इतिहास

रानी पद्मावती का इतिहास | Rani Padmini History in Hindi

रानी पद्मावती का इतिहास | Rani Padmini History in Hindi
Written by Vinod Pant

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दोस्तों क्या आप  जानते है  की रानी पद्मावती कौन थी . क्या आप जानते है की रानी पद्मावती  पूरे भारत में इतनी प्रसिद्ध क्यो थी . दोस्तों अगर आप  पद्मावती कौन थी के बारें में जांते है तो ये अच्छी बात i अगर आप रानी  पद्मावती कौन थी के बारें में नहीं जानते है तो कोइ बात  आज हम आपको रानी  पद्मावती कौन थी के बारें में अनेक महत्वपूर्ण  जानकारियां देने का प्रयास करेंगे .

रानी पद्मावती-

राजस्थान और चित्तौड़ के किलों का इतिहास बड़ा ही रोचक है . यहाँ के किलों को सिर्फ यहाँ के राजाओं के बहादुरी के लिए नहीं बल्कि इसे यहाँ की सबसे सुन्दर रानी  पद्मावती के लिए भी जाना जाता है . पद्मावती पद्मावत  की एक महान रानी थी , और ये पूरे भारत में अपनी सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध थी . रानी पद्मावती  के उप्पर मलिक मुहम्मद जायसी ने सन 1540 में  कविता भी लिखी है.  आपको बता दें की रानी पद्मावती को लेकर इतिहास में कोइ दस्तावेज मौजूद नहीं है  , लेकिन  चित्तोड़ में हमें रानी पद्मावतीकी छाप दिखाई देती है.

रानी पद्मावती का इतिहास | Rani Padmini History in Hindi

रानी  पद्मावती का इतिहास

बोलहु सुआ पियारे-नाहाँ । मोरे रूप कोइ जग माहाँ ?
सुमिरि रूप पदमावति केरा । हँसा सुआ, रानी मुख हेरा ॥

रानी पद्मावती ने अपना जीवन अपने पिता गन्धर्व सेन और माता चम्पावती के साथ  सिंहाला  में गुजारा. रानी के पास एक बोलने वाला तोता भी था जिसका नाम  “हीरामणि” था . रानी  के पिता ने रानी के विवाहरके लिए  एक  स्वयंबर आयोजित किया था और इस  स्वयंबर में आसपास के सभी हिन्दू -राजपूतों और राजाओं के आमंत्रित किया गया था . इस  स्वयंबर में एक छोटे से राज्य के राजा जिनका नाम मलखान सिंह था वो भी रानी से विवाह से करने के लिए पधारे थे .

इस विवाह में चित्तौड़ के रजा  रावल रतन सिंह अपनी पहली पत्नी के होते हुए भी आये थे . और उन्होंने इस  स्वयंबर में  मलखान सिंह को पराजित कर रानी से विवाह भी कर लिया था . क्योकि रजा से इस स्वयंबर को जीत लिया था . स्वयंबर के बाद राजा अपनी सुन्दर पत्नी साथ चित्तौड़ लौट गे थे .

दिल्ली सल्तनत में 12वी औरे 13वी शताब्दी में धीरे धीरे आक्रमणकारीयो की ताकत बाद रही थी . इसी कारण से दिल्ली के सुल्तान ने मेवाड़ पर आक्रमण कर दिया था . इसके बाद रानी को पाने की लालसा से  अलाउद्दीन खिलजी ने भी चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया था . आपको बता दें की  यह पूरी कहानी इतिहासकार अलाउद्दीन के लिखान पर आधारित है जिन्होंने इतिहास में राजपूतो पर हुए आक्रमणों को अपने लेखो से प्रदर्शित किया था।

12वी और 13वी शताब्दी में चितौड़ का शाशन रजा रावल रतन सिंह के हाथो में था . राजा रावल रतन सिंह एक बहादुर और साहसी योद्धा थे . एक प्रिय पति होने के साथ रजा  एक बेहतर और कुशल शाशक भी थे . राजा को कला में काफी रूचि थी .  राजा के दरबार में काफी बुद्धिमान लोग थे . उनमें से एक व्यक्ति थे संगीतकार राघव चेतन .  दोस्तों आपको बता  दें के राघव चेतन एक जादूगर भी थे लेकिन ज्यादा लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी . अपनी इस कला का उपयोग वो शत्रुओ को चकमा या अचंभित करने के लिए मुसीबत के समय में करते थे .

लेकिन राघव चेतन के कारनामे सभी के सामने आने से राजा बहुत क्रोधित हुए , और  उन्होंने राघव चेतन को राज्य से निकाले जाने की  घोषणा की इसके साथ ही राजा ने उनके मुह पर काली लगाकर गधे में बैठाकर पूरे राज्य में घुमाने के आदेश भी दिए . इस घटना के बाद राघव चेतन राजा के सबसे कट्टर दुश्मनों में शामिल हो गये . इस घटना के बाद राघव चेतन ने दिल्ली जाने की ठानी और वो वहा से दिल्ली  अलाउद्दीन खिलजी की शरण में चले गये  और  अलाउद्दीन खिलजी को चित्तौड़ पर आक्रमण करने के लिए बाध्य करने लगे .

दिल्ली आने के बाद  राघव चेतन दिल्ली के पास के जगंल में रहने लगें| और इस जंगल में सुल्तान अक्सर शिकार करने के लिए आया करते थे  एक दिन सुल्तान  शिकार कर रहें थे और उसी समय राघव ने अपनी बांसुरी बजाना शुरू कर दी| जब सुल्तान ने बांसुरी की आवाज सुनी तो वह आश्चर्यचकित हो और यह सोचने लगें की  इतनी मधुर ध्वनि से बाँसुरी कौन  बजा रहा होगा।

इसके बाद सुल्तान ने अपने सैनिकों को कहा की  बाँसुरी  वाले इंसान को ढूंड कर लाए जैसे  ही सैनिक राघव चेतन लाए तो सुल्तान राघव चेतन को अपने राजदरवार में आने को कहा  उसी समय राघव चेतन ने कहा की वह एक साधारण संगीतकार है इसके बाद राघव चेतन ने अलाउद्दीन को रानी पद्मावती की सुन्दरता के बारे में बताया इसके बाद  अलाउद्दीन  मन ही मन रानी पद्मावती से प्रेम करने लगें

इसके बाद  अलाउद्दीन अपने राज्य में वापिस आ गए इसके बाद उन्होंने आपनी सेना को  चित्तोड़ पर आक्रमण करने का आदेश दे दिया ताकि  वह रानी  पद्मावती  को हासिल कर सके और अपने राज्य में ला सके

जैसे ही अलाउद्दीन चित्तोड़  पहुचे उनके हाथ निराशा लगी| उन्होंने पाया की   चित्तोड़ चारों तरफ से सुरक्षित है लेकिन वे रानी पद्मावती की सुन्दरता को देखने के लिए अतिउत्साहित थे इसलिए उन्होंने राजा रतन सिंह को एक संदेश भेजा उस संदेश में उन्होंने कहा की वह रानी पद्मावती को अपनी बहन माने| इस संदेश को पड़ने के बाद राजा रतन सिंह बहुत ही नाराज हो गए .

रानी पद्मावती – Rani Padmini ने अलाउद्दीन को अपना प्रतिबिम्ब को आईने में देखने की मंजूरी दी थी . लेकिन अलाउद्दीन  खिलजी ने भी ये  ठान लिया था की वो रानी को हर हाल में हासिल कर लेंगे . अपने केम्प आते समय कुछ समय तक अलाउद्दीन  खिलजी कुछ समय तक राजा के सात ही थे . लेकिन जैसे ही अलाउद्दीन  खिलजी को मौका मिला उसने रजा को बंदी बना लिया और बदले में रानी को देने की मांग रखी .

सोनगरा के चौहान राजपूत जनरल गोरा और बादल ने सुल्तान को  उन्ही के खेल  में  में पराजित करने की ठानी . और कहा रानी पद्मावती अगली सुबह उन्हें दे डी जाएगी . उसी दिन 150 पालकी (जिसे पूरी तरह से सजाकर, ढककर उस समय में चार इंसानों द्वारा एक स्थान से दुसरे स्थानों पर ले जातें थे . उस समय इन पालकियो को शाही महिलाओ को एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाने के लिए किया जाता था ,) मंगाई ,और इन पालकियो को वही पर रोका गया जहां पर राजा रतन सिंह को  बंदी बनाया गाय था .

जब राजा ने देखा की पालकी चित्तौड़ से आई है तो राजा शर्मिंदा हो गये . रजा को लगा की शायद रानी भी आई होगी . लकिन जब राजा ने देखा की पालकी से रानी नहीं बल्कि उनकी महिला कामगार उतर रही है और सभी पालकियां सैनिको से भरी हुयी है तो रजा अचंभित थे .

सैनिको ने बहार निकलते ही अल्लाउद्दीन के कैम्प पर हमला कर दिया और वहां से राजा को शुरक्षित रानी  के महल तक पहुंचा दिया . इस बात को सुनते ही सुल्तान  आग -बबूला हो गया और उसने तुरंत ही चितौड़ पर आक्रमण करने के आदेश दिए . सुल्तान की आर्मी ने चितौड़ की अभेद्य दीवार को तोड़ने की कोशिश की लेकिन वो असफल रही . इसके बाद अलाउद्दीन के सेना ने किले को चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया . जब रजा को इसकी सुचना मिली तो राजा ने अपने सैनिको को आदेश दिया की  सभी द्वार खोलकर अल्लाउद्दीन की सेना का सामना करो.

आदेश सुनते ही रानी  पद्मावती ने देखा की उनकी सेना का सामना एक विशाल सेना से हो रहा है उसी समय चित्तोड़ की सभी महिलाओ ने जौहर करने का निर्णय लिया, उनके अनुसार दुश्मनों के हाथ लगाने से अच्छा है की वह जौहर करें

जौहर एक इसी प्रक्रिया है जिनमे शाही महिलाये अपने दुश्मन के साथ रहने के बजाय स्वय को एक  विशाल अग्निकुंड में न्योछावर कर अपनी जान देती है।

इस तरह शाही महिलाओं ने जौहर कर आपनी जान दे दी  जिसमे एक विशाल अग्निकुंड में चित्तोड़ की सभी महिलाये ख़ुशी से कूद गयी थी . यह खबर पाते ही  चित्तौड़ के सैनिको को लगा की अब उनके पास जीने का कोइ मकसद नही है . और उन सभी  ने आत्महत्या  करने का निर्णय किया . सभी सैनिको ने केशरी पोशाक और पगड़ी पहन ली  और उन सब ने अल्लाउद्दीन के सेना का मरते दम तक सामना करने का निर्णय लिया . इस विनाशकारी विजय के बाद अलाउद्दीन के सेना किले में केवल  राख और जले  शरीर को देखने के लिए ही किले में आ सकी .

आज के समय में भी लोग चित्तौड़ के महिलाओ के जौहर करने की बात को गर्व से याद करते है जिन्होंने अपने आप को दुश्मनों के हवाले करने के बजाय अपने आप को आग के हवाले करने के बारें में सोचा . रानी के इस बलिदान को आज भी इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाता है .

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अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको रानी पद्मावती का इतिहास | Rani Padmini History in Hindi , रानी  पद्मावती का इतिहास के बारे में अधिक से अधिक जानकरी देने का प्रयास किया है मुझे पूर्ण आशा ही आपको यह आतिर्कल पसन्द आया होगा

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