जीवन परिचय

सूरदास का जीवन परिचय

सूरदासजी का जीवन परिचय
Written by Jagdish Pant

दोस्तों आज हम आपको सूरदास का जीवन परिचय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास करेगें| सूरदास हिंदी साहित्य में  भक्ति काल के सगुण भक्ति शाखा के कृष्ण-भक्ति उपशाखा के महान कवि हैं। दोस्तों आज हम आपको सूरदास के जीवन और उनकी  रचनाओ के बारे में अघिक से अघिक जानकारी देने का प्रयास करेगें

सूरदास का जीवन परिचय

सूरदास जी का जन्म 1478 ईस्वी में रुनकता नामक गाँव में हुआ था| आज कल यह गॉव  मथुरा-आगरा मार्ग के किनारे स्थित है। और  कुछ ऐसे विद्वानों का मत है की सूरदास जी का जन्म सीही नामक ग्राम में  हुआ था| सूरदास जी का जन्म एक निर्घन ब्राह्मण के घर  में हुआ था| और फिर बाद में यह  आगरा और मथुरा के बीच गऊघाट पर आकर रहने  लगें

सूरदास के पिता का नाम रामदास था जो की एक महान गीतकार थे| सूरदास  के जन्म से अन्घे होने के विषय में भी मतवेद हैं सूरदास के गुरु का नाम श्री वल्लभाचार्य था |

सूरदास अकबर के समय के सबसे प्रसिद कवि थे| वह अपने भजन के जरिए सभी लोगो को कृष्ण के बारे में ज्ञान देते थे सूरदास जी ने राजा अकबर और महा राणा प्रताप को बहुत हो प्रभावित किया था

सूरदास के कृष्ण भक्त के रूप में 

सूरदास के बारे में बहुत सी कथाएँ प्रचलित है| एक दिन सूरदास जी कृष्ण की भक्ति  में इतने लीन हो गये थे की वह कुए में गिर गये थे|  और कुए में भी कृष्ण की भक्ति में ही लीन थे

और तभी कृष्ण ने सूरदास की जान बचाई | फिर देवी रुकमणी ने कृष्ण ने पूछा के तुमनें स्वय सूरदास की जान क्यों बचाई| तब कृष्ण ने रुकमणी को कहा के सच्चे भक्तों के हमेशा मदद करनी चाहिए|  जब  कृष्ण ने सूरदास को बचाया तो सूरदास को उनकी  दृष्टि वापिस कर दी थी| फिर सूरदास ने कृष्ण को देखा|

फिर कृष्ण ने सूरदास को वरदान मांगे को कहा| सूरदास ने कहा की मुझे सब कुछ मिल चुका हैं लेकिन मुझे फिर से अन्धा बना दे| क्योंकि में इस दृष्टि से अपने अलावा किसी और को नही देखन चाहता हूँ|  श्री कृष्ण ने सूरदास की मनोकामना पूरी कर दी

सूरदासजी का जीवन परिचय

सूरदास की रचनाएँ

सूरदास जी द्वारा लिखित पाँच ग्रन्थ बताए जाते हैं:

  • (१) सूरसागर – वह  सूरदास की प्रसिद्ध रचना है। जिसमें सवा लाख पद संग्रहित थे। किंतु अब सात-आठ हजार पद ही मिलते हैं।
  • (२) सूरसारावली
  • (३) साहित्य-लहरी – जिसमें उनके कूट पद संकलित हैं।
  • (४) नल-दमयन्ती
  • (५) ब्याहलो

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सूरदास एक कवि के रूप में

सूरदास की रचनाओ में सबसे ज्यादा वर्णन कृष्ण का होता हैं  सूरदास जी को हिंदी भाषा का सूर्य कहा जाता हैं सूरदास के एक कवि के रूप में अनेक विशेषताओं थी

  • सूरदास जी अपने रचनाओं के माघ्यम से यह संकेत करते थे की भक्ति सबसे श्रेष्ठ होती हैं
  • सूरदास जी कूट नीति के क्षेत्र में भी काव्य रचनाए करते थे
  • सूरदास ब्रज भाषा के सबसे अच्छे कवि माने जाते हैं और ब्रज भाषा में सूरसागर सबसे प्रसिद्ध रचना हैं
  • सूरदास के रचनाओं में प्रकति का वर्णन सबसे अघिक होता हैं
  • सूरदास ने अपने काव्य में कृष्ण के बचपन की कहानियों का वर्णन करते थे

सूरदास के जन्म और मृत्यु के बारे में मतभेद 

सूरदास के जन्म और मृत्यु के बारे में आज भी विद्वानों के बीच में मतभेद हैं कई प्राचीन ग्रन्थ के आघार पर सूरदास को जन्म से ही अन्घे होने का संदेह था लेकिन कुघ विद्वानों नही मानते थे| जैसे की  श्याम सुन्दर दास जी का मानना हैं की जिस प्रकार वह वात्सल्य रस श्रींगार रस का चित्रण करते थे| इस प्रकार का चित्रण किसी भी नेत्रहीन के बस के बात नही हैं|

सूरदास की मृत्यु:

सूरदास की मृत्यु 1580 ईस्वी में हुई थी।  सूरदास 102 साल तक जीवित थे  सूरदास ने अपने दिर्ध आयु जीवन काल में  कई ग्रंथ लिखे और काव्य पद की रचना की

सूरदास के जयंती 

सूरदास के जन्म के बारे में तो कोई ठीक जानकारी प्राप्त नही हैं लेकिन 2018 से सूरदास की जयंती 20 अप्रैल के दिन शुक्रवार के दिन मनाई गई

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको सूरदास का जीवन परिचय, सूरदास के कृष्ण भक्त के रूप में, सूरदास की रचनाएँ, सूरदास के कृष्ण भक्त के रूप में, सूरदास के जन्म और मृत्यु के बारे में मतभेद के बारे में आपको महत्वपूर्ण जानकरी मिली होगी

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