जीवन परिचय

मीराबाई का जीवन परिचय (Meerabai Biography In Hindi)

मीराबाई का जीवन परिचय
Written by Jagdish Pant

दोस्तों आज हम आपको मीराबाई का जीवन परिचय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगें | मीराबाई कृष्ण-भक्ति शाखा की कवयित्री हैं। आज हम आपको मीराबाई के जीवन की प्रमुख बातें बताएंगे जैसे की मीराबाई की रचनाएँ और मीराबाई की मृत्यु के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास करेगें

मीराबाई का जीवन परिचय ( Meerabai Biography In Hindi)

मीराबाई का जीवन परिचय-  मीराबाई का जन्म 1498 ई में राजस्थान के मेवाड़ पास स्थित चौकड़ी ग्राम में हुआ था| मीराबाई के पिता का नाम रतन सिंह था मीराबाई रतन  सिंह की चौथे पुत्री थी मीराबाई बचपन से ही कृष्णभक्ति में लीन रहती  थी | मीराबाई की माता का नाम वीर कुमारी था

मीराबाई का विवाह मेवाड़ के सिसोदिया राज घराने में हुआ था मीराबाई के पति का नाम महाराणा कुंवर था महाराणा कुंवर मेवाड़ के महाराणा सांगा के पुत्र थे

विवाह के कुछ समय के बाद मीराबाई के पति का देहान्त हो गया था| मीराबाई को उनके पति के साथ सती करने का प्रयास किया गया लेकिन इसके लिए मीराबाई तैयार नही थी

पति के देहान्त के बाद मीराबाई अपना सारा समय साघु सन्त के साथ हरिकीर्तन करते हुए व्यीत करती थी | बाद में मीराबाई की भक्ति दिन प्रतिदिन बढाने लगी

इसके बाद मीराबाई कृष्ण मन्दिरों में जाने लगी| और वहा मौजूद कृष्णभक्तों के सामने नाचने लगती थी| लेकिन मीराबाई का नाचना और गाना राज परिवार को  बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था

एक दिन मीराबाई के परिवार वालों ने मीराबाई को विष देकर मारने की कोशिश की और इसके साथ मीराबाई के परिवार वाले उन्हें बहुत परेशान करते थे इसके बाद मीराबाई द्वारका और वृंदावन जाकर रहने लगी

वहा के लोग मीराबाई का बड़ा ही सम्मान करते थे| और उन्हें देवी के सामान मानते थे

इसके बाद मीराबाई का राजनैतिक समय बहुत ही खराब रहा| इसके बाद बाबर ने हिंदुस्तान पर हमला कर दिया था| बाद में बाबर ने राणा सांगा को पराजय कर दिया था तो आपको meerabai ka jeevan parichay के बारे में पता चला होगा

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मीराबाई की प्रमुख रचनाएँ

मीराबाई ने अपने जीवन में चार रचनाएँ की थी

  • नरसी का मायरा
  • गीत गोविंद टीका
  • राग गोविंद
  • राग सोरठ के पद
  • नहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो / मीराबाई
  • हरि तुम हरो जन की भीर / मीराबाई
  • नैना निपट बंकट छबि अटके / मीराबाई
  • मोती मूँगे उतार बनमाला पोई / मीराबाई
  • बादल देख डरी / मीराबाई
  • पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो / मीराबाई
  • पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे / मीराबाई
  • श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो / मीराबाई
  • तोसों लाग्यो नेह रे प्यारे, नागर नंद कुमार / मीराबाई
  • बरसै बदरिया सावन की / मीराबाई
  • हेरी म्हा दरद दिवाणौ / मीराबाई
  • मन रे पासि हरि के चरन / मीराबाई
  • प्रभु कब रे मिलोगे / मीराबाई
  • तुम बिन नैण दुखारा / मीराबाई
  • हरो जन की भीर / मीराबाई
  • म्हारो अरजी / मीराबाई
  • मेरो दरद न जाणै कोय / मीराबाई
  • राखौ कृपानिधान / मीराबाई
  • कोई कहियौ रे / मीराबाई
  • दूखण लागे नैन / मीराबाई
  • कल नाहिं पड़त जिस / मीराबाई
  • आय मिलौ मोहि / मीराबाई

भावपक्ष-

  • मीराबाई कृष्ण की परम भक्त थी| वह कृष्ण के कविताएँ और भजन गाति थी मीरा भक्तिकालीन कवयित्री थी
  • मीराबाई भी गोपियों की तरह कृष्ण को अपना पति मानती थी | और उनकी उपासना करती थी
  • मीराबाई के पदों में सहजता और आत्मसमर्पण का भाव सर्वत्र विद्यमान रहता  था

कलापक्ष-

  • मीराबाई अपने काव्य में अनेक भाषाओं का प्रयोग करती थी| कही शुद्ध ब्रजभाषा का प्रयोग करती हैं तो कहीं राजस्थानी भाषा का प्रयोग करती थी
  • मीराबाई को गुजरात की कवयित्री भी माना जाता हैं क्योंकि उनकी काव्य की भाषा में गुजराती की छवि देखने को मिलती थी
  • मीराबार्इ ने बड़े सहज और सरल शब्दों में अपनी प्रेम पीड़ा को कविता में व्यक्त किया है।

केन्द्रीय भाव-

मीराबाई के काव्य में  श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति देखने को मिलती थी  मीराबाई के  प्रेम में आपको वियोग और सयोग दोनों  पक्षों को  सुंदर अभिव्यक्ति  किया  हैं  मीराबाई ने लोक का भय अथवा परिवार की प्रताड़ना दोनों का ही वे दृढ़ता के साथ सामना करती  थी|

मीराबाई की मृत्यु

कुछ विद्वानों का मानना हैं की कुछ समय के लिए मीराबाई वृन्दावन  से द्वारिका रहने के लिए चली गई थी  जहाँ वह सन 1560 में वे भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के साथ समा गईं।

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको मीराबाई का जीवन परिचय (Meerabai Biography In Hindi)मीराबाई की रचनाएँ,भावपक्ष, कलापक्ष, मीराबाई की मृत्यु, के बारे में आपको महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया हैं

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