जीवन परिचय

वी शांता राम का इतिहास एवं जीवन परिचय

वी शांता राम का इतिहास एवं जीवन परिचय
Written by Vinod Pant

वी. शांता राम का जीवन परिचय

वी. शांता राम भारत के प्रसिद्ध निर्देशक  फिल्मकार एवं अभिनेताओ में से एक  थे. उनका जन्म  18 नोवंबर 1901 को महारास्ट्र के कोल्हापुर के एक जैन परिवार में हुवा था . उनका पूरा नाम राजाराम वाकूनडरे शांताराम था .उन्हने केवल 12 वर्ष के आयु में ही रेलवे वर्कशॉप में अप्रेंटिस क्र तौर पर काम करना शरू कर दिया था. उन्होने अपने 6 दशक तक चले लम्बे फिल्ममी करियर में 50 फिल्मो का निर्देशन किया था. उनकी प्रमुख चर्चित फिल्म  दो आखे और बारह हाथ , है . जो की एक बहादुर ओर जिम्मेदार जेलर  की जिंदगी पर बनी है

वी . शांता राम को शुरवाती फिल्म निर्माताओ में से एक माना जाता . इन्होने समाज में परिवर्तन लाने के लिए फ़िल्मी माध्यम को काफी परवाशाली ढंग से इस्तेमाल किया. अगर दुसरे शब्दों में कहे तो इन्होने समाज में परिवर्तन लाने के लिए फ़िल्मी जगत को एक साधन के रूप में प्रयोग किया . तथा मानवता का समर्थन किया और साथ ही  दूसरी ओर अन्याय तथा कट्टरता का भी विरोध  किया .

वी शांता राम का इतिहास

वी शांता राम ने अपने करियर की शुरुवात  आई मूक फिल्म सुरेख हरण से की थी जो सन 1921  में आयी थी इन्होने इस फिल्म में बतोर अभिनेता काम किया था . अगर उनकी फिलन निर्देशन की बात करे तो उन्हने 1921 में आयी फिल्म  नेताजी पालकर को पहली बार निर्देशित किया था . इसके बाद इन्होने 1929 में प्रभात फिल्म्स की स्थापना की थी . फिर इन्होने 1946 में डाक्टर कोटनिस के जीवन पर आधारित फिल्म्स डाक्टर कोटनिस की अमर कहानी की साथ hindi फ़िल्मी जगत में कदम रखा.

उसके बाद 1955 में आयी फिल्म झनक पायल बाजे के लिए इन्हें सर्वश्रेष्ठ  निर्देशक का फिल्मफेयर का पुरुस्स्कार से सम्मानित किया गया. इसके बाद 1957 में आई उनकी फिल्म्स दो आखें बार हाथ के लिये इन्हें सर्वश्रेष्ठ फिल्म्स का पूरुस्कार दिया गया. साथ ही इस फिल्म के सर्वश्रेष्ठ फीचर के के लिए इन्हें राष्ट्रपति के स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया.और इनकी इसी फिल्म (2 आँख 12 हाथ ) को बर्लिन फिल्म फैस्टेवल में सिल्वर बियर और सर्वश्रेष्ट विदेशी फिल्म्स के लिए सेमुएअल गोल्डिन पुरूस्कार से भी  सम्मानित किया

1985 में फिल्म जगत के सबसे बड़े पुरूस्कार  दादा  साहेव फाल्के परुस्कार से भी इन्हें सम्मनित किया गया.

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वी. शांता राम की प्रमुख फिल्मे

वी. शांता राम की प्रमुख फिल्मे  डॉ. कोटनिस की अमर कहानी (1946), अमरभूपाली (1951), झनक झनक पायल बाजे (1955), दो आखे बारह हाथ (1957), नवरंग (1959), दुनिया ना माने (1937), पिंजरा (1972), चानी, इए मराठीची नगरी और झुंज हैं .

वी.शांता राम द्वारा  राजकमल कला मंदिर की स्थापना

वी.शांता राम ने अपनी फिल्मो की शुरुवात महारास्ट्र  से ही की थी. वही उन्होने फिल्म बनाने की सारी बारीकिया सीखी . उनको फिल्म बनाने की सारी कलाए एक पेंटर ने सिखायी  1921 में बनी फिल्म सुरेखा हिरण में  वी. शांता रमण ने एक अभिनेता के तौर पर काम किया . फिर इसके बाद इन्होने राज कला कमल मंदिर की स्थापना की थी .

वी. शांता राम की मृत्यु

30 अक्तूबर 1990 को मुंबई में  फ़िल्मी जगत में अपनी छाप छोड़ चुके वी.शांता राम की मृत्यु हो गयी .1993 में स्थापित वी. शांता राम मोशन पिक्चर वैज्ञानिक अनुसंधान और सांस्कृतिक फाउंडेशान फिल्म निर्माताओ को परुस्कार प्रदान करता है .भारतीय डांक विभाग ने वी. शांता राम के उप्पर 17 नौम्वर 2001 को एक डांक टिकेट जारी किया था.

हमने इस पोस्ट के माध्यम से  प्रसिद्ध निर्देशक,  फिल्मकार एवं अभिनेताओ में से एक वी. शांता राम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जैसे- वी.शांता राम कौन थे ,इन्होने कैसे फिल्मी जगत में अपनी छाप छोड़ी ,इनकी प्रसिद्ध फिल्म कौन कौन सी थी . इन्हें फ़िल्मी जगत में कौन कौन से पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया.  आदि दी.

हमें आशा है की  आज आपने प्रसिद्ध निर्देशक  फिल्मकार एवं अभिनेताओ में से एक वी.शांता राम  के बारे में अनेक जानकारियाँ हासिल की होगी . हम आशा करते है की आप ने इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारिया हासिल की आप उस जानकारी को दुसरो तक भी पहुचायंगे जिस्से दुसरे लोग भी इनके  बारे में जान सके

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