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Output Device (आउटपुट डिवाइस) क्या है और इसके प्रकार

Output Device (आउटपुट डिवाइस) क्या है और इसके प्रकार
Written by Jagdish Pant

दोस्तों आज हम आपको Output Device (आउटपुट डिवाइस) क्या है और इसके प्रकार के बारे में बताने वाले हैं क्या आप जानते है की output Device क्या होते है अगर आप जानते हैं तो अच्छी बात है  अगर नही  जानते हैं तो आज हम आपको इसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी देने वाले है

आउटपुट डिवाइस क्या है (Output Device in Hindi)

जब किसी भी Device के द्वारा computer पर input करते है तो हमें जिस Device में output मिलता हैं उसे हम output कहते हैं तो आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा की इसे output Device क्यों कहते हैं output दो शब्दों से मिल कर बना है एक Out और दूसरा Put

OUT का अर्थ होता है बहार और PUT का अर्थ होता है रखना तो इसका मतलब होता हैं बहार रखना जैसे की Monitor, Speaker, Printer, Projector, Plotter.

आउटपुट डिवाइस के प्रकार

जब हम आपको output Device के हिस्सों के बारे में  अधिक से अधिक जानकरी देने वाले हैं जैसे की

1. Monitor

2. Printer

3. Plotter

4. Screen Projector

5. Speaker

1. Monitor- 

Monitor एक प्रकार का electronic device है जो input  device को दिखाता है Monitor एक T.V की तरह दिखता है और स्क्रीन पर आउटपुट को प्रदर्शित करता है Monitor का दूसरा नाम विजुअल डिस्प्ले यूनिट (Visual Display Unit) है जैसे की हम  T.V को दीवार में रखते है उसी प्रकार Monitor को हम Desk पर रखते हैं  Monitor का इस्तमाल हम कंप्यूटर पर  Video, Image, Document, app को देखने के लिए करते हैं अगर मॉनिटर नही होता तो हमें पता नही चलता की कंप्यूटर के अन्दर क्या चल  रहा है

Output Device (आउटपुट डिवाइस) क्या है और इसके प्रकार

Monitor के कुछ दुसरे नाम भी हैं

Monitor को हम अनेक नामों से पुकारते हैं  जैसे की screen, display, video display, video display terminal, video display unit और video screen. Knowledge के नामों भी जानते है| सामान्य तरह Monitor को तीन भागों में विभाजित किया गया  हैं

इसके दो प्रकार कुछ इस तरह हैं

  • CRT Monitor:

यह monitor भारी और बड़े होते हैं इसमें  desk space और electricity का  प्रयोग किया जाता हैं यह technology सबसे पुरानी हैं CRT monitor कैथोड रे ट्यूब प्रौद्योगिकी (cathode ray tube technology) पर आधारित हैं यह टेलीविजन के लिए बनाया गया  गए थे  लेकिन यह Monitor आज कल नही चलते हैं

2. LCD Monitor:

यह एक फ्लैट पैनल डिस्प्ले ( flat panel display) हैं यह CRT तकनीक के मुकाबले नयी तकनीक है LCD Monitor काम desk space का इस्तमाल करता है और इसका वजन सबसे कम होता हैं  इस  monitor का उपयोग काम बिजली में भी किया जा सकता हैं और अक्सर इसी monitor का ही इस्तमाल किया जाता हैं

2. Printer

यह भी एक प्रकार का input Device हैं इसका इस्तमाल हम कंप्यूटर से प्राप्त जानकारी को कागज पर छापता है इसे  प्रकिया को hard copy भी कहते है इसके मदद से हम कंप्यूटर से कोई भी फाइल को बहुत तेजी से निकाल सकते है पहले प्रिंटर इतनी तेजी से कार्य नहीं कर पाते थे इसलिए जानकारों ने यह महसूस किया की इसलिये printer में भी एक memory होती है printer में भी  store होना चाहिए

 Printer

History of Printer in Hindi

  • 19 वीं शताब्दी में चार्ल्स बैबेज ने अंतर इंजन (Difference Engine) के लिए पहला कंप्यूटर प्रिंटर तैयार किया था| 
  • सन 1984 में पहला लो-कॉस्‍ट प्रिंटर HP LaserJet लॉन्‍च हुआ था
  • 1990 और 2000 के दौरान ईमेल का इस्तमाल तेजी से होने लगा इस कारण ने से प्रिंटर में कमी आने लगी
  • 2010 में  3 डी प्रिंटिंग अधिक इंटरेस्‍ट का एक क्षेत्र बन गया

आज देश में नई Technology  के Printers आ चुके हैं जिनकी जानकारी निचे पहले से दी गई है.

Daisy-whee

यह  डिवाइस जो कुछ वर्ड प्रोसेसर में प्रिंटर के रूप में प्रयोग किया जाता है, जिसमें प्रिंटिंग कैरेक्टर में प्रत्येक को समाप्त करने वाले प्रवक्ता की डिस्क शामिल होती है। इसका आविष्कार डेविड एस ली ने 1969 में किया था 

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Laser Printer 

यह एक प्रकार का इलेक्ट्रोस्टैटिक डिजिटल प्रिंटिंग प्रक्रिया है जो तीव्र गति से किसी सादे कागज़ पर उच्च गुणवत्ता वाले अक्षर और चित्र उत्पन्न (मुद्रित) करता है। इसका आविष्कार  गैरी स्टार्कवेदर ने 1969 में की था लेज़र प्रिंटर का पहला वाणिज्यिक कार्यान्वयन(Commercial implementation) 1976 में निर्मित IBM मॉडल 3800 था

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Laser Printer की विशेषताए

  • उच्च रेजोलुशन
  • उच्च प्रिंट गति
  • बड़ी मात्रा में छपाई के लिए उपयुक्त
  • कम कीमत प्रति प्रष्ट छपाई

Laser Printer की कमियां

  • इंकजेट प्रिंटर से अधिक महगां
  • टोनर तथा ड्रम का बदलना महगां
  • इंकजेट प्रिंटर से बड़ा तथा भारी

बैंड प्रिंटर (Band Printer)

यह Printer चेन प्रिंटर की तरह कार्य करता है इसमें चेन के स्थान पर स्टील का एक प्रिंट बैंड होता हैं

फोटो प्रिंटर (Photo Printer)

यह एक प्रकार का रंगीन प्रिंटर होता है जो फोटो लैब की क्वालिटी फोटो पेपर पर छापते हैं इसका इस्तेमाल डॉक्युमेंट्स की प्रिंटिंग के लिए किया जा सकता है इन प्रिंटर में काफी बड़ी संख्या में नॉजल होते है जो काफी अच्छी क्वालिटी की इमेज के लिए बहुत अच्छे स्याही के बूंद देता है|

फोटो प्रिंटर (Photo Printer)

कुछ अन्य प्रिंटरों के नाम 

  • फोटो प्रिंटर-

यह प्रिंटर किसी भी फोटो को प्रिंट करने की क्षमता रखता है लेकिन इसमें प्रिंट करने के लिए अलग  पेपर का इस्तमाल किया जाता है|

  • डाई सबलीमेंसन ( Sublimation ) प्रिंटर : 

इस प्रिंटर का प्रयोग प्लास्टिक कार्ड, प्रिंटर पेपर और शादी के कार्ड बनाना के लिए किया जाता है

  • प्लॉटर ( Plotter ) :

प्लॉटर प्रिंटर का प्रयोग बड़े बड़े पोस्टर, बैनर और डाक्यूमेंट्स को प्रिंट करने के लिए किया जाता है

  • 3D प्रिंटर : 

यह प्रिंटर  3D इमेज को प्रिंट करता है|

  • वायरलेस प्रिंटर :

यह प्रिंटर वायरलेस होते है इसमें आप ब्लूटूथ , वाई फाई प्रयोग प्रिंट निकाल सकते है

3. Plotter

इसका इस्तमाल बड़े बड़े कागज पर उच्च गुणवत्ता वाले graph प्राप्त करने के लिए किया जाता है Plotter का उपयोग इंजीनियरिंग , भवन निर्माण , City Planning , map आदि में किया जाता है.

Plotter एक एसी input Device है जो computer के द्वारा दिए गये  Commands के मुताबिक कार्य करता हैं

Plotter

1. ड्रम प्लॉटर ( Drum Plotter ) : 

ड्रम प्लॉटर का दूसरा नाम रोलर ( Roller ) भी है | इसे ड्रम की सहयता से बनाया जाता है सबसे पहले इसमें दो पत्रों को रखा जाता है इसके बाद ड्रम पीछे के तरफ घूमता है और फिर वह पात्र पर  ग्राफ सहयता से छपाई का कार्य  करता है|

2. फ्लैटबेड प्लॉटर ( Flatbed Plotter ) :

इस प्लॉटर को टेबल प्लॉटर भी कहा जाता है इस प्लॉटर का उपयोग किसी  निश्चित पेपर की छपाई के लिए किया जाता है इसका आकर चकौर होता है  इसमें दो तरह के रोबोटिक ड्राइंग भुजाएं होती है इसका कार्य दो विभिन्न प्रकार के रंग के पेन को पकड़ना होता है इसके बाद पेन एक रुके हुए पेज के ऊपर हिल कर इमेज बनाता है

प्लॉटर के लाभ-

  • यह बड़े बड़े आकार के पेज की आकृति को बनाने में किया जाता है लेकिन इसकी छपाई की गुणवत्ता अच्छी नही होती है
  • इसका उपयोग  बड़े बड़े नक़्शे और ब्लूप्रिंट बनाने के लिए किया जा सकता है यह इसकी सबसे बड़ी विशेषता है

प्लॉटर से हानि :

  • इसका आकार और प्रिंटरों की तुलना में बहुत बड़ा होता है
  • इसके साथ ही इसकी कीमत बहुत ज्यादा होती है

 

4. Screen Projector

यह भी एक input Devices है इसकी मदद से हम computer के screen को बड़े पर्दे पर देख सकते है जो की स

फेद स्क्रीन या किसी दीवाल पर हमें Computer के Screen पर हो रहे कार्यों को दिखाता है उदाहरण के लिए हम सिनेमा हाल का ले सकते हैं तो प्रोजेक्टर की मदद से हम Movie बड़ी स्क्रीन पर देखते हैं एक प्रोजेक्टर बड़ा, सीधा और सफ़ेद color का होना चाहिए

मुख्यतः एक projector का उपयोग हम Moving Images, slideshow और Videos को play करने के लिए किया जाता है

 Screen Projector

Projector का इस्तमाल कहाँ होता है

  • Projector का इस्तमाल स्कूल में बच्चो को समझाने के लिए किया जाता हैं
  • Projector की मदद से इमेज की गुणवत्ता अच्छी होती है
  • इनका इस्तेमाल छोटी इमेज को बड़ी इमेज करके देखने के लिए किया जाता है.
  • Projector का इस्तमाल करने आप movies को पड़े पर्दे पर देख सकते है

1.Portable Projector:-  

पुराने वाल प्रोजेक्टर कितने अच्छे नही थे लेकिन समय के साथ साथ इनमें काफी बदलाव आया और इसका सबसे अच्छा उदाहरण है पोर्टेबल प्रोजेक्टर इसका उपयोग  आप बड़े और छोटे क्लासरूम और Meeting Room  के लिए कर सकते  है

2.Installation Projectors (VX Series):-

इस प्रोजेक्टर का इस्तमाल हम  सेमिनार , बोर्डरूम , संग्रहालय , आदि क्षेत्रों करते  है इस प्रोजेक्टर की सबसे बड़ी विशेषता यह है की इनकी Brightness Range 5500 ANSI Lumens तक पहुँच सकती है। यह हमे  Miracast Wireless Projection की सुबिधा देते हैं।

3.Short Throw/Ultra Short Throw Projectors

इस प्रोजेक्टर का इस्तमाल आप कम जगह पर कर सकते है क्योंकि इसको दूर रखकर भी इसका इस्तमाल कर सकते है इसमें Installation Space कम होने के बावजुद भी यह अच्छी तरह से कार्य करता है यह प्रोजेक्टर कम स्थान लेते है

प्रोजेक्टर कैसे कार्य करते हैं 

अब हम आपको जानकारी देगे की प्रोजेक्टर कैसे कार्य करता है पहले प्रोजेक्टर को चलाना आसान था जिसमे हर एक Film की हर एक फ्रेम एक छोटी सी फोटो होती थी| फिर फोटो से Light को गुजारा जाता था इसके बाद  वह एक Lance पर गुजरती  है इस कारण से हमें छोटे फोटो का आकार बड़ा दिखता  है

वर्तमान समय में बाजार पर अनेक प्रकार के प्रोजेक्टर देखने को मिलते है लेकिन सबके काम करने का तरीका एक ही है चाहे उनकी क्षमता और Quality में अंतर हो सकता है  आज  के युग में प्रोजेक्टर का कार्य बदल गया है आज के प्रोजेक्टर में High Intensity की Light छोटे छोटे Pixels से होकर गुजरती है। आज के समय में प्रोजेक्टर को देखने के लिए 3 Display का  इस्तमाल किया गया है इस वजह से Light को 3 रंगों में से होकर गुजरना पड़ता है

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5. Speaker

Speaker का इस्तमाल करके हम ध्वनी सुन सकते हैं Speaker एक input और Hardware Device है यह computer से sound को उत्पन्न करता है  speaker की मदद से हम आवाज की रेंज कम या ज्यादा कर सकते हैं 

Speaker

 

काम कैसे करता है

स्पीकर के अन्दर एक लोहे का तार ,एक चुंबक और आवास (Housing) से बनता है जब हम speaker में input देते है तो वह आगे पीछे हिलने लगती है और  Vibration  होती है इस  Vibration  के कारण sound उत्पन्न होता है और वही sound हमारे कानों में सुनाई देता है

अंतिम राय

दोस्तों आज हमने आपको Output Device (आउटपुट डिवाइस) क्या है और इसके प्रकार , आउटपुट डिवाइस क्या है (Output Device in Hindi) , के बारे में आपको अधिक से अधिक जानकारी देने का प्रयास किया है 

आपको यह लेख कैसा लगा  निचे comment कर के जरुर  बताइए अगर अभी भी  कोई सवाल आप पूछना चाहते हो तो निचे Comment Box में जरुर लिखे| और कोई सुझाव देना चाहते हो तो भी जरुर दीजिये| हमारे Blog को अभी तक अगर आप Subscribe नहीं किये हैं तो जरुर Subscribe करें| जय हिंद, जय भारत, धन्यवाद|

 

 

 

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