वैवाहिक जीवन के बारे में सर्वसम्मत नही है |

दिगम्बर परम्परा के अनुसार महावीर के पिता की इच्छा थी कि उनकी शादी यशोदा से हो लेकिन उन्होंने मना कर दिया| श्वेताम्बर परम्परा के अनुसार उन्होंने यशोदा से विवाह किया था और उनके एक पुत्री भी थी जिसका नाम प्रियदर्शना था |

 महावीर स्वामी का सन्यास और सर्वज्ञता का ज्ञान(Renunciation and Omniscience of Mahavira Swami)

महावीर स्वामी का सन्यास और सर्वज्ञता का ज्ञान

30 वर्ष आयु में महावीर स्वामी ने सारे धन और वैभव को छोड़कर घर का त्याग कर दिया था | महावीर स्वामी घर छोड़ने के बाद आध्यात्मिक जागृति की खोज में तपस्वी जीवन बिताने लगे | वो कुंडलपुर के निकट संदावन नामक एक बाग़ में गये | वहाँ  पर उन्होंने बिना कपड़ो के अशोक के पेड़ के नीचे कठोर तपस्या की |

आचारंग सूत्र में उनके कठिनाइयों और अपमान को दर्शाया गया है | बंगाल के पूर्वी भाग में वो बड़ी पीड़ाओं से गुजरे | बच्चो ने उन पर पत्थर फेंके और अक्सर लोगो ने उनको अपमानित किया | कल्प सूत्र के अनुसार अस्तिग्राम , चम्पापुरी,प्रस्तिचम्पा, वैशाली ,वाणीजग्रम , नालंदा ,मिथिला ,भद्रिका ,अलाभिका ,पनिताभूमि ,श्रस्व्ती और पवनपुरी में उन्होंने अपने तपस्वी जीवन के 42 मानसून गुजारे

12 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद महावीर स्वामी को मात्र जन्म की अवस्था प्राप्त हुई , जिसका अर्थ है अलगाव – एकीकरण का ज्ञान |  इस ज्ञान को प्राप्त करने के बाद महावीर स्वामी को  सर्वज्ञता का तात्पर्य का ज्ञान हुआ और बौधिक ज्ञान से छुटकारा मिला |  महावीर स्वामी को इस ज्ञान की प्राप्ति  रजुप्लिका नदी के तट पर एक साल के पेड़ के नीचे हुई थी |

महावीर स्वामी के सारे ज्ञान और खूबियों की जानकारी हमें सूत्रक्रितंग में प्राप्त हो जाती | अपने जीवन में 30 साल की अवस्था में सर्वज्ञता का ज्ञान प्राप्त करने के बाद महावीर स्वामी भारत के अनेक देशों में घूमें और वहां महावीर स्वामी ने  लोगों को दर्शनशास्त्र का ज्ञान देना प्रारंभ कर दिया | एक परम्परा के अनुसार 14,000 योगी , 36,000 मठवासिनी, 159,000 श्रावक और  318,000 श्राविका महावीर स्वामी के अनुयायी बने , इतना ही नहीं कुछ शाही परिवार भी महावीर स्वामी के अनुयायी बने |

शिवाजी की जीवनी और इतिहास(shivaji maharaaj Histery in Hindi)

छत्रपति संभाजी महराजा का इतिहास ( CHATRAPATI SAMBHJI MAHARAJ HISTORY IN HINDI )

अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास | Alauddin Khilji History In Hindi

रानी पद्मावती का इतिहास | Rani Padmini History in Hindi

महावीर स्वामी का मोक्ष(Moksha of Mahavira Swami) –

जैन गर्न्थों से हमें ये जानकारी प्राप्त होती है की महावीर स्वामी की आत्मा सिद्ध हो गयी थी और इसी कारण से महावीर स्वामी को मोक्ष भी प्राप्त हो गया था | जिस दिन महावीर स्वामी ने मोक्ष प्राप्त किया था , उस दिन महावीर स्वामी के एक अनुयायी गांधार ने भी जन्म लिया था | मह्पुरान  से हमें ये जानकारी पाप्त होती है की तीर्थकरों के निर्वाण के बाद देवताओं ने उनका अंतिम संस्कार किया था | एक अन्य ग्रन्थ से ये जानकारी भी प्राप्त होती है की निर्वाण के बाद तीर्थकरों के केवल नाख़ून और बाल बच गए थे और बाकी का शारीर हवा में मिल गया था |  महावीर को अधिकतर चित्रों में शेर के चिन्ह के साथ ध्यान मुद्रा में दर्शाया गया है | जिस जगह पर महावीर स्वामी ने मोक्ष प्राप्त किया था वहां पर जल मंदिर के नाम से एक जैन  मंदिर भी बनाया गया है |

महावीर स्वामी के पिछले अवतार -(Past-Incarnation of Mahavira Swami)

महावीर स्वामी जैनधर्म के 24 वें और अंतिम तीर्थकर थे | महावीर स्वामी ने भारत में एक बहुमुखी व्यक्तित्व का विकाश किया था | महावीर स्वामी की आत्मा  की सारी शक्तियां और गुण जाग्रत थे |

ऐसा माना जाता है की महावीर स्वामी के पास अनंत शक्ति के अलावा अनंत करुणा भी थी | आत्मा की इन्ही असीम शक्तियों के कारण  महावीर स्वामी एक पूर्ण विकसित और मिश्रित इंसान बने |

महावीर स्वामी के उपदेश –

महावीर स्वामी के उपदेश -

महावीर स्वामी कहा करते थे कि जो भी व्यक्ति जैन निर्वाण को प्राप्त  करना चाहते है उसे अपे स्वयं के आचरण और ज्ञान तथा विश्वास को सुद्ध करना चाहिए , इसी के साथ पाँच प्रतिज्ञाओं का पालन भी करना चाहिए | जैन धर्म में तप को बहुत महत्व दिया जाता है |

जैन धर्म के अनुसार कोइ भी व्यक्ति बिना ध्यान, अनशन और तप किये  अन्दर से शुद्ध नहीं हो सकता | यदि वह स्वयं की आत्मा की मुक्ति चाहता है तो उसे ध्यान, अनशन और तप करना ही होगा |  महावीर ने पूर्ण अहिंसा पर जोर दिया और तब से ही “अहिंसा परमो धर्मः” जैन धर्म में एक प्रधान सिद्धांत माना जाने लगा |

अंतिम राय – 

आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से  महावीर स्वामी और जैन धर्म का इतिहास के बारें में अनेक जानकारी देने का प्रयास किया |

हम आशा करते है की आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारियाँ दी वो जानकारियाँ आपको पसदं आई होगी | आज आपने इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारी हासिल की उसे आप अपने तक ही सिमित नहीं रखे बल्कि उसे दूसरों तक भी पहुचाएं , जिससे दुसरे लोग भी इसके बारें में जान सकें  |

About the author

Vinod Pant

Leave a Comment

%d bloggers like this: