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शिवाजी की जीवनी और इतिहास(shivaji maharaaj Histery in Hindi)

शिवाजी की जीवनी और इतिहास
Written by Vinod Pant

आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से आपको शिवाजी के जीवन परिचय और इतिहास के बारे में अनेक महत्वपूर्ण  जानकारी देने का प्रयास करेंगे |

शिवाजी भोंसले जिन्हें , छत्रपति शिवाजी के नाम से भी जाना जाता है वो एक भारतीय योद्धा होने के साथ साथ मराठा वंश के सदस्य भी थे | शिवाजी ने अपने जीवनकाल ने आदिल्शाही सल्तनत की अधीनता को स्वीकार न करते हुए अनेक लड़ाईयां लड़ी थी | शिवाजी ने र्रील्ला पद्दति से बहुत सारे युद्ध भी जीते | शिवाजी को आद्य-राष्ट्रवादी और हिन्दूओ का नायक भी कहा जाता था | सन 1674 ई0 में शिवाजी का राज्याभिषेक हो गया था और उन्हें छत्रपति का खिताब भी मिला था | हम आपको शिवाजी के जीवन परिचय व इतिहास के बारें में नीचे विस्तार से बता रहे है |

शिवाजी का प्रारंभिक जीवन –

शिवाजी का जन्म सन 1627 ई0 में पुणे जिले के जुनार शहर में शिवनेरी किले में हुवा था | शिवाजी के जन्म को लेकर लोगों में काफी विवाद है | लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने शिवाजी के जन्म को 19 फरवरी 1630 को स्वीकार किया है | इनकी माता ने इनका नाम  भगवान् शिवाय के नाम पर शिवाजी रखा | शिवाजी के पिता का नाम  शाहजी भोंसले था , जो मराठा सेना में एक सेनापति थे , और ये डेक्कन सल्तनत के लिए काम करते थे | शिवाजी के माता का नाम  जीजाबाई था जो सिंधखेड़ के लाखूजीराव जाधव की पुत्री थी | जिस समय शिवाजी का जन्म हुवा उस समय डेक्कन कीसत्ता तीन इस्लामिक सल्तनतो बीजापुर , अहमदनगर और गोलकोंडा में थी | शिवाजी के पिता अक्सर अपनी निष्ठा  निजामशाही ,आदिलशाह और मुगलों के बीच बदलते रहते थे, लेकिन उन्होंने अपनी जागीर हमेशा पुणे ही रखी शिवाजी के पिता  साथ हमेशा एक छोटी सैनिक टुकड़ी रहती थी |

शिवाजी की माता बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति की थी जिस कारण शिवाजी अपनी माता से बहुत ही समर्पित थे | शिवाजी पर धार्मिक वातावरण का काफी गहरा प्रभाव पड़ा | शिवाजी की माता शिवाजी को हिन्दू ग्रंथों रामायण और महाभारत की कथा सुनाया करती थी | इन दो ग्रंथों के कारण ही शिवाजी जीवनपर्यन्त हिन्दू महत्वों का बचाव करते रहे | जब शिवाजी छोटे थे उस समय शिवाजी के पिता ने  तुकाबाई से दूसरा विवाह कर लिया | दूसरा विवाह करने के बाद शिवाजी के पिता तुकाबाई के साथ कर्नाटक में आदिलशाह के तरफ से सैन्य अभियानों के लिए चले गए | शिवाजी के पिता ने जिजाबाई और शिवाजी को अकेले पुणे में दादोजी कोंणदेव के संरक्षण में छोड़ दिया |  दादोजी ने ही शिवाजी को बुनयादी लड़ाई जैसे – घुड़सवारी , तलवारबाजी और निशानेबाजी सिखाई |

शिवाजी बचपन से ही एक साहसी योद्धा थे , जिस कारण से उन्हें केवल औपचारिक शिक्षा ही दी गयी , जिसमें वो पड़ लिख नहीं सकते थे ,लेकिन उन्हें दूसरों के द्वारा सुनाई गयी बातें अच्छी तरह से याद रहती थी | जैसे – जैसे शिवाजी बड़े होते गए वैसे ही उन्होंने अपने मावल क्षेत्र से अपने विश्वस्त साथियो और सेना को इकट्टा किया | शिवाजी ने खुद को मजबूत करने के लिए और मातृभूमि का ज्ञान अर्जित  करने के लिए सहयाद्रि रेंज की पहाडियों और जंगलों में घूमते रहते थे ताकि वो सैन्य प्रयासों के लिए पूर्ण रूप से तैयार हो सके |

जब शिवाजी मात्र 12 साल के थे , तब उन्हें बैंगलोर ले जाया गया , जहाँ इनके जेष्ठ भाई साम्भाजी और सौतेला भाई ऐकोजी पहले ही पूर्ण रूप से प्रशिक्षित थे | सन 1640 ई0 में शिवाजी का विवाह नीलाम्बर परिवार की सइबाई से कर दिया गया | सन 1645 ई0 में शिवाजी ने पहली बार हिंदवी स्वराज्य की अवधारणा दादाजी नरस प्रभु के सामने रखी |

Conflict with Adilshahi sultanate of Shivaji Maharaj(

शिवाजी का आदिलशाही सल्तनत के साथ संघर्ष)

मात्र 15 साल की ऊम्र में सन 1645 ई0 में शिवाजी ने आदिलशाह की सेना को बिना सूचना दिए सेना पर आक्रमण कर दिया और तोरणा के किले को जीत लिया | तोरण के किले को जीतने के बाद फिरंगोजी नरसला ने शिवाजी की स्वामीभक्ति स्वीकार कर ली और शिवाजी ने कोंडाना का किले पर कब्जा कर लिया | लेकिन कुछ तथ्य बताते है की सन 1649 में इस तथ्य पर रिहा कर दिया की शिवाजी और संभाजी कोड़ना का किले को छोड़ दें लेकिन कुछ तथ्य संभाजी को 653 से 1655 तक कारावास में बताते है | शिवाजी अपनी रिहाई के बाद सार्वजानिक जीवन से मुक्त हो गए और सन 1645 के आस -पास शिकार करने के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी | अपने पिताजी की मृत्यु के बाद शिवाजी ने एक बार फिर से आक्रमण किया और सन 1656 ई0 में फिर से पड़ोसी साम्राज्य के मराठा मुखिया से  जावली के  साम्राजय को अपने अधिकार में ले लिया |

सन 1659 में आदिलशाह ने एक अनुभवी और दिग्गज सेनापति अफजल खान को शिवाजी को तबाह करने के लिए भेजा , जिससे क्षेत्रीय विद्रोह कम हो जाय | 10 नवंबर  सन 1659 ई0 को अफजल खान और शिवाजी नों प्रतापगढ़ किले की तलहटी पर एक झोपड़ी में मिले |  इनके मिलने के लिए इस तरह का हुक्मनामा तैयार किया गया था कि दोनों केवल एक तलवार के साथ आयेगे | लेकिन शिवाजी को संदेह  हुवा की अफजल खान शिवाजी पर हमला कर देगा , इसी कारण से शिवाजी ने अपने कपड़ो के नीचे कवच, दायी भुजा पर छुपा हुआ बाघ नकेल और बाए हाथ में एक कटार साथ लेकर आये | तथ्यों के आधार पर ये पता चलता है की दोनों में से पहले किसी एक ने हमला किया था | मराठा इतिहास में अफज़ल खान को विश्वासघाती बताया है जबकि पारसी इतिहास में शिवाजीको विश्वासघाती बताया है | इस लड़ाई में अफज़ल खान की कटार को शिवाजी के कवच में रोक दिया और शिवाजी के हथियार बाघ नकेल ने अफजल खान पर इतने घाव किये की उसी समय अफजल खान की मौत हो गयी थी | इसके तुरंत बाद ही शिवाजी ने अपने छुपे हुए सैनिको को बीजापुर पर हमला करने का आदेश दे दिया |

10 नवम्बर 1659 को प्रतापगढ़ का युद्ध हुआ जिसमे शिवाजी की सेना ने बीजापुर के सल्तनत की सेना को हरा दिया | चुस्त मराठा पैदल सेना और घुडसवार बीजापुर पर लगातार हमला करने लगे और बीजापुर के घुड़सवार सेना के तैयार होने से पहले ही शिवाजी के सैनिको ने आक्रमण कर दिया | मराठा सेना ने  बीजापुर सेना को पीछे धकेल दिया | बीजापुर सेना के 3000 सैनिक मारे गये और अफज़ल खान के दो पुत्रो को बंदी बना लिया गया | इस बहादुरी से शिवाजी मराठा लोकगीतो में एक वीर और महान नायक बन गये | बड़ी संख्या में जब्त किये गये हथियारों ,घोड़ो ,और दुसरे सैन्य सामानों से मराठा सेना ओर ज्यादा मजबूत हो गयी | मुगल बादशाह औरंगजेब ने शिवाजी को मुगल साम्राज्य के लिए बड़ा खतरा मान लिया |

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शिवाजी को आगरा में बंदी बनाना और बच कर निकल जाना –

शिवाजी ने कई बार बीमारी का बहाना बनाया और औरंगजेब को धोखा देकर डेक्कन जाने की प्रार्थना की | शिवाजी के बार – बार कहने पर उनकी स्वास्थ्य की दुवा करने वाले  आगरा के संत ,फकीरों और मन्दिरों में प्रतिदिन मिठाइयाँ और उपहार भेजने की अनुमति दी | कुछ दिनों तक ये सिलसिला चलने के बाद शिवाजी संभाजी को मिठाई वाली टोकरी में बैठाकर और खुद मिठाई की टोकरी उठाने वाले मजदुर बनकर वहां से भाग गए | वहां से भागने  के बाद शिवाजी ने मुगलों से बचने के लिए संभाजी की मौत की झूठी खबर फैला दी | इसके बाद संभाजी को विश्वनीय लोगो द्वारा आगरा से मथुरा ले जाया गया |

शिवाजी के बच निकलने के बाद शत्रुता कमजोर हो गयी  और संधि की शर्ते 1670 के अंत तक खत्म हो गयी |  इसके बाद शिवाजी ने एक मुगलों के खिलाफ एक बड़ा आक्रमण किया और चार महीनों में उन्होंने मुगलों द्वारा छीने गये प्रदेशो पर फिर से कब्जा कर लिया |

नेसारी की जंग और शिवाजी का राज्याभिषेक

सन 1674 ई0 में शिवाजी ने मराठा सेना के सेनापति तापराव गुर्जर को आदिलशाही सेनापति बहलोल खान की सेना पर आक्रमण के लिए बोला | प्रतापराव की सेना पराजित हो गयी और उसे बंदी बना लिया | इसके बावजूद शिवाजी ने बहलोल खान को प्रतापराव को रिहा करने की धमकी दी वरना वो हमला बोल देंगे | शिवाजी ने प्रतापराव को पत्र लिखकर बहलोल खान की बात मानने से इंकार कर दिया | अगले कुछ दिनों में शिवाजी को पता चला कि बहलोल खान की 15000 लोगो की सेना कोल्हापुर के निकट नेसरी में रुकी है | प्रतापराव और उसके छ: सरदारों ने आत्मघाती हमला कर दिया ताकि शिवाजी की सेना को समय मिल सके | मराठो ने प्रतापराव की मौत का बदला लेते हुए बहलोल खान को हरा दिया और उनसे अपनी जागीर छीन ली |  शिवाजी प्रतापराव की मौत से काफी दुखी हुए और उन्होंने अपने दुसरे पुत्र की शादी प्रतापराव की बेटी से कर दी |

शिवाजी ने अपने सैन्य अभियानों से काफी जमीन और धन इकठ्ठा कर लिया था | लेकिन उन्हें इस समय तक कोइ औचारिक खिताब नहीं मिला था | एक राजा का ख़िताब ही उनको आगे आने वाली चुनौती से रोक सकता था | शिवाजी को रायगढ़ में मराठो के राजा का ख़िताब दिया गया | पंडितो ने सात नदियों के पवित्र पानी से उनका राज्याभिषेक किया | अभिषेक के बाद शिवाजी ने जीजाबाई से आशीर्वाद लिया | उस समारोह में लगभग रायगढ़ के 5000 लोग इक्ठटा हुए थे | शिवाजी को छत्रपति का खिताब भी यही दिया गया |राज्याभिषेक के कुछ दिनों बाद जीजाबाई की मौत हो गयी | इसे अपशकुन मानते हुए दुसरी बार शिवाजी का राज्याभिषेक किया गया |

भारत में विजय और शिवाजी के अंतिम दिन-

सन 1674 ई0 की शुरुवात में मराठों ने एक आक्रामक अभियान चलाकर खानाबादोस पर आक्रमण कर लिया था और कोल्हापुर पर कब्जा कर लिया | इसके बाद शिवाजी ने दक्षिण भारत में अपनी विशाल सेना भेजकर आदिलशाही किलों को जीत लिया |  शिवाजी ने अपने सौतेले भाई वेंकोजी से सामजंस्य करना चाहा लेकिन इसमें शिवाजी  असफल रहे  इसलिए रायगढ़ से लौटते वक्त शिवाजी ने  उसको हरा दिया और मैसूर के अधिकतर हिस्सों पर कब्जा कर लिया |

सन 1680 में शिवाजी बीमार पड़ गए ,मात्र 52 साल की उम्र में शिवाजी की मृत्यु  हो गयी |  शिवाजी के मौत के बाद शिवाजी की पत्नी ने उसके बेटे राजाराम को सिंहासन पर बैठने की योजना बनायीं | शिवाजी की पत्नी की योजना काम कर गयी , और शिवाजी के 10 साल के बेटे को सिंहासन पर बैठाया गया | इसेक बाद संभाजी ने सेनापति को मारकर रायगढ़ के किले पर अपना अधिकार कर लिया और  सिंहासन पर अपना अधिकार कर लिया | संभाजी महाराज ने राजाराम ,और उसकी  पत्नी जानकी बाई को कारावास भेज दिया और माँ सोयराबाई को साजिश के आरोप में फांसी पर लटका दिया | संभाजी महाराज इसके बाद वीर योद्धा की तरह कई वर्षो तक मराठो के लिए लड़े | शिवाजी के मौत के बाद 27 वर्ष तक मराठो का मुगलों से युद्ध चला और अंत में मुगलों को हार का सामना करना पड़ा  | इसके बाद अंग्रेजो ने मराठा साम्राज्य को समाप्त किया था |

अंतिम राय –

आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से शिवाजी की जीवनी और इतिहास के बारें में अनेक जानकारी दी | जैसे – शिवाजी का प्रारंभिक जीवन , शिवाजी का आदिलशाही सल्तनत के साथ संघर्ष , शिवाजी को आगरा में बंदी बनाना और बच कर निकल जाना , नेसारी की जंग और शिवाजी का राज्याभिषेक , भारत में विजय और शिवाजी के अंतिम दिन आदि |

हम आशा करते है की इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपने जो भी जानकारी हासिल की वो आपको पसंद आई होगी | आज आपने इस आर्टिकल के माध्यम से जो भी जानकारी हासिल की उसे आप अपने तक ही सीमित न रखें बल्कि इस जानकारी को दूसरों तक भी पहुचाये , जिसे दूसरे लोग भी इसके बारें में जानकारी हासिल कर सके |

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