जीवन परिचय

राजा राममोहन राय का जीवन परिचय

राजा राममोहन राय का जीवन परिचय
Written by Jagdish Pant

दोस्तों आज हम आपको राजा राममोहन राय के बारे में बताने वाले है राजा राममोहन राय को भारतीय पुनः र्जागरण का अग्रदूत और आधुनिक भारत का जनक कहा जाता है। उन्होंने महिलाओं के लिए अनेक कार्य किए जैसे की सती प्रथा विरोध करना जैसे अनेक सामजिक कार्य किए आज हम आपको राजा राममोहन राय के बारे में कुछ रोचक बाते बताने वाले है

राजा राममोहन राय का जन्म

राजा राममोहन राय का जीवन परिचय

और परिवार (Raja Ram Mohan Roy: Birth and Family)

राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के हूगली जिले के राधानगर गॉव में हुआ था उनके पिता का नाम रामकन्तो रॉय और माता का नाम तैरिनी था उनका परिवार वैष्णव था जो की धर्म सम्बन्धित मामलों में बहुत कट्टर थे

राजा राममोहन राय का विवाह 9 साल की कम उम्र में कर दिया गया था लेकिन पहली पत्नी का जल्दी देहांत हो गया था इसके बाद 10 साल की उम्र में उन्होंने दूसरी शादी कर ली गई थी इस शादी से उन्हें दो पुत्र हुए लेकिन 1826 में दूसरी पत्नी का भी देहांत हो गया था इसके बाद उन्होंने तीसरी शादी की लेकिन तीसरी पत्नी भी ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह सकी

राजा राममोहन राय की शिक्षा ( Raja Ram Mohan Roy education)

राजा राममोहन राय ने 15 साल की आयु में उन्होंने बंगला, पारसी ,अरबी और संस्कृत जैसी भाषाओं का ज्ञान हो गया था

राजा राममोहन राय ने अपने प्रारम्भिक शिक्षा अपने गॉव से ही की इसके बाद उन्हें पटना के मदरसे में भेज दिया गया था पटना में उन्होंने पारसी और अरबी भाषा का ज्ञान प्राप्त किया राजा राममोहन राय ने 22 साल की उम्र में इंग्लिश भाषा सीखी इसके बाद संस्कृत का ज्ञान प्राप्त करने के लिए काशी चले गए थे जहाँ उन्होंने वेदों और उपनिषदों का भी अध्ययन किया

राजा राममोहन राय और उनका प्रारम्भिक विद्रोही जीवन

राजा राममोहन राय हिन्दू पूजा और परम्पराओं के सख्त खिलाफ थे वह समाज में फैली कुरीतियों और अंध-विश्वासों का विरोध करते थे

राजा राममोहन राय ने 14 साल की उम्र में सन्यास लेने की इच्छा प्रकट की लेकिन उनकी माँ ने यह बात नही मानी

राजा राममोहन राय धार्मिक मान्यताओं का विरोध करते थे लेकिन उनके पिता को अच्छा नही लगता था इसी कारण पिता और बेटे के बीच मतभेद होने लगा इसी कारण उन्होंने घर छोड़ दिया

घर लौटने से पहले उन्होंने देश विदेश यात्रा की और सत्य को भी जाना और समझा इसी के कारण उनकी धर्म के प्रति जिज्ञासा बढ़ने लगी और बाद में वह घर लौट आए

जब उनके परिवार ने उनकी शादी करवाई तो उनके परिवार ने सोचा था की शादी के बाद राजा राममोहन राय के विचार में परिवर्तन आ जाएगा लेकिन विवाह के बाद भी उन पर कोई असर नहीं हुआ

विवाह करने के बाद वाराणसी चले गए और वहाँ उन्होंने हिन्दू दर्शन शास्त्र का ज्ञान अर्जित किया परन्तु 1803 में पिता की मृत्यु के बाद वह मुर्शिदाबाद से वापस लौट आए

राजा राममोहन राय का करियर (Raja Ram Mohan Roy Career)

पिता की मृत्यु के बाद वह कोलकाता आ गए जहाँ वो जिमीदारी का काम देखने लगे| सन 1805 में जाँन दिग्बॉय जो कि ईस्ट इंडिया कम्पनी में निन्म पदाधिकारी थे उन्हें राजा राममोहन राय को पश्चिमी सभ्यता और साहित्य का परिचय कराया इसके बाद उन्होंने 10 साल तक जाँन दिग्बॉय के असिस्टेंट के रूप में कार्य किया

राजा राममोहन राय की वैचारिक क्रांति का सफर

राजा राममोहन राय ने 1803 में हिन्दू धर्म और अंधविश्वास पर अपनी राय रखी उन्होंने एकेश्वर वाद के सिद्धांत का अनुवादन किया

1814 में राजा राम मोहन राय ने आत्मीय सभा की स्थापना की| इस सभा का उद्देश्य था की समाज में समाजिक और धार्मिक मुद्दों का पुनः विचार कर परिवर्तन करना था

राजा राममोहन राय ने महिलाओं के अधिकार के लिए अनेक मुहिम चलाएँ जिसमें विधवा विवाह और महिलाओं के जमीन सम्बन्धित हक थे

राजा राममोहन राय ने शिक्षा को समाज की आवश्यकता माना और महिलाओं के पक्ष में कई कार्य किए| 1822 में उन्होंने एक इग्लिश स्कूल की स्थापना की

1828 में राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज की स्थापना की इसके बाद उन्होंने ने सती प्रथा को रोकने के लिए अनेक कार्य किए बाद में सन 1829 में सती प्रथा पर रोक लग गई

शैक्षिक योगदान ( Educational Contributions )

राजा राम मोहन राय सन् 1815 में शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए कलकत्ता आ गए थे उनका मानना था की अगर भारतीय यदि गणित और जियोग्राफी, लैटिन नही पढेंगे तो वह पीछे रह जाएगें सरकार ने राजा राममोहन राय का आइडिया एक्सेप्ट कर लिया

सती प्रथा क्या थी?

इस प्रथा के अंतर्गत यदि किसी महिला का पति मर जाता है तो उसे भी चिता के ऊपर बैठकर जलाया जाता था इस मरने वाली महिला को सती कहा जाता था 18 वी शताब्दी में सती प्रथा ने जोर पकड़ लिया था इस प्रथा को ब्राह्मण और सवर्णों ने प्रोत्साहन दिया| राजा राममोहन राय सती प्रथा का विरोध करने के लिए इग्लैंड तक गए थे

भारतीय पत्रकारिता के जनक ( Father of Indian Jonrnalism )

राजा राममोहन राय ने भारत की पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान किया था वह अपने सम्पादकीय में देश की सामाजिक , राजनीतिक, धार्मिक और अन्य समस्याओं पर केन्द्रण करते थे इससे जनता में जागरूकता आने लगी उनके लेखन से लोगों पर गहन प्रभाव पड़ता था

आलोचना

अंग्रेजी भाषा एवं अंग्रेजी सभ्यता और अंग्रजी शासन को प्रशंसा करने के लिए राजा राममोहन राय की आलोचना होने लगी उन्होने स्वतंत्रता आन्दोलन में कोई प्रत्यक्ष भाग नहीं लिया। उनकी अंतिम सांस भी ब्रिटेन में निकली

राजा राममोहन राय मृत्यु

राजा राममोहन राय की मृत्यु 27 सितम्बर 1883 को ब्रिस्टाल के पास स्तप्लेटोन में मेंनीजाईटीस के कारण उनका देहांत हो गया था

इन्हें भी पढ़े-

क्रांतिकारी रास बिहारी बोस का जीवन परिचय | Rash Behari Bose Biography

संत एकनाथ का जीवन परिचय – Sant Eknath Information in Hindi

Bihari Ke Dohe With Meaning In Hindi बिहारी के दोहे हिंदी अर्थ सहित

एस श्रीसंत का जीवन परिचय (Sreesanth Biography In Hindi)

एस श्रीसंत का जीवन परिचय (Sreesanth Biography In Hindi)

पी.वी.सिंधु की जीवनी

एम. विश्वेश्वरैया भारत के सबसे पहले इंजिनियर

प्रसिद्ध कवी सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको राजा राममोहन राय का जन्म और परिवार (Raja Ram Mohan Roy: Birth and Family) , राजा राममोहन राय की शिक्षा ( Raja Ram Mohan Roy education) , राजा राममोहन राय और उनका प्रारम्भिक विद्रोही जीवन, भारतीय पत्रकारिता के जनक ( Father of Indian Jonrnalism ) , राजा राममोहन राय मृत्यु के बारे अधिक से अधिक जानकारी मिली होगी

आपको यह लेख कैसा लगा नीचे comment कर के जरुर बताइए अगर अभी भी कोई सवाल आप पूछना चाहते हो तो निचे Comment Box में जरुर लिखे | और कोई सुझाव देना चाहते हो तो भी जरुर दीजिये | अगर अभी तक आपने हमारे Blog को Subscribe नहीं किया हैं तो जरुर Subscribe करें | जय हिंद, जय भारत, धन्यवाद

About the author

Jagdish Pant

Leave a Comment

%d bloggers like this: