तकनीक

5 तकनीकें जो पूरी तरह से भारतीय कृषि को बदल सकती हैं

क्या है कृषि की नई तकनीक
Written by Jagdish Pant

आज हम आपको भारतीय कृषि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले है और भरतीय कृषि की दयनीय स्तिथि के बारे में महत्व  जानकरी देंने वाले है देखा जाए तो भारतीय कृषि हमेशा  ही अर्थव्यवस्था का सबसे प्रमुख क्षेत्र रहा है और भारत में आज भी अनेक प्रकार के फसल  जैसे की भारत गेहूं, चावल, दालें, मसालों और कई उत्पादों के दुनिया भर में आज भी नियत किया जाता है  और भारतीय  सरकार ने भी  किसानों

को जागरुक करने के लिए अनेक प्रकार के कार्यक्रम समय समय पर करते रहते है और ग्रामीण क्षेत्र में भारतीय किसान अभी भी मूल्यवान जानकारी और आवश्यक संसाधनों की अनुपलब्धता के कारण उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों से अवगत नहीं हैं.

क्या है कृषि की नई तकनीक

भारतीय कृषि में सूचना प्रौद्योगिकी ने एक महत्वपूर्ण भूमिका है यह किसानों को  अघिक फसल और उच्च फसल पैदावार और अघिक गुणवत्ता का उत्पादन करने में किसानों की मदद करता है और आज हम आपको भारतीय कृषि प्रौद्योगिकि के नई तकनीक के बारे में  महत्वपूर्ण जानकरी देने वाले है

1. जैव प्रौद्योगिकी- 

भारतीय कृषि में जैव प्रौद्योगिकी कोई नहीं तकनीक है| आज से पहले भी जैव प्रौद्योगिकी का इस्तमाल होता रहता था       यह जैव प्रौद्योगिकी किसानों के लिए फायदे मन्द है और जैव प्रौद्योगिकी किसानों को कम क्षेत्र में अघिक में अधिक भोजन पैदा करने की शक्ति प्रदान करता है|और जैव प्रौद्योगिकी पर्यावरण के अनुकूल हैं और इसके अलावा आप पशु-निर्मित अपशिष्ट  खाद का भी उपयोग कर सकते है  जैव प्रौद्योगिकी अनेक के फायदे और सार्थक रूप है और इसके साथ ही भारतीय आबादी  दिन पर दिन बढ़ रही है और भोजन की माग बढ़ रही है 

2. नैनो विज्ञान-

नैनो विज्ञान आधुनिक कृषि पद्धतियां को प्रोत्साहित करने और बीमारी को रोकने के लिए रसायनों का उपयोग करती है  और जो पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होती है नैनो विज्ञान द्वारा इन पदार्थों को अधिक उत्पादक करने में मद्दत  करता है|  और नैनो विज्ञान फसल वृद्धि और मिट्टी की गुणवत्ता का भी विश्लेषण करते हैं. और इसका सबसे बड़ा फायद है की यह आपको  प्राकृतिक संसाधन जैसे पानी और पोषक तत्व खेत में पर्याप्त मात्र में है या नही 

3. भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी- 

 प्रत्येक किसान को उर्वरक में अपने क्षेत्र में उपयुक्त मात्रा में लगातार आवश्यकता अनुसार डालते रहना चाहिए और देखा जाए तो हर क्षेत्र मिट्टी आनुवंशिक रूप से बदलती रहती  है और खेत में हर जगह में  एक विशेष उर्वरक काम नहीं करता है  और ज  आज के समय में उर्वरक बहुत महंगा है इसका दुरुपयोग नही करना चाहिए और हमें उर्वरक उचित मात्रा में डालना चाहिए  और आपको एक खरपतवार उपद्रव के स्तर, उपलब्ध मिट्टी नमी, बीज दर, उर्वरक आवश्यकता अनुसार डालनी चाहिए| 

  • pH दरें
  • कीट प्रकोप
  • पोषक तत्व उपलब्धता
  • फसल विशेषताओं
  • मौसम की भविष्यवाणियां

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4. बिग डेटा- 

बिग डेटा से आप  स्मार्ट खेती कर सकते है और जिससे किसानों की निर्णय लेने की क्षमता में सुधार हो सकता हैं और भारतीय बाजार  में नए डेटा संग्रह उपकरणों को लगातार पेश किया जा रहा है इस  बिग डेटा की मदद से आप अपने  खेत में  गर्मी इकाइयों, कीट दबाव, और सूरज की रोशनी के स्तर को माप सकते है 

5. ड्रोन्स –

भारत एक कृषि प्रघान देश होने के नाते , भारत में ड्रोन्स की आवश्यकता है| ड्रोन्स  का उपयोग अनेक आवश्यकताओं  के लिए किया जाता है जैसे की खेतों निगरानी कर किसानों की लागत कम करके उचित पैदावार को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं और मिट्टी के विश्लेषण में ड्रोन की मदद ली जाती है  क्योंकि यह मिट्टी को 3-डी  गुणवत्ता से कैप्चर करने में सक्षमता रखता है और ड्रोन्स  का उपयोग आप  सिंचाई के लिए भी कर सकते है क्योंकि यह खेतों को ट्रैक करने की क्षमता रखता है और पता लगा सकता है कि एक क्षेत्र के कौन से हिस्सा  सूखे हैं और कितने पानी की आवश्यकता है. 

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको 5 तकनीकें जो पूरी तरह से भारतीय कृषि को बदल सकती हैं, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो विज्ञान, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के बारे में महत्वपूर्ण बाते बताई है|

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